उज्जैन सीवरेज प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट करेगा निगरानी, 31 मार्च की डेडलाइन

उज्जैन के अंडरग्राउंड सीवरेज प्रोजेक्ट को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सिंहस्थ के कारण कंपनी को थोड़ा समय और मिल गया है, लेकिन 31 मार्च 2026 तक काम पूरा करने की आखिरी तारीख तय कर दी गई है। अभी भी करीब 43 हजार घरों के कनेक्शन बाकी हैं।

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Neel Tiwari
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ujjain underground sewage project Simhastha high court deadline

News in short

    • उज्जैन के अंडरग्राउंड सीवरेज प्रोजेक्ट को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

    • इस प्रोजेक्ट को 31 मार्च 2026 तक पूरा करने की डेडलाइन तय की गई है।

    • लगभग 43 हजार हाउस सर्विस कनेक्शन अब भी बाकी हैं।

    • हाईकोर्ट अब इस प्रोजेक्ट की खुद निगरानी करेगा।

    • इस मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को होगी।

    News in detail

    उज्जैन अंडरग्राउंड सीवरेज प्रोजेक्ट को लेकर 6 फरवरी को जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में सुनवाई हुई। यह प्रोजेक्ट 2019 में पूरा होना था, लेकिन सात बार समय-सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद अब तक पूरा नहीं हो पाया। सिंहस्थ के नजदीक आने के चलते हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सख्त निगरानी रखने के संकेत दिए।

    आठवीं बार एक्सटेंशन, अब आखिरी मौका

    राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को अब तक सात बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है। यह आठवीं बार समय-सीमा बढ़ाई जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि कंपनी को हर हाल में 31 मार्च 2026 तक कार्य पूर्ण करना होगा। 

    महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को यह भी बताया कि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन से पहले अब भी करीब 43 हजार घरों के कनेक्शन शेष हैं। इस कार्य के पूरा होने के बाद उन सड़कों के निर्माण जैसी भी कई चुनौतियां सरकार के सामने हैं जिन्हें जल्द पूरा करना है।

    कंपनी का दावा: काम तेजी से शुरू

    टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के वकील नमन नागरथ ने कोर्ट को बताया कि पिछले आदेश के बाद कंपनी ने काम में तेजी ला दी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 5 फरवरी गुरुवार को 3.5 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। 6 फरवरी शुक्रवार को लगभग 8 करोड़ रुपए का भुगतान करने की संभावना है। कंपनी ने कोर्ट को यकीन दिलाया कि वे प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।

    हाई कोर्ट की मौखिक टिप्पणी: हम खुद करेंगे निगरानी

    दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद डिविजनल बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि हाईकोर्ट अब इस प्रोजेक्ट की निगरानी खुद करेगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन से पहले कोई भी लापरवाही नहीं होगी। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को तय की गई है। सुनवाई में प्रोजेक्ट की प्रगति के आधार पर कोर्ट अपना फैसला लेगा।

    जमीनी हकीकत: प्रोजेक्ट की स्थिति अब भी चिंताजनक

    हाईकोर्ट में पेश की गई स्थिति के मुताबिक, प्रशासनिक स्तर पर भी यह सामने आया है कि इस प्रोजेक्ट का बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी अधूरा पड़ा है। सीवरेज की मुख्य लाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन चैंबर कनेक्शन, हाउस सर्विस कनेक्शन और पंपिंग स्टेशन से जुड़ी बाकी कामों में काफी देरी हो रही है। करीब 540 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन और 80 हजार से ज्यादा घरों को जोड़ने वाला यह प्रोजेक्ट अब तक शहर का सबसे पिछड़ा हुआ प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

    शहरवासियों पर असर, सिंहस्थ से पहले बड़ी चुनौती

    सीवरेज के काम के चलते सड़कों की बार-बार खुदाई, ट्रैफिक की समस्या और दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। खुले नाले और नालियों से छुटकारा पाने और शिप्रा नदी को साफ करने का जो लक्ष्य था, वह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अब हाईकोर्ट की निगरानी में आने के बाद यह प्रोजेक्ट प्रशासन और कंपनी दोनों के लिए एक निर्णायक परीक्षा बन गया है।

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