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News in short
- मध्य प्रदेश विधानसभा में अनुपूरक बजट पर तीखी बहस हुई।
- उमंग सिंघार ने कर्ज, ब्याज और किसानों के बजट पर सवाल उठाए।
- विपक्ष ने स्मार्ट मीटर से बढ़े बिजली बिल पर चिंता जताई, सरकार से जवाब मांगा।
- सिंघार ने सरकार से कर्ज और ब्याज भुगतान की पारदर्शिता की मांग की।
- किसान बजट को लेकर भी विवाद हुआ, विपक्ष ने 100 रुपए के प्रावधान को विरोधाभास बताया।
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश विधानसभा में अनुपूरक बजट पर तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष ने कर्ज, ब्याज और किसानों के बजट पर सवाल उठाए। स्मार्ट मीटर को लेकर भी आरोप लगे। वित्त मंत्री ने कहा कि हर कर्ज नियमों के अनुसार है। सरकार ने विकास कार्यों को प्राथमिकता बताया।
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क्या है पूरा मामला?
विधानसभा में अनुपूरक बजट पर बहस हुई। उमंग सिंघार ने कर्ज और ब्याज पर सवाल उठाए। किसानों के बजट प्रावधान को लेकर विवाद हुआ। स्मार्ट मीटर से बढ़े बिल पर चिंता जताई गई। वित्त मंत्री ने कर्ज को नियम अनुसार बताया। भोपाल में अनुपूरक बजट पर चर्चा गरम रही।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा। उन्होंने कुल कर्ज और ब्याज का हिसाब मांगा। कहा कि ब्याज पर कितना ब्याज चुकाया गया, यह जानकारी सदन में साफ होनी चाहिए। सिंघार ने विभागीय बजट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि साल के अंत में प्रस्ताव क्यों आए। एक विभाग का बजट 8,000 करोड़ बताया गया, उसी विभाग के लिए 4,700 करोड़ और जोड़े गए। उन्होंने नर्मदा घाटी विकास विभाग का उदाहरण दिया।
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कर्ज और ब्याज पर विपक्ष ने क्या सवाल उठाए
सिंघार ने कहा कि कुल खर्च स्पष्ट होना चाहिए। कितना कर्ज लिया गया, यह भी बताया जाए। ब्याज भुगतान की पूरी जानकारी दी जाए। ब्याज पर ब्याज का बोझ क्यों बढ़ रहा है। उन्होंने पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि समीक्षा में कमी दिखती है। मुख्यमंत्री की निगरानी पर भी सवाल उठे। कहा कि ऐसे में किसान कल्याण कैसे होगा। विपक्ष ने इसे गंभीर मुद्दा बताया।
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वित्त मंत्री ने कर्ज पर क्या जवाब दिया
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हर कर्ज नियम अनुसार है। भुगतान समय पर किया जा रहा है। सरकार विकास कार्यों को प्राथमिकता देती है। पूंजीगत खर्च पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुपूरक बजट जरूरी होता है। कई बार नई योजनाएं जोड़नी पड़ती हैं। जरूरत के अनुसार धन रखा जाता है। सरकार ने प्रक्रिया को सामान्य बताया।
किसानों के बजट पर क्यों उठा विवाद
सिंघार ने किसानों के बजट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केवल 100 रुपये का प्रावधान है। एक तरफ कृषि वर्ष की बात हो रही है, दूसरी तरफ राशि बहुत कम है। विपक्ष ने इसे विरोधाभास कहा। सिंघार ने ब्याज भुगतान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 160 करोड़ ब्याज के लिए तय हैं। ब्याज पर ब्याज का भी प्रावधान है। किसानों को सीधी राहत क्यों नहीं, यह सवाल उठाया और यह सदन में गूंजा।
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स्मार्ट मीटर और बढ़ते बिजली बिल पर क्या कहा
स्मार्ट मीटर को लेकर सवाल उठे। सरकार ने 700 करोड़ आमदनी का दावा किया। सिंघार ने पूछा कि मीटर किस कंपनी के हैं। उन्होंने कहा कि बिल अचानक बढ़े हैं। पहले 2,000 का बिल आता था, अब वही बिल 4,000 से 6,000 बताया गया। इससे आम उपभोक्ता परेशान हैं। विपक्ष ने इसे आर्थिक बोझ कहा। सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा गया। सदन में बहस अभी जारी है। आगे और स्पष्टीकरण आ सकते हैं। फिलहाल कर्ज और किसान मुद्दा केंद्र में है। जनता की नजर फैसलों पर टिकी है।
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