वेतन का मामला सुलझाने दस साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहे 80 साल के रिटायर्ड शिक्षक
The Sootr | Aug 18, 2026, 23:09 IST
शिक्षक दिवस पर किया वादा
बड़वानी के रिटायर्ड जिला शिक्षा अधिकारी एमके सक्सेना नाराज हैं। उनका वेतनमान मामला करीब दस साल से लंबित है। सक्सेना की उम्र अब 80 वर्ष हो चुकी है।
बड़वानी के रिटायर्ड जिला शिक्षा अधिकारी एमके सक्सेना ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका वेतनमान संबंधी मामला करीब 10 साल से लंबित है। सक्सेना अब 80 वर्ष के हैं। उनका आरोप है कि कई स्तरों पर मामला पहुंचने के बावजूद आदेश नहीं हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री के जन विश्वास अभियान की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया है।
सक्सेना के मुताबिक उन्हें दूसरे समयमान वेतनमान में पे फिक्सेशन की गड़बड़ी के कारण कम वेतन मिला। उनका दावा है कि उन्हें ग्रेड पे 6600 रुपए मिलना चाहिए था।
इसके अलावा व्याख्याता पद पर 30 साल की सेवा पूरी करने पर तीसरे समयमान वेतनमान का भी लाभ नहीं मिला। यह वेतनमान पुराने स्केल में 10000 से 15200 रुपए के बीच था। सक्सेना का कहना है कि इन दोनों मामलों में संशोधित आदेश आज तक जारी नहीं हुआ है।
सक्सेना का दावा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के मौके पर उनके साथ हो रहे अन्याय को स्वीकार किया था। उनका कहना है कि इसके बाद भी एक साल में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सक्सेना ने यह भी दावा किया है कि तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों अनुराग जैन, डॉ राजोरा और डॉ गोयल ने भी उनके साथ हुए अन्याय को माना है। इसके साथ ही एक विधायक, उपमुख्यमंत्री देवड़ा और भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी इस मामले को स्वीकार किया है, ऐसा सक्सेना का कहना है। सक्सेना के मुताबिक इन सभी तथ्यों और प्रमाणों को उनके आवेदन में शामिल किया गया है।
सीएम मोहन यादव का "दूसरा जन विश्वास अभियान" बड़वानी जिले में 14 अगस्त 2026 को शुरू हुआ। इस अभियान का मकसद लोगों की समस्याओं का निराकरण बताया जा रहा है।
सक्सेना ने सवाल उठाया कि जब उनका खुद का 10 साल पुराना मामला हल नहीं हो पाया, तो इस अभियान का औचित्य क्या रह जाता है। उनका कहना है कि मंत्रालय में संबंधित मंत्री और अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।
सक्सेना ने यह भी सवाल उठाया कि 5 सितंबर 2025 को किया गया वादा, आने वाले 5 सितंबर 2026 के शिक्षक दिवस तक पूरा हो पाएगा या नहीं। उन्होंने इसे लेकर सीधा सवाल खड़ा किया है।
सक्सेना ने बताया कि सीएम डॉ मोहन यादव ने 26 जून 2026 को समाचार पत्रों में बुजुर्गों को लेकर एक बयान दिया था। सक्सेना का कहना है कि उनका खुद का मामला हल न होने से यह बयान महज एक मजाक बनकर रह गया है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के प्रशासन में गड़बड़ी और अंधेरगर्दी की आशंका जताई है।
सक्सेना ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि मध्य प्रदेश में सीएम के आदेश मंत्री नहीं मानते, और मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव के आदेश विभागीय अधिकारी नहीं मानते। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में रिटायर्ड कर्मचारियों के मामलों में सालों तक कार्रवाई नहीं होती।
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क्या है असली विवाद
इसके अलावा व्याख्याता पद पर 30 साल की सेवा पूरी करने पर तीसरे समयमान वेतनमान का भी लाभ नहीं मिला। यह वेतनमान पुराने स्केल में 10000 से 15200 रुपए के बीच था। सक्सेना का कहना है कि इन दोनों मामलों में संशोधित आदेश आज तक जारी नहीं हुआ है।
सीएम ने खुद मानी बात
सक्सेना ने यह भी दावा किया है कि तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों अनुराग जैन, डॉ राजोरा और डॉ गोयल ने भी उनके साथ हुए अन्याय को माना है। इसके साथ ही एक विधायक, उपमुख्यमंत्री देवड़ा और भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी इस मामले को स्वीकार किया है, ऐसा सक्सेना का कहना है। सक्सेना के मुताबिक इन सभी तथ्यों और प्रमाणों को उनके आवेदन में शामिल किया गया है।
जन विश्वास अभियान पर उठाए सवाल
सक्सेना ने सवाल उठाया कि जब उनका खुद का 10 साल पुराना मामला हल नहीं हो पाया, तो इस अभियान का औचित्य क्या रह जाता है। उनका कहना है कि मंत्रालय में संबंधित मंत्री और अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।
सक्सेना ने यह भी सवाल उठाया कि 5 सितंबर 2025 को किया गया वादा, आने वाले 5 सितंबर 2026 के शिक्षक दिवस तक पूरा हो पाएगा या नहीं। उन्होंने इसे लेकर सीधा सवाल खड़ा किया है।
बुजुर्गों पर बयान को बताया मजाक
सक्सेना ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि मध्य प्रदेश में सीएम के आदेश मंत्री नहीं मानते, और मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव के आदेश विभागीय अधिकारी नहीं मानते। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में रिटायर्ड कर्मचारियों के मामलों में सालों तक कार्रवाई नहीं होती।
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