उज्जैन यूनिवर्सिटी में अनोखा मामला: छात्र को 1600 में से दे डाले 1604 नंबर
Manya Jain | Aug 08, 2026, 18:00 IST
ujjain vikram university mba result error
उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय में MBA छात्र को 1600 में से 1604 अंक मिले, रिजल्ट 100.25% बना। एमएससी छात्र को प्रैक्टिकल अंक बिना जोड़े पास कर दिया गया। कुलसचिव ने तकनीकी गड़बड़ी बताई।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश के उज्जैन की विक्रमादित्य यूनिवर्सिटीएक बार फिर विवादों में है।
- विश्वविद्यालय ने एमबीए चौथे सेमेस्टर के एक छात्र को 1600 में से 1604 अंक दे दिए।
- इससे उसका कुल परिणाम 100.25 प्रतिशत बन गया।
- वहीं एमएससी के एक छात्र को प्रैक्टिकल के अंक बिना जोड़े ही पास घोषित कर दिया गया।
- विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए सफाई दी है।
कैसे बना 100.25 प्रतिशत का रिजल्ट
इन चारों अंकों का वास्तविक कुल योग 1604 होता है। लेकिन मार्कशीट में अधिकतम अंक सिर्फ 1600 दिखाए गए। इसी वजह से छात्र का परिणाम 100.25 प्रतिशत बनकर सामने आया। इस गड़बड़ी के सामने आते ही विश्वविद्यालय की परिणाम प्रणाली पर सवाल उठने लगे।
प्रैक्टिकल अंक बिना जोड़े ही पास
यह गड़बड़ी भी विश्वविद्यालय की परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दोनों मामलों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
विश्वविद्यालय का गड़बड़ियों से पुराना नाता
इसके अलावा कॉपी जांच में धांधली और प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी जैसे मामले भी पहले सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह ताजा मामला विश्वविद्यालय की छवि के लिए एक और झटका है।
कुलसचिव ने दी सफाई
उन्होंने बताया कि छात्र के अंतिम सेमेस्टर के अधिकतम अंक 'ग्रैंड टोटल' में शामिल नहीं हो पाए थे। इसी वजह से मार्कशीट में अधिकतम अंक 1600 दिखाई दे रहे थे, जबकि वास्तविक अधिकतम अंक 2100 थे। उनके अनुसार परिणाम तैयार करने वाली एजेंसी की तकनीकी त्रुटि को अब सुधार दिया गया है। साथ ही संबंधित एजेंसी को चेतावनी भी जारी की गई है।
एमएससी मामले में भी जांच का आश्वासन
हालांकि छात्रों का कहना है कि ऐसी गड़बड़ियां बार-बार सामने आने से उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है। मार्कशीट में गलत अंक होने से आगे की पढ़ाई या नौकरी में दिक्कत आ सकती है।
एक्सपर्ट कोट्स
FAQ
- विक्रम विश्वविद्यालय के रिजल्ट में क्या गड़बड़ी हुई?
एमबीए के एक छात्र को 1600 में से 1604 अंक दे दिए गए, जिससे रिजल्ट 100.25 प्रतिशत बन गया। वहीं एमएससी के एक छात्र को प्रैक्टिकल अंक बिना जोड़े ही पास कर दिया गया। - विश्वविद्यालय ने इस गड़बड़ी पर क्या सफाई दी?
कुलसचिव अनिल शर्मा के मुताबिक यह ग्रैंड टोटल में अधिकतम अंक शामिल न होने की तकनीकी त्रुटि थी। उन्होंने बताया कि गलती सुधार दी गई है। - क्या विश्वविद्यालय में पहले भी ऐसी गड़बड़ियां हुई हैं?
हां, इससे पहले भी फर्जी सॉल्वर, शून्य अंक और कॉपी जांच में धांधली जैसे मामले सामने आ चुके हैं। यह विश्वविद्यालय पहले भी कई बार विवादों में रहा है।
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