उज्जैन के सामानेरा में मिला सदियों पुराना इतिहास, गुप्त और परमार काल के मिले अवशेष
Aman Vaishnav | Oct 26, 2026, 08:40 IST
उज्जैन के सामानेरा में मिले परमार और गुप्त काल के दुर्लभ मंदिर अवशेष और मूर्तियां, विशेषज्ञों ने प्राचीन सभ्यता होने की जताई संभावना।
उज्जैन की माकड़ौन तहसील के सामानेरा गांव में पुरातात्विक सर्वे के दौरान कई सदियों पुराने अवशेष मिले हैं। अश्विनी शोध संस्थान की टीम ने यहां परमार काल की उमा-महेश्वर की दो बेहद सुंदर मूर्तियां खोजी हैं। जानकारों का मानना है कि यहां गहरी खुदाई होने पर ताम्र पाषाण काल की इंसानी बस्तियों के सबूत भी मिल सकते हैं।
उज्जैन के सामानेरा में इतिहास की नई खोज
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सर्वे के दौरान गांव में मौजूद प्राचीन मां ब्रह्माणी माता मंदिर के पास कगार से उमा-महेश्वर (Uma-Maheshwar Idols) की दो बहुत ही खूबसूरत परमार कालीन मूर्तियां मिली हैं। इसके अलावा जब टीम ने भवानी मंदिर परिसर की पड़ताल की, तो वहां भी कई हैरान करने वाले अवशेष हाथ लगे। मंदिर के स्थानीय संरक्षक दिनेश पंड्या की देखरेख में इन सभी ऐतिहासिक चीजों को पूरी तरह सुरक्षित रख लिया गया है।
भवानी मंदिर परिसर से मिले मुख्य अवशेष
- एक प्राचीन देवी प्रतिमा
- प्रवेश द्वार पर लगने वाली द्वार-गणपति की मूर्ति
- प्राचीन मंदिर के शिखर का टूटा हुआ स्थापत्य हिस्सा
- परमार काल में इस्तेमाल होने वाली खास चौड़ी ईंटें
क्या गुप्त काल और ताम्र पाषाण संस्कृति से जुड़े हैं तार?
शोधकर्ताओं को यहां जलाधारियां और नंदी महाराज की मूर्तियां मिली हैं। इनकी नक्काशी और बनावट देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये गुप्त काल (Gupta Period) की हो सकती हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच और विस्तार से अध्ययन करने के बाद ही हो पाएगी।
पुरातत्व (Gupta Era and Chalcolithic Civilization) के जानकारों का मानना है कि अगर यहां बड़े स्तर पर खुदाई और जांच की जाए, तो ताम्र पाषाण काल (Chalcolithic Age) की पुरानी बस्तियों के सबूत भी मिल सकते हैं। यहां मंदिरों के शिखर के टुकड़े और खास तरह की ईंटें भी मिली हैं। इनसे पता चलता है कि परमार और गुप्त काल में यहां भव्य मंदिर हुआ करते थे। समय के साथ ये मंदिर धीरे-धीरे खत्म हो गए, लेकिन इनके अवशेष आज भी उस दौर की कहानी बयां करते हैं।
ये खबर क्यों जरूरी है?
गुप्त काल से लेकर परमार काल तक के मंदिर अवशेष यह साबित करते हैं कि, यहां सदियों तक एक समृद्ध सभ्यता फली-फूली थी। इस खोज से आने वाले समय में इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए मालवा क्षेत्र के प्राचीन इतिहास को और गहराई से समझने का रास्ता साफ होगा। साथ ही अगर यहां आगे चलकर बड़ा उत्खनन होता है, तो यह पूरा इलाका ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन के नक्शे पर एक नई पहचान बना सकता है।
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