हत्या के बाद एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग तेज, जबलपुर में सड़क पर उतरे वकील

शिवपुरी में वकील संजय सक्सेना की हत्या के बाद मध्य प्रदेश के वकील सड़कों पर उतर गए। मप्र में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने की मांग उठी, जो पिछले 14 साल से लंबित है।

author-image
Neel Tiwari
एडिट
New Update
Demand for Advocate Protection Act

News in short

  • शिवपुरी में अधिवक्ता संजय सक्सेना की गोली मारकर हत्या की गई थी।
  • जबलपुर में वकीलों ने विरोध-प्रदर्शन किया और कोर्ट के कामकाज से अलग रहे।
  • अधिवक्ताओं ने 14 साल से लंबित 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' को लागू करने की मांग की।
  • वकीलों ने हत्या की जांच वरिष्ठ अधिकारियों से करवाने की मांग भी की।
  • अगर सरकार जल्दी कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन प्रदेशव्यापी होगा।

News in Detail

शिवपुरी में दिनदहाड़े अधिवक्ता संजय सक्सेना की गोली मारकर हत्या के बाद प्रदेशभर में वकीलों का आक्रोश फूट पड़ा है। जबलपुर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता सड़कों पर उतरे और कोर्ट के कामकाज से अलग रहे। एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत दिए जा रहे हैं।

शिवपुरी जिले के करैरा में शनिवार 14 फरवरी को 57 वर्षीय अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना अदालत जा रहे थे। इसी दौरान बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से वे सड़क पर ही गिर पड़े। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

Demand for Advocate Protection Act

ये भी पढ़ें...एमपी के शिवपुरी में वकील की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या, जानें मामला

सड़कों पर उतरे अधिवक्ता

शिवपुरी की घटना के विरोध में जबलपुर में अधिवक्ताओं का आक्रोश सामने आया। एमपी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और जिला अधिवक्ता संघ जबलपुर ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि 16 फरवरी को सभी अधिवक्ता कोर्ट कार्य से अलग रहेंगे। प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत अधिवक्ता के परिजन को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। साथ ही एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की।

ये भी पढ़ें...शिवपुरी में वकील की हत्या के विरोध में जबलपुर बार करेगा बहिष्कार, 16 फरवरी को न्यायिक कार्य से विरक्त रहेंगे अधिवक्ता

14 साल से अटका है प्रोटेक्शन एक्ट

अधिवक्ता 2012 से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। इसे अभी तक कानून का रूप नहीं मिला। प्रदर्शन में एमपी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन ने कहा कि अधिवक्ताओं को भू-माफिया और असामाजिक तत्वों से सामना करना पड़ता है। झूठे प्रकरण दर्ज होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने मांग की कि अधिवक्ताओं से जुड़े मामलों की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हो।

ये भी पढ़ें...हाईकोर्ट परिसर में गहराया जातीय टकराव, ओबीसी-सवर्ण अधिवक्ता आमने-सामने

वकीलों ने की कड़े कानून की मांग

अधिवक्ताओं ने अदालत परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने और संवेदनशील मामलों की सुनवाई के दौरान पुलिस सुरक्षा देने की भी मांग की गई है। ड्यूटी के दौरान वकीलों पर हमले को गैर-जमानती अपराध घोषित करने की भी मांग की गई है।

अधिवक्ता संघों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार शीघ्र निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन प्रदेशव्यापी किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भोपाल में बड़ा प्रदर्शन और दिल्ली मार्च की रणनीति बनाई जा सकती है।

ये भी पढ़ें...हाईकोर्ट परिसर में गहराया जातीय टकराव, ओबीसी-सवर्ण अधिवक्ता आमने-सामने

क्या है एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट?

मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य था, जिसने 2018 में शिवराज सरकार के अध्यादेश से इस एक्ट को मंजूरी दी। हालांकि, इसका क्रियान्वयन अभी लंबित है। नवंबर 2024 में विधि विधायी कार्य विभाग ने स्टेट बार काउंसिल को पत्र लिखकर प्रक्रिया शुरू होने की सूचना दी। यह वकीलों की लंबे समय से की जा रही मांग को पूरा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

जबलपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोहित वर्मा ने बताया कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला प्रस्तावित कानून है। यह कानून वकीलों पर हिंसा, धमकी, हमले या उत्पीड़न को रोकने के लिए बनाया गया है।

इस अधिनियम में वकीलों पर अपराधों को गैर-जमानती घोषित किया गया है। इसमें 6 महीने से 5 साल तक की सजा और 50 हजार से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। यह विधेयक वकीलों और ग्राहकों के बीच गोपनीयता की रक्षा करता है। गिरफ्तारी से पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य बनाता है।

मध्यप्रदेश जबलपुर शिवपुरी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट
Advertisment