जब लगा करियर खत्म हो रहा, तब पीएम मोदी ने...पढ़ें शिवराज की किताब के रोचक किस्से
Sanjay Dhiman | May 27, 2026, 10:25 IST
Photograph: (the sootr)
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी किताब अपनापन में पीएम नरेंद्र मोदी संग 35 साल के सफर और संस्मरण को प्रस्तुत किया है। इस किताब में उनके रिश्तों, चुनावी संघर्ष, कोविड, पहलगाम हमला जैसी घटनाओं का जिक्र किया है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों अपनी नई किताब को लेकर चर्चा में हैं। किताब का नाम है अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव। इस किताब में शिवराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने करीब 35 साल पुराने रिश्तों और राजनीतिक अनुभवों को बेहद आसान और भावुक अंदाज में लिखा है। राजनीति में लोग अक्सर चेहरे बदलते देखते हैं। भरोसे बदलते देखते हैं। लेकिन इस किताब में शिवराज ने मोदी के उस चेहरे को दिखाने की कोशिश की है, जिसे वे बेहद करीब से जानते हैं।
दिल्ली में मंगलवार 26 मई को इस किताब का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू भी मौजूद रहे। किताब सामने आते ही उसके कई किस्से चर्चा में आ गए। खासतौर पर वह फोन कॉल, जब शिवराज को लग रहा था कि उनका राजनीतिक करियर खत्म हो रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने किताब में लिखा कि 2023 विधानसभा चुनाव से पहले माहौल उनके खिलाफ बनाया जा रहा था। भाजपा की पहली सूची आई, लेकिन उसमें उनका नाम नहीं था। इसके बाद विपक्ष ने उनके एक बयान को मुद्दा बना लिया।
उन्होंने कहा था कि यदि हम चले जाएंगे तो याद बहुत आएंगे।
कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक विदाई की तरह प्रचारित करना शुरू कर दिया। कई तरह के तंज कसे गए। सोशल मीडिया में भी लगातार चर्चा चल रही थी कि शिवराज का दौर खत्म हो चुका है।
इसी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया। शिवराज लिखते हैं कि मोदी ने शुरुआत में ही कहा था कि मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा हूं। मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।
इसके बाद पीएम मोदी ने राजनीति नहीं, मन की बातें कीं। उन्होंने शिवराज से कहा कि कुछ दिन शांत रहिए। खुद को समय दीजिए। अपने भीतर झांकिए।
शिवराज लिखते हैं कि उस बातचीत ने उनका पूरा आत्मविश्वास बदल दिया। वे उत्तराखंड गए। गंगा किनारे समय बिताया। आत्ममंथन किया। लौटने के बाद पूरे जोश से चुनाव प्रचार में जुट गए। किताब के मुताबिक उन्होंने करीब 165 सभाएं कीं।
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किताब में अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। पूरा देश गुस्से में था। मोदी सऊदी अरब दौरा छोड़कर लौटे थे।
शिवराज लिखते हैं कि कैबिनेट बैठक में सभी नेताओं के मन में सवाल थे। लेकिन मोदी बेहद शांत दिखाई दे रहे थे।
बैठक में मोदी ने कहा था कि इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। जिन्होंने यह किया है, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।
शिवराज ने इसे मजबूत और धैर्यवान नेतृत्व की मिसाल बताया। उनके मुताबिक मोदी भावनाओं में बहने के बजाय रणनीति पर काम करते हैं।
किताब में 1990 के दशक का एक दिलचस्प किस्सा भी शामिल है। उस समय राजनीति में कंप्यूटर और ईमेल बहुत कम इस्तेमाल होते थे।
1998 की एक बैठक में नरेंद्र मोदी ने नेताओं से पूछा कि कितनों के पास ईमेल आईडी है। इस पर वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने मजाक करते हुए कहा था कि ईमेल-फीमेल करते रहते हैं, इससे क्या होगा?
बैठक में ठहाके लगे। लेकिन शिवराज लिखते हैं कि मोदी उस समय भी समझ चुके थे कि आने वाला दौर तकनीक का होगा। आज राजनीति से लेकर आम जिंदगी तक सबकुछ तकनीक के सहारे चल रहा है।
कोरोना महामारी के दौरान शिवराज सिंह चौहान खुद संक्रमित हो गए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
शिवराज लिखते हैं कि उस कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया। उन्होंने सिर्फ हालचाल नहीं पूछा। ऑक्सीजन लेवल, दवाइयों और परिवार की स्थिति तक जानकारी ली।
शिवराज के मुताबिक उस समय मोदी प्रधानमंत्री कम और परिवार के बड़े सदस्य ज्यादा लगे।
2019 में शिवराज सिंह चौहान के पिता का निधन हुआ था। किताब में उन्होंने लिखा कि सबसे पहला फोन नरेंद्र मोदी का आया।
मोदी ने परिवार की स्थिति, बीमारी और अंतिम समय तक की जानकारी ली। बाद में दिल्ली में मुलाकात होने पर भी उन्होंने परिवार का हाल पूछा।
शिवराज लिखते हैं कि राजनीति में इतनी व्यस्तता के बीच ऐसा अपनापन बहुत कम देखने मिलता है।
2025 में शिवराज अपने बेटों की शादी का निमंत्रण देने मोदी से मिलने पहुंचे। उन्हें लगा था कि मुलाकात कुछ मिनट चलेगी। लेकिन मोदी करीब 40 मिनट तक परिवार के साथ बैठे रहे।
उन्होंने डेयरी कारोबार, गायों की नस्ल और दूध उत्पादन तक की जानकारी ली। शादी समारोह में भी रिश्तेदारों से मिलते रहे। तस्वीरें खिंचवाते रहे।
शिवराज लिखते हैं कि उस दिन वहां प्रधानमंत्री नहीं, परिवार का मुखिया नजर आ रहा था।
हरियाणा की एक रैली में नरेंद्र मोदी ने दीपक कुमार नाम के पुराने कार्यकर्ता को पहचान लिया। दीपक 1990 के दशक में भाजपा कार्यालय में काम करते थे।
शिवराज लिखते हैं कि मोदी मंच से नीचे उतरे। उन्हें गले लगाया। पुराने दिनों की बातें कीं। वहां मौजूद लोग यह देखकर हैरान रह गए।
राजनीति में लोग चुनाव बाद जनता भूल जाते हैं। यहां दो दशक बाद कार्यकर्ता याद रखा गया। यही वजह है कि भाजपा संगठन में मोदी की पकड़ मजबूत मानी जाती है।
किताब में अमेरिका के टैरिफ विवाद का भी जिक्र है। उस समय चर्चा थी कि भारत अमेरिकी दबाव में आ सकता है।
लेकिन शिवराज के मुताबिक मोदी ने साफ कहा था कि किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं होगा।
उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ी तो राजनीतिक नुकसान भी झेलेंगे।
शिवराज ने पीएम स्वनिधि योजना का जिक्र भी भावुक अंदाज में किया है। उन्होंने लिखा कि पहले रेहड़ी-पटरी वालों को सम्मान नहीं मिलता था।
कोविड के दौरान शुरू हुई इस योजना ने उन्हें पहचान और आर्थिक सहारा दिया। मोदी ने इन्हें सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि स्ट्रीटप्रेन्योर कहा।
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दिल्ली में मंगलवार 26 मई को इस किताब का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू भी मौजूद रहे। किताब सामने आते ही उसके कई किस्से चर्चा में आ गए। खासतौर पर वह फोन कॉल, जब शिवराज को लग रहा था कि उनका राजनीतिक करियर खत्म हो रहा है।
2023 चुनाव में शिवराज को लगा सब खत्म हो रहा
उन्होंने कहा था कि यदि हम चले जाएंगे तो याद बहुत आएंगे।
कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक विदाई की तरह प्रचारित करना शुरू कर दिया। कई तरह के तंज कसे गए। सोशल मीडिया में भी लगातार चर्चा चल रही थी कि शिवराज का दौर खत्म हो चुका है।
तभी आया प्रधानमंत्री मोदी का फोन
इसके बाद पीएम मोदी ने राजनीति नहीं, मन की बातें कीं। उन्होंने शिवराज से कहा कि कुछ दिन शांत रहिए। खुद को समय दीजिए। अपने भीतर झांकिए।
शिवराज लिखते हैं कि उस बातचीत ने उनका पूरा आत्मविश्वास बदल दिया। वे उत्तराखंड गए। गंगा किनारे समय बिताया। आत्ममंथन किया। लौटने के बाद पूरे जोश से चुनाव प्रचार में जुट गए। किताब के मुताबिक उन्होंने करीब 165 सभाएं कीं।
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी का अलग अंदाज
शिवराज लिखते हैं कि कैबिनेट बैठक में सभी नेताओं के मन में सवाल थे। लेकिन मोदी बेहद शांत दिखाई दे रहे थे।
मोदी ने कहा- इस बार कार्रवाई अलग होगी
शिवराज ने इसे मजबूत और धैर्यवान नेतृत्व की मिसाल बताया। उनके मुताबिक मोदी भावनाओं में बहने के बजाय रणनीति पर काम करते हैं।
जब राजनीति में ईमेल भी मजाक बनता था
1998 की एक बैठक में नरेंद्र मोदी ने नेताओं से पूछा कि कितनों के पास ईमेल आईडी है। इस पर वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने मजाक करते हुए कहा था कि ईमेल-फीमेल करते रहते हैं, इससे क्या होगा?
बैठक में ठहाके लगे। लेकिन शिवराज लिखते हैं कि मोदी उस समय भी समझ चुके थे कि आने वाला दौर तकनीक का होगा। आज राजनीति से लेकर आम जिंदगी तक सबकुछ तकनीक के सहारे चल रहा है।
कोविड में अस्पताल पहुंचे शिवराज, तब भी आया फोन
शिवराज लिखते हैं कि उस कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया। उन्होंने सिर्फ हालचाल नहीं पूछा। ऑक्सीजन लेवल, दवाइयों और परिवार की स्थिति तक जानकारी ली।
शिवराज के मुताबिक उस समय मोदी प्रधानमंत्री कम और परिवार के बड़े सदस्य ज्यादा लगे।
पिता के निधन पर सबसे पहले आया कॉल
मोदी ने परिवार की स्थिति, बीमारी और अंतिम समय तक की जानकारी ली। बाद में दिल्ली में मुलाकात होने पर भी उन्होंने परिवार का हाल पूछा।
शिवराज लिखते हैं कि राजनीति में इतनी व्यस्तता के बीच ऐसा अपनापन बहुत कम देखने मिलता है।
बेटों की शादी में रिश्तेदारों से मिलते रहे मोदी
उन्होंने डेयरी कारोबार, गायों की नस्ल और दूध उत्पादन तक की जानकारी ली। शादी समारोह में भी रिश्तेदारों से मिलते रहे। तस्वीरें खिंचवाते रहे।
शिवराज लिखते हैं कि उस दिन वहां प्रधानमंत्री नहीं, परिवार का मुखिया नजर आ रहा था।
पुराने कार्यकर्ता को दो दशक बाद पहचान लिया
शिवराज लिखते हैं कि मोदी मंच से नीचे उतरे। उन्हें गले लगाया। पुराने दिनों की बातें कीं। वहां मौजूद लोग यह देखकर हैरान रह गए।
राजनीति में लोग चुनाव बाद जनता भूल जाते हैं। यहां दो दशक बाद कार्यकर्ता याद रखा गया। यही वजह है कि भाजपा संगठन में मोदी की पकड़ मजबूत मानी जाती है।
किसानों पर समझौता नहीं करेंगे
लेकिन शिवराज के मुताबिक मोदी ने साफ कहा था कि किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं होगा।
उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ी तो राजनीतिक नुकसान भी झेलेंगे।
पीएम स्वनिधि योजना को बताया सम्मान की शुरुआत
कोविड के दौरान शुरू हुई इस योजना ने उन्हें पहचान और आर्थिक सहारा दिया। मोदी ने इन्हें सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि स्ट्रीटप्रेन्योर कहा।
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