चेहरा देखकर बंटा उज्जैन में मुआवजा, नेताओं को 3 करोड़, बाकियों को 60 लाख हेक्टेयर
Sanjay Dhiman | Jul 25, 2026, 16:28 IST
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उज्जैन में सिंहस्थ बायपास के लिए जमीन अधिग्रहण में मुआवजे का फॉर्मूला विवादों में है। कस्बे में किसानों को कम रकम मिल रही है, जबकि मोहनपुरा में सबको औसत दर से मुआवजा दिया गया।
उज्जैन में सिंहस्थ बायपास चौड़ीकरण के लिए जमीन ली जा रही है। मुआवजे की दर तय करने में बड़ा फर्क देखा गया है। उज्जैन कस्बा में कुछ किसानों को कम मुआवजा मिल रहा है। मोहनपुरा गांव में सभी को औसत दर से मुआवजा दिया गया। इस फर्क से किसानों में नाराजगी और विवाद बढ़ गया है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुआवजे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सिंहस्थ बायपास का फोरलेन बनाने के लिए किसानों की जमीन ली जा रही है। लेकिन मुआवजा तय करने के तरीके पर अब सवाल उठ रहे हैं।
उज्जैन कस्बा में सामान्य जमीन का मुआवजा तीन करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर तय है। लेकिन सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन के लिए किसानों को सिर्फ 60.48 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर मिल रहे हैं।
यह अंतर पांच गुना से भी ज्यादा है। इसी वजह से कई किसान नाराज हैं। कई किसानों ने कम मुआवजे के कारण जमीन देने से इनकार भी कर दिया है।
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किसानों का कहना है कि यह फॉर्मूला उनके साथ अन्याय है। कई किसान परिवार पहले से मुआवजे के इंतजार में परेशान हैं।
किसान मनोहरसिंह ने बताया कि सिंहस्थ-2016 में उन्हें गाइडलाइन दर बीस लाख रुपए पर चालीस लाख रुपए मुआवजा मिला था। इस बार गाइडलाइन दर सिर्फ बारह लाख रुपए है। मुआवजा भी घटकर चौबीस लाख रुपए रह गया है।
योग माता नाम की महिला ने भी अपनी परेशानी बताई। पिछली बार साढ़े सात हजार वर्गफीट जमीन के लिए उन्हें सोलह लाख रुपए मिले थे। इस बार उतनी ही जमीन के लिए सिर्फ चार लाख रुपए मिल रहे हैं।
मोहनपुरा गांव में अफसरों ने अलग तरीका अपनाया। यहां जमीन की तीन अलग गाइडलाइन दरें थीं।
भद्रबाहु मार्ग की जमीन के लिए दर तीन करोड़ चौहत्तर लाख रुपए प्रति हेक्टेयर थी। नगर क्षेत्र की जमीन के लिए दर दो करोड़ चालीस लाख रुपए थी। सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन के लिए दर सिर्फ अड़तीस लाख चौबीस हजार रुपए थी।
अफसरों ने तीनों दरों का औसत निकाला। इस तरह सभी किसानों को दो करोड़ सत्रह लाख रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा तय हुआ।
इससे सबसे महंगी जमीन वाले किसानों को नुकसान हुआ। उन्हें अपनी गाइडलाइन दर से करीब एक करोड़ सत्तावन लाख रुपए प्रति हेक्टेयर कम मुआवजा मिला।
उज्जैन कस्बा में यह औसत फॉर्मूला लागू नहीं किया गया। यहां सिर्फ दो गाइडलाइन दरें थीं। सामान्य जमीन के लिए तीन करोड़ रुपए और सिंहस्थ क्षेत्र के लिए 60.48 लाख रुपए।
अफसरों ने दोनों दरों को अलग-अलग रखा। इसका सीधा फायदा उन किसानों को हुआ जिनकी जमीन तीन करोड़ रुपए वाली श्रेणी में आती है।
सूत्रों का कहना है कि अगर यहां भी औसत दर लागू होती, तो कुछ प्रभावशाली लोगों का मुआवजा कम हो जाता। इसी वजह से यह फॉर्मूला नहीं अपनाया गया।
इस मामले में एसडीएम (SDM – Sub Divisional Magistrate) एलएन गर्ग से सवाल पूछे गए। उनका कहना है कि मुआवजा दर बिक्री छांट, गाइडलाइन और किसानों की सहमति के आधार पर तय होती है।
उन्होंने बताया कि सात गांवों में से चार गांवों में गाइडलाइन के आधार पर मुआवजा तय हुआ है। जहां सहमति बनी, वहीं गाइडलाइन का इस्तेमाल हुआ।
एसडीएम गर्ग ने बताया कि अवार्ड पारित होने के बाद धारा-33 के तहत सिर्फ लिपिकीय त्रुटि सुधारी जा सकती है। मुआवजा दर से जुड़ी आपत्ति के लिए धारा-64 के तहत न्यायालय में रेफरेंस आवेदन किया जा सकता है।
यानी नाराज किसानों के पास अब कोर्ट जाने का रास्ता बचा है। कई किसान इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और शिकायतें आ सकती हैं।
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मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुआवजे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सिंहस्थ बायपास का फोरलेन बनाने के लिए किसानों की जमीन ली जा रही है। लेकिन मुआवजा तय करने के तरीके पर अब सवाल उठ रहे हैं।
मुआवजे में बड़ा अंतर
यह अंतर पांच गुना से भी ज्यादा है। इसी वजह से कई किसान नाराज हैं। कई किसानों ने कम मुआवजे के कारण जमीन देने से इनकार भी कर दिया है।
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किसानों की नाराजगी
किसान मनोहरसिंह ने बताया कि सिंहस्थ-2016 में उन्हें गाइडलाइन दर बीस लाख रुपए पर चालीस लाख रुपए मुआवजा मिला था। इस बार गाइडलाइन दर सिर्फ बारह लाख रुपए है। मुआवजा भी घटकर चौबीस लाख रुपए रह गया है।
योग माता नाम की महिला ने भी अपनी परेशानी बताई। पिछली बार साढ़े सात हजार वर्गफीट जमीन के लिए उन्हें सोलह लाख रुपए मिले थे। इस बार उतनी ही जमीन के लिए सिर्फ चार लाख रुपए मिल रहे हैं।
मोहनपुरा का फॉर्मूला
भद्रबाहु मार्ग की जमीन के लिए दर तीन करोड़ चौहत्तर लाख रुपए प्रति हेक्टेयर थी। नगर क्षेत्र की जमीन के लिए दर दो करोड़ चालीस लाख रुपए थी। सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन के लिए दर सिर्फ अड़तीस लाख चौबीस हजार रुपए थी।
अफसरों ने तीनों दरों का औसत निकाला। इस तरह सभी किसानों को दो करोड़ सत्रह लाख रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा तय हुआ।
इससे सबसे महंगी जमीन वाले किसानों को नुकसान हुआ। उन्हें अपनी गाइडलाइन दर से करीब एक करोड़ सत्तावन लाख रुपए प्रति हेक्टेयर कम मुआवजा मिला।
उज्जैन कस्बा में भेदभाव
अफसरों ने दोनों दरों को अलग-अलग रखा। इसका सीधा फायदा उन किसानों को हुआ जिनकी जमीन तीन करोड़ रुपए वाली श्रेणी में आती है।
सूत्रों का कहना है कि अगर यहां भी औसत दर लागू होती, तो कुछ प्रभावशाली लोगों का मुआवजा कम हो जाता। इसी वजह से यह फॉर्मूला नहीं अपनाया गया।
एसडीएम का जवाब
उन्होंने बताया कि सात गांवों में से चार गांवों में गाइडलाइन के आधार पर मुआवजा तय हुआ है। जहां सहमति बनी, वहीं गाइडलाइन का इस्तेमाल हुआ।
अब क्या कर सकते हैं किसान
यानी नाराज किसानों के पास अब कोर्ट जाने का रास्ता बचा है। कई किसान इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और शिकायतें आ सकती हैं।
यह खबरें भी पढ़ें...
सावन में महाकाल के भक्तों का स्वागत करने को तैयार उज्जैन, अलर्ट मोड पर रेलवे
उज्जैन में 200 हेक्टेयर में बनेगा फॉरेस्ट जू, 300 से ज्यादा होंगे वन्यप्राणी
महाकाल मंदिर उज्जैन के पास की जमीन खरीदी में घिरे BJP विधायक चिंतामणि, HC में केस
भोपाल और उज्जैन संभाग के IAS और SAS अधिकारियों को विधायक ने घेरा, ये उठाया सवाल
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