सीधी में मातृ मृत्यु दर का संकट: एक साल में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत
Anjali Dwivedi | May 29, 2026, 13:06 IST
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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी के कारण एक वर्ष में 53 प्रसूताओं की मौत हो गई। यहां मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा बढ़कर 211 तक पहुंच गया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- सीधी जिले में एक वर्ष में 53 गर्भवती महिलाओं की मौत हुई।
- सीधी में मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा 211 तक पहुंच गया है।
- जिला अस्पताल में रात के लिए कोई एनेस्थेसियोलॉजिस्ट नहीं है।
- जीवन रक्षक दवाओं और खून की कमी से प्रसूताएं दम तोड़ रही हैं।
- खराब सड़कों के कारण गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लाते हैं।
राष्ट्रीय औसत से बहुत खराब हैं यहां के आंकड़े
यह आंकड़ा राष्ट्रीय और राज्य स्तर से बेहद चिंताजनक है। मृत्यु दर के आंकड़ों की समीक्षा करने पर डराने वाले तथ्य मिले हैं। 16 महिलाओं की जान रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में गई। वहीं 13 महिलाओं ने अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
कुछ एम्बुलेंस की कमी के कारण समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकीं, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। वहीं 13 प्रसूताओं की मौत बुनियादी सुविधाओं के अभाव में घर पर ही हुई। वहीं पांच मौतें सीधी के जिला अस्पताल में दर्ज की गईं।
समय पर इलाज से बच सकती थीं कई जानें
गंभीर एनीमिया के कारण पांच महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। डॉक्टरों के मुताबिक इन सभी प्रसूताओं की जान बचाई जा सकती थी। समय पर सही इलाज मिलने से ये मौतें रोकी जा सकती थीं, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं और प्रसूताओं की मौत हो गई।
Maternal Mortality Ratio
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया नोटिस
सीधी जिला स्वास्थ्य ग्रेडिंग में लगातार सबसे नीचे बना हुआ है। इससे स्वास्थ्य विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है। सीधी जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में हालात बेहद खराब हैं।
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच यहां भारी भीड़ रही। इस दौरान वार्ड में 10 हजार 22 गर्भवती महिलाएं भर्ती की गईं। अस्पताल में कुल 5 हजार 922 प्रसव सफलतापूर्वक संपन्न कराए गए। अधिक काम के बोझ के कारण स्वास्थ्य कर्मी बेहद तनाव में हैं। संसाधनों की कमी के कारण भी इलाज प्रभावित हो रहा है।
केवल एक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट के भरोसे पूरा अस्पताल
Health Crisis
कर्मचारियों और डॉक्टरों की कमी से जूझता वार्ड
ब्लड बैंक में खून और प्लेटलेट्स की किल्लत
अत्यधिक दबाव और कर्मचारियों की कमी वाले प्रसव वार्ड, एक वर्ष में 53 मौतें: मध्य प्रदेश का जिला मातृ मृत्यु दर का केंद्र बिंदु है।
रामपुर नैकिन स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल तस्वीर
इतना ही नहीं इस केंद्र में रक्त चढ़ाने तक की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। खून की जरूरत होने पर मरीजों को रीवा भेजा जाता है। रीवा पहुंचने में मरीजों को कम से कम डेढ़ घंटे लगते हैं। इस कारण रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।
सड़कों के अभाव में चारपाई पर आती हैं महिलाएं
सीधी जिले की भौगोलिक स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के रास्ते में बड़ी बाधा है। कई आदिवासी गांवों तक पक्की सड़कों का संपर्क बिल्कुल नहीं है। यहां की अधिकांश गर्भवती महिलाएं गंभीर रूप से एनीमिया से पीड़ित हैं।
आदिवासी महिलाओं के खान-पान और पोषण का स्तर बहुत खराब है। इस वजह से प्रसव के समय अचानक कठिनाई बढ़ जाती हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के लिए इन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
सिहावल स्वास्थ्य केंद्र में जीवन रक्षक दवाएं खत्म
इतना ही नहीं सिहावल केंद्र के तीन प्रसव कक्षों में से दो पूरी तरह खराब हैं। प्रसव कराने के लिए केवल एक ही कमरा चालू हालत में है। यहां नौ नर्सों की जगह केवल पांच नर्सें काम कर रही हैं।
केंद्र में कोई भी स्थायी डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। कर्मचारियों की कमी से जूझते हुए प्रसव कार्य कराया जाता है। सुविधाओं की कमी के कारण 120 से अधिक मरीज रेफर हुए।
सरकार का दावा स्थितियां पहले से बेहतर हुई हैं
सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस
FAQ
- सीधी जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) इतनी अधिक क्यों है?
डॉक्टरों, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की भारी कमी है। इसके अलावा कठिन भौगोलिक रास्तों के कारण मानसून में एम्बुलेंस गांवों तक नहीं पहुंच पाती। आदिवासी बेल्ट की प्रसूताओं में गंभीर एनीमिया और पोषण की कमी भी मौतों की मुख्य वजह है। - सीधी जिला अस्पताल में प्रसूति सेवाओं की मुख्य कमियां क्या हैं?
अस्पताल में रात की शिफ्ट के लिए एनेस्थेसियोलॉजिस्ट नहीं है, जिससे रात में आपातकालीन सिजेरियन नहीं हो पाते। स्वीकृत पदों के मुकाबले स्टाफ आधा है। अस्पताल में समर्पित ऑपरेशन थिएटर, बाल रोग एक्सपर्ट, वेंटिलेशन यूनिट की कमी से मरीजों को रेफर करना पड़ता है। - ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में क्या मेन समस्याएं सामने आईं?
ग्रामीण केंद्रों में जीवन रक्षक दवाएं, इंजेक्शन और चालू प्रसव कक्षों की भारी किल्लत है। रामपुर नैकिन में खून चढ़ाने की सुविधा नहीं है। जननी वाहनों में मेडिकल स्टाफ नहीं होता, जिससे सड़कों के अभाव में गंभीर प्रसूताओं की जान रास्ते में ही जोखिम में पड़ जाती है।
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