3.16 करोड़ में बनाई घटिया सड़क का खुलासा: मामला दबाने में लगे अफसर, दबाई रिपोर्ट, कार्रवाई रोकी

Ramanand Tiwari | Jan 20, 2026, 09:00 IST
Photograph: (thesootr)
श्योपुर में 3.16 करोड़ में बनी घटिया सड़क के मामले का जांच के बाद खुलासा हुआ। अफसरों ने रिपोर्ट दबाई, कार्रवाई रुकी। आरोपों में पूर्व अधीक्षण यंत्री वीरेंद्र झा का नाम।

News in Short

1. श्योपुर में 3.16 करोड़ में बनी सड़क का खुलासा हुआ।


2. जांच में रिपोर्ट दबाई गई और कार्रवाई में देरी हुई।


3. पूर्व अधीक्षण यंत्री वीरेंद्र झा और अन्य अधिकारियों पर सवाल।


4. सड़क की गुणवत्ता और माप में अंतर सामने आया।


5. मंत्री राकेश सिंह की सख्ती कागजों तक सीमित।



News in Detail

BHOPAL. श्योपुर जिले की एसके रोड से हिरनीखेड़ा की 8.60 किमी की सड़क गारंटी में ही उखड़ी। इसके आधार पर कार्यवाही किए जाने की अनुशंसा का प्रस्ताव अधीक्षण यंत्री कार्यालय को भेजा गया। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कार्रवाई का प्रस्ताव भोपाल नहीं पहुंचा।



यही नहीं, इस पूरे मामले में तत्कालीन अधीक्षण यंत्री वीरेंद्र झा की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है। जो कि वर्तमान में मुख्य अभियंता के पद पर पदस्थ है। सड़क की हालत ने साफ कर दिया कि कागजों में गुणवत्ता और जमीन पर हकीकत में बड़ा फर्क है।



सड़क की मोटाई और मेजरमेंट बुक में अंतर

जांच रिपोर्ट और मेजरमेंट बुक में काफी अंतर था। एसके रोड़ से हिरनीखेड़ा रोड की कुल सड़क की मोटाई मौके पर 430 मिलीमीटर थी और मेजरमेंट बुक में वहीं मौटाई 1025 मिलीमीटर दर्ज की गई। ऐसे ही उक्त सड़क के और मेजरमेंट में भी अंतर निरीक्षण रिपोर्ट में बताया गया है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार देश में इतनी मोटी सड़क का कोई प्रावधान ही नहीं है, न ही नेशनल हाईवे पर।



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पुरानी सड़क खोदे बिना पूरा भुगतान

जांच में यह भी सामने आया कि पुरानी सड़क को पूरी तरह खोदा ही नहीं गया। इसके बावजूद रिकॉर्ड में मिट्टीकरण, परतें और अन्य कार्य पहले ही पूरे दिखा दिए गए। यह सीधे-सीधे फर्जी माप और गलत पेमेंट की ओर इशारा करता है।



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स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन नहीं मिला जवाब

इस मामले में उपयंत्री राकेश पाराशर पर गंभीर आरोप हैं। पूर्व कार्यपालन यंत्री ने फाइनल बिल पेमेंट के लिए की गई जांच के बाद स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद अधिकारियों का ट्रांसफर हो गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।



बाद में कार्यपालन यंत्री विष्णु अग्रवाल ने 27 दिसंबर 2024 को निरीक्षण के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा। यह प्रस्ताव तत्कालीन अधीक्षण यंत्री वीरेंद्र झा के पास पहुंचा। लेकिन भोपाल मुख्यालय भेजने के बजाय उसे कार्यालय में ही पेंडिंग रखा गया।



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जांच रिपोर्ट में उजागर हुआ घोटाला

कार्यपालन यंत्री ने कार्रवाई का प्रस्ताव भी भेजा। फिर भी न ठेकेदार पर कार्रवाई हुई, न इंजीनियरों पर। अब वही अधिकारी मुख्य अभियंता के पद पर पदस्थ हैं। जब मुख्य अभियंता व्हीके झा से इस खबर पर वर्जन लिए जाने के लिए मोबाइल लगाया तो उन्होंने कोई जबाव नहीं दिया। उन्हें व्हाट्एप मैसेस भी भेजा, लेकिन कोई रिप्लाई ही नहीं आया। सवाल यह है कि क्या प्रस्ताव रोकना महज लापरवाही थी, या फिर ठेकेदार, इंजीनियर और अधिकारियों का घालमेल।



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मंत्री राकेश सिंह की सख्ती सिर्फ कागजों तक

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह लगातार सड़कों का निरीक्षण करवा रहे हैं। विभाग शोकॉज नोटिस भी जारी कर रहा है, लेकिन नतीजा सिफर दिखाई दे रहा है। श्योपुर जैसे मामलों में कार्रवाई न होना मंत्री की सख्ती पर सवाल खड़े करता है। क्या निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है।



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ठेकेदार के सामने विभाग बेबस

सड़क टूट रही है, रिपोर्ट में अनियमितता दर्ज है, फिर भी विभाग ठेकेदार और दोषी इंजीनियरों पर ठोस कार्रवाई से बचता नजर आ रहा है। यह पीडब्ल्यूडी के अंदर की मिलीभगत और संरक्षण को उजागर करता है। सिर्फ सड़क ही नहीं, ड्रेनेज और शोल्डर निर्माण में भी गंभीर खामियां मिलीं। कुछ काम मौके पर हुए ही नहीं, लेकिन भुगतान पूरा कर दिया गया।



गारंटी में सड़क, फिर नया टेंडर क्यों

सबसे बड़ा सवाल यही है जब सड़क गारंटी पीरियड में खराब हुई, सड़क के अंतिम बिल के निराकरण के बिना नया टेंडर क्यों लगाया गया। क्या यह पुराने दोषियों को बचाने का तरीका है।



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अधीक्षण यंत्री का जवाब और विभागीय उदासीनता

मौजूदा अधीक्षण यंत्री कोमल सिंह उइके का कहना है कि मैं रूटीन भ्रमण पर था, शिकायत के बिंदु नहीं देखे। मामला एक साल पुराना है। यह बयान ही दिखाता है कि पीडब्ल्यूडी में जिम्मेदारी किस हद तक बंटी हुई है।



अपनी ढपली अपना राग अलाप रहे अफसर

पीडब्ल्यूडी में हालात यह हैं कि इंजीनियर अपनी ढपली, अपना राग अलाप रहे हैं। घोटाले कि जांच रिपोर्ट इंजीनियरों द्वारा दी की गई, लेकिन कार्रवाई शून्य।



अब सवाल साफ है, क्या सरकार सब इंजीनियर राकेश पाराशर के साथ-साथ तत्कालीन अधीक्षण यंत्री, वर्तमान मुख्य अभियंता वीरेंद्र झा और ठेकेदार पर भी कार्रवाई करेगी। या श्योपुर की यह सड़क भी पीडब्ल्यूडी के पुराने घोटालों की सूची में जुड़कर रह जाएगी।



श्योपुर में घटिया सड़क



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