उज्जैन शाही मस्जिद पर इंदौर हाईकोर्ट का आदेश: निगम के सभी आश्वासन अब बाध्यकारी, रिट अपील खारिज
Sanjay Gupta | Sept 29, 2026, 13:20 IST
उज्जैन शाही मस्जिद मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
इंदौर हाईकोर्ट ने उज्जैन शाही मस्जिद की दो रिट अपील खारिज कर दी हैं। मंगलवार को जारी दो पेज के आदेश में साफ लिखा है कि उज्जैन नगर निगम के सभी आश्वासन उस पर बाध्यकारी होंगे। मामला सिंहस्थ 2028 के लिए कोयला फाटक से गोपाल मंदिर रोड के चौड़ीकरण से जुड़ा है। निगम ने मुआवजे में एफएआर और टीडीआर की पेशकश की है।
इंदौर हाईकोर्ट ने उज्जैन शाही मस्जिद की दो रिट अपील खारिज कर दी हैं। मंगलवार को दो पेज का औपचारिक आदेश जारी हुआ। इसमें साफ लिखा है कि निगम के सभी आश्वासन उस पर बाध्यकारी होंगे।
मामला सिंहस्थ 2028 के लिए बन रही सड़क से जुड़ा है। तो आखिर समझौते में क्या तय हुआ? आदेश में उसका ब्योरा नहीं है।
सिंहस्थ 2028 के लिए कोयला फाटक से गोपाल मंदिर रोड चौड़ी होनी है। छत्री चौक पर उज्जैन शाही मस्जिद का एक हिस्सा बाधक बताया गया। मस्जिद पक्ष ने इंदौर हाईकोर्ट में दो रिट अपील लगाईं। उज्जैन नगर निगम से समझौता होने पर अपीलें वापस ले ली गईं। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने निगम के आश्वासन बाध्यकारी बताए।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने यह आदेश दिया। कोर्ट को बताया गया कि अपीलकर्ता और निगम के बीच मामला सुलझ चुका है। इसी आधार पर अपील वापस ली गई।
कोर्ट के पास समझौते का विवरण नहीं है। फिर भी अपीलकर्ता के वकील का अनुरोध माना गया। अपीलों को वापस ली हुई मानकर खारिज कर दिया गया। यह हाईकोर्ट का आदेश समझौते के आधार पर आया है।
रिट अपील (किसी आदेश को चुनौती देने वाली अपील) अब निपट चुकी है। अब सवाल है कि निगम पर क्या बंधन आया?
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि नगर निगम ने जो भी वादे किए हैं, उन्हें पूरा करना होगा। निगम ने अपने जवाब और नोटिस में जो बातें कही हैं, वे सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन पर अमल करना जरूरी होगा।
कोर्ट ने कहा कि निगम के ये आश्वासन उसके लिए बाध्यकारी रहेंगे। इसके बाद याचिकाकर्ता की सहमति के आधार पर याचिका को खत्म कर दिया गया।
रिट अपील में वादों का खुलासा नहीं हुआ। लेकिन रिट पिटीशन (सीधे हाईकोर्ट में लगी याचिका) में निगम का जवाब आया था। वह जवाब विस्तृत था। उसमें मुआवजे के बतौर एफएआर (FAR – Floor Area Ratio) की पेशकश है। वैकल्पिक तौर पर टीडीआर (TDR – Transferable Development Rights) की भी पेशकश है।
उज्जैन में कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के लिए छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम मंगलवार सुबह से शांतिपूर्वक जारी है। सहमति बनने के बाद कमेटी के सदस्य और मुस्लिम समाज के लोग खुद अपने हाथों से प्रभावित निर्माण को हटाने में जुट गए हैं।
मस्जिद के नीचे संचालित करीब 10 दुकानों को भी देर रात खाली करा लिया गया था। वहीं, सोशल मीडिया पर शाही मस्जिद को लेकर कई भ्रामक वीडियो और रील्स प्रसारित की गई थीं। इस मामले में अफवाह फैलाने वाले साजिद खान, इमरान खान, गुलरेज खान और बिल्लू पठान के नाम सामने आए हैं।
इसके अलावा पथराव की घटना में पुलिस ने बिलाल, तालू हेला, नदीम, शाकिर, तौफिक, सलीम, शाहनवाज, आर्षद दीवान, अल्तमस, अरबाज और वसीम मंसूरी सहित 15 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।
एफएआर यानी जमीन के मुकाबले कितना निर्माण हो सकेगा। टीडीआर यानी निर्माण का ऐसा अधिकार, जिसे दूसरी जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह इलाका टीडीआर जेनरेटिंग एरिया (जहां टीडीआर मिल सकता है) घोषित है।
सोचिए, हिस्सा हटने के बदले निर्माण का अधिकार मिल रहा है। बाधक हिस्सा जाएगा तो मस्जिद पक्ष को नियमानुसार एफएआर या टीडीआर मिलेगा। मस्जिद पक्ष का कहना था, वह खुद बाधक हिस्सा हटा रहा है। (यह दावा अभी confirm नहीं हुआ है)
याचिकाएं दो थीं। पहली शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान, चाउ बाजार उज्जैन की थी। दूसरी शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान म्यूनिसिपल उज्जैन की थी। दोनों में अशफाक अहमद का नाम है।
पक्षकार भी तय थे। इनमें मप्र (MP – Madhya Pradesh) शासन शामिल था। ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी (T&CP – Town and Country Planning) भी थे। निगम बिल्डिंग ऑफिसर भी शामिल था। उज्जैन कलेक्टर भी पक्षकार थे। मप्र वक्फ बोर्ड के सीईओ (CEO – Chief Executive Officer) भी थे।
कोयला फाटक से गोपाल मंदिर रोड 15 मीटर चौड़ी होनी है। इस रोड चौड़ीकरण की जद में 323 मकान और 15 धर्मस्थल हैं। कोयला फाटक से कंठाल चौराहे तक 8 धर्मस्थल शिफ्ट हो चुके हैं।
फिर निगम कंठाल से गोपाल मंदिर की ओर बढ़ा। छत्री चौक पर शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने की बात उठी। विवाद यहीं से शुरू हुआ और मामला अदालत की दहलीज तक पहुंचा।
इससे पहले रिट पिटीशन पर 27 पेज का आदेश आ चुका है। सिंगल बेंच (एक जज वाली पीठ) ने साफ टिप्पणी की। मामले को बेवजह धार्मिक रंग दिया जा रहा है। सभी पर समान कार्रवाई हो रही है।
आदेश के मुताबिक करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए यह कार्रवाई जरूरी है। अब नजर इस पर रहेगी कि निगम अपने आश्वासन कैसे निभाता है।
मामला सिंहस्थ 2028 के लिए बन रही सड़क से जुड़ा है। तो आखिर समझौते में क्या तय हुआ? आदेश में उसका ब्योरा नहीं है।
समझें क्या है पूरा मामला
क्यों खारिज हुई रिट अपील?
कोर्ट के पास समझौते का विवरण नहीं है। फिर भी अपीलकर्ता के वकील का अनुरोध माना गया। अपीलों को वापस ली हुई मानकर खारिज कर दिया गया। यह हाईकोर्ट का आदेश समझौते के आधार पर आया है।
रिट अपील (किसी आदेश को चुनौती देने वाली अपील) अब निपट चुकी है। अब सवाल है कि निगम पर क्या बंधन आया?
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि निगम के ये आश्वासन उसके लिए बाध्यकारी रहेंगे। इसके बाद याचिकाकर्ता की सहमति के आधार पर याचिका को खत्म कर दिया गया।
निगम ने क्या वादा किया?
मुस्लिम समाज के लोग खुद हटा रहे मस्जिद का हिस्सा
मस्जिद के नीचे संचालित करीब 10 दुकानों को भी देर रात खाली करा लिया गया था। वहीं, सोशल मीडिया पर शाही मस्जिद को लेकर कई भ्रामक वीडियो और रील्स प्रसारित की गई थीं। इस मामले में अफवाह फैलाने वाले साजिद खान, इमरान खान, गुलरेज खान और बिल्लू पठान के नाम सामने आए हैं।
इसके अलावा पथराव की घटना में पुलिस ने बिलाल, तालू हेला, नदीम, शाकिर, तौफिक, सलीम, शाहनवाज, आर्षद दीवान, अल्तमस, अरबाज और वसीम मंसूरी सहित 15 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।
क्या है एफएआर और टीडीआर?
सोचिए, हिस्सा हटने के बदले निर्माण का अधिकार मिल रहा है। बाधक हिस्सा जाएगा तो मस्जिद पक्ष को नियमानुसार एफएआर या टीडीआर मिलेगा। मस्जिद पक्ष का कहना था, वह खुद बाधक हिस्सा हटा रहा है। (यह दावा अभी confirm नहीं हुआ है)
किसने लगाई थीं दोनों याचिकाएं?
पक्षकार भी तय थे। इनमें मप्र (MP – Madhya Pradesh) शासन शामिल था। ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी (T&CP – Town and Country Planning) भी थे। निगम बिल्डिंग ऑफिसर भी शामिल था। उज्जैन कलेक्टर भी पक्षकार थे। मप्र वक्फ बोर्ड के सीईओ (CEO – Chief Executive Officer) भी थे।
सिंहस्थ रोड में कौन जद में?
फिर निगम कंठाल से गोपाल मंदिर की ओर बढ़ा। छत्री चौक पर शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने की बात उठी। विवाद यहीं से शुरू हुआ और मामला अदालत की दहलीज तक पहुंचा।
सिंगल बेंच ने क्या कहा था?
आदेश के मुताबिक करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए यह कार्रवाई जरूरी है। अब नजर इस पर रहेगी कि निगम अपने आश्वासन कैसे निभाता है।
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