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उज्जैन भस्म आरती:मध्यप्रदेश की धर्म नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब भक्तों को भस्म आरती की बुकिंग के साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि उन्हें आरती के दौरान कहां बैठना है।
मंदिर समिति इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में है ताकि भक्तों के बीच होने वाले विवादों और धक्का-मुक्की को खत्म किया जा सके। यह बदलाव उन श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी राहत होगी जो दूर-दराज से महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं।
वर्तमान में, भक्तों को भस्म आरती के दर्शन की अनुमति तो मिल जाती है लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उन्हें किस मंडपम (नंदी, गणेश या कार्तिकेय) में बैठाया जाएगा। इस अनिश्चितता के कारण अक्सर मंदिर में भक्तों और प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है, खासकर आगे बैठने की होड़ में।
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पहले आओ, पहले पाओ
उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के मुताबिक, यह नई व्यवस्था 'पहले आओ, पहले पाओ' के सिद्धांत पर आधारित होगी। इसका मतलब है कि जो भक्त पहले आवेदन करेंगे उन्हें आगे की पंक्ति में बैठने का मौका मिलेगा।
यह व्यवस्था इस धारणा को भी खत्म कर देगी कि केवल वीआईपी ही आगे बैठकर भस्म आरती का दर्शन कर सकते हैं। यह कदम सभी भक्तों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा।
भस्म आरती दर्शन की नई व्यवस्था क्या है
यह बदलाव सिर्फ एक तकनीकी नवाचार नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व भी है।
- व्यवस्था में सुधार: नई प्रणाली से महाकाल मंदिर की भस्म आरती की दर्शन व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन आएगा। भक्तों को पहले से ही अपने बैठने की जगह पता होने से अनावश्यक भीड़ और धक्का-मुक्की की स्थिति नहीं बनेगी।
- विवादों पर लगाम: आए दिन आगे बैठने को लेकर होने वाले झगड़ों और विवादों पर लगाम लगेगी। भक्त शांतिपूर्ण तरीके से भगवान महाकाल की आरती का दर्शन कर पाएंगे।
- भक्तों को सुविधा: इस नई व्यवस्था से भक्तों को मानसिक शांति मिलेगी। उन्हें यह चिंता नहीं रहेगी कि उन्हें बैठने की जगह कहाँ मिलेगी। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को एक सुगम और सुखद अनुभव मिलेगा।
- समानता को बढ़ावा: यह व्यवस्था वीआईपी कल्चर को खत्म करेगी और सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन का अवसर देगी। 'प्रथम आओ, प्रथम पाओ' का सिद्धांत यह सुनिश्चित करेगा कि हर भक्त को उसकी बारी के अनुसार सम्मानजनक स्थान मिले।
वर्तमान और नई दर्शन व्यवस्था की तुलनावर्तमान व्यवस्था:
नई व्यवस्था:
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महाकाल भस्म आरती का महत्व
महाकाल भस्म आरती (Mahakal Bhasm Aarti) को भगवान महाकाल के दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र हिस्सा माना जाता है। यह आरती प्रतिदिन तड़के 4 बजे होती है और इसमें भगवान को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि, यह एकमात्र ऐसी आरती है जहां भगवान को जीवित देवता के रूप में पूजा जाता है।
इस आरती में भाग लेने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर समिति प्रतिदिन लगभग 17 सौ भक्तों को महाकाल भस्म आरती दर्शन की अनुमति देती है। इस आरती को देखने के लिए एडवांस बुकिंग की जाती है।
नई व्यवस्था से बुकिंग प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी हो जाएगी, जिससे भक्तों को लंबी कतारों और अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति मिलेगी। यह बदलाव महाकाल मंदिर प्रबंधन की भक्तों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इसके अलावा, मंदिर में अन्य तकनीकी नवाचारों पर भी काम चल रहा है, जिसका उद्देश्य भक्तों के लिए दर्शन को और अधिक सुविधाजनक बनाना है।
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