शहपुरा NH-45 ओवरब्रिज कांड : वागड़ इन्फ्रा के विनोद जैन और ICT के हुकुम सिंह परमार पर FIR

Neel Tiwari | Feb 24, 2026, 24:02 IST
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जबलपुर के शहपुरा में एनएच-45 ओवरब्रिज मामला अब एफआईआर तक पहुंच गया है। मरम्मत के दौरान गिरी दूसरी लेन, कंपनी और सलाहकार पर केस दर्ज किया गया है।

News in short

  • शहपुरा ब्रिज हादसे में FIR हुई दर्ज।
  • शहपुरा में एनएच 45 का ओवरब्रिज दो बार क्षतिग्रस्त हुआ।
  • सितंबर 2025 में पहला हिस्सा गिरा था।
  • 22 फरवरी 2026 को दूसरी लेन भी ढह गई।
  • MPRDC अधिकारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई।
  • निर्माण कंपनी और सलाहकार पर BNS की गंभीर धाराएं लगीं।

News in Detail

जबलपुर भोपाल मार्ग पर बना रेल ओवरब्रिज अब पुलिस की जांच के घेरे में आ गया है। पहले इसे हादसा माना गया था। अब इसे लापरवाही और भ्रष्टाचार से जोड़ा जा रहा है।

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शहपुरा ओवरब्रिज हादसा

जबलपुर भोपाल हाईवे में ब्रिज गिरने के हादसे पर शहपुरा थाना में 23 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज हो गई है। इस मामले में पुलिस को दी गई शिकायत में शिकायतकर्ता MPRDC के संभागीय प्रबंधक राकेश मोरे हैं। घटना स्थल अमन ढाबा के पास है जो थाने से करीब तीन किलोमीटर पहले है। पुलिस ने मामले में BNS 2023 की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। मामले की जांच निरीक्षक प्रवीण कुमार धुर्वे कर रहे हैं।

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इन पर दर्ज हुआ मुकदमा

मुख्य आरोपी निर्माण कंपनी वागड़ इन्फ्रा प्रा. लि. है। यह कंपनी सोरथिया वेल्जी रतना के साथ संयुक्त उपक्रम में थी। अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विनोद जैन को नामजद किया गया है। इसके साथ ही पर्यवेक्षण सलाहकार आई सी टी प्रा. लि. भी आरोपी है। यह कंपनी नई दिल्ली की है। टीम लीडर हुकुम सिंह परमार पर भी केस दर्ज हुआ है। पुलिस का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी। जरूरत पड़ी तो अन्य लोगों को भी जोड़ा जाएगा।

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BNS की इन धाराओं में केस दर्ज

धारा 285 के तहत सार्वजनिक मार्ग में खतरा पैदा करने का आरोप है। धारा 324(5) में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान शामिल है।धारा 125 जीवन को खतरे में डालने से जुड़ी है। धारा 3(5) सामूहिक इरादे से किए गए कृत्य पर लागू होती है। इन धाराओं से मामला और गंभीर हो गया है।



CRRI रिपोर्ट में क्या सामने आया

नई दिल्ली स्थित Central Road Research Institute ने तकनीकी रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में पर्यवेक्षण मानकों की अनदेखी बताई गई। निर्माण के दौरान जरूरी जांच नहीं की गई। रिपोर्ट के आधार पर 2 जनवरी 2026 को कार्रवाई हुई थी। वागड़ इन्फ्रा को डिबार कर दिया गया था। कंपनी फिर भी स्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं बना सकी। शिकायत में कहा गया कि कई नोटिस जारी हुए थे। फिर भी स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई। इससे जनता की जान जोखिम में पड़ी।

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पहले गिरा एक हिस्सा अब दूसरी लेन भी ध्वस्त

सितंबर 2025 में ओवरब्रिज का एक हिस्सा गिरा था। तब एक लेन पूरी तरह बंद कर दी गई थी। दूसरी लेन से वन वे ट्रैफिक चल रहा था। मरम्मत का काम जारी बताया गया था। लोगों ने तब भी गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। कहा गया कि पुल समय से पहले कमजोर हुआ।

22 फरवरी 2026 को मरम्मत के दौरान फिर हादसा हुआ। दूसरी लेन का हिस्सा भी गिर गया। गनीमत रही कि उस समय कोई बड़ा वाहन यहां से गुजर नहीं रहा था। घटना के बाद मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया। जबलपुर भोपाल यातायात प्रभावित हुआ। लंबे रूट से वाहनों को डायवर्ट किया गया।

अब आगे क्या

पुलिस तकनीकी रिपोर्ट और दस्तावेज खंगाल रही है। निर्माण गुणवत्ता और भुगतान रिकॉर्ड जांचे जाएंगे। जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि इस मामले में निर्माण करने वाली कंपनी पर तो एक्शन लिया गया है पर एमपी आरडीसी के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्यवाही की मांग उठ रही है। स्थानीय लोग पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। मार्ग को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। यह मार्ग क्षेत्र की आर्थिक धुरी माना जाता है।

फिलहाल मलबा हटाने और सुरक्षा घेरा बना है। ब्रिज पर सुधार होने तक यातायात डाइवर्ट किया गया है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर है। हालांकि इस ब्रिज की गुणवत्ता में ऐसी खामियां सामने आ चुकी हैं जिससे अब इस मार्ग के जल्दी खुलने की उम्मीद कम ही है। अगर प्रशासन ने बिना पूरी जांच और पुष्टि के इस मार्ग को खोला तो आने वाले दिनों में एक और हादसे को न्योता दिया जा सकता है।

क्या बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर प्रारंभ किया जाएगा। हालांकि पिछली घटना के बाद 3 महीने बीत गए, लेकिन ब्रिज का दूसरा हिस्सा सुधर नहीं पाया। अब यह युद्ध स्तर पर मरम्मत की बात केवल एक आश्वासन जैसी लग रही है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि निर्माण जल्द पूरा होगा या नहीं। लोगों के मन में सवाल है कि जब इस मार्ग का उपयोग आम नागरिक नहीं कर पा रहे हैं, तो डायवर्टेड मार्ग से जाने पर उनसे टोल क्यों वसूला जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि टोल फ्री कर दिया गया है, लेकिन फास्ट टैग लगे वाहनों से टोल लगातार वसूला जा रहा है।

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