जबलपुर की सियासत से गायब हुए ''वोटकटवा'', किसी भी विधानसभा क्षेत्र में नहीं दिखा असर, एकतरफा जीत से खिली बीजेपी की बांछे
Chandresh Sharma | Dec 04, 2023, 24:00 IST
जबलपुर की सियासत से गायब हुए ''वोटकटवा'', किसी भी विधानसभा क्षेत्र में नहीं दिखा असर, एकतरफा जीत से खिली बीजेपी की बांछे
चुनाव के समय सबसे ज्यादा नजरें अगर किसी पर थी तो वह दोनों ही दलों के बागियों और वोटकटवा नेताओं पर रही लेकिन कोई असर नतीजों पर नजर नहीं आया। जबलपुर के सभी 8 विधानसभा सीटों पर किसी भी वोटकटवा का असर नहीं दिखा
वेंकटेश कोरी, JABALPUR. कहीं 40541 तो कहीं 39957 तो कहीं 30255 तो कहीं 42772, ये आंकड़े वे हैं जिनके भारी अंतर से भाजपा के प्रत्याशियों ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। जबलपुर की 8 में से 7 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा परचम लहराया की बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषक भी हैरत में पड़ गए। इस बार के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही जोर लगा रहे थे लेकिन नतीजों ने सभी को चौंका कर रख दिया। चुनाव के समय सबसे ज्यादा नजरें अगर किसी पर थी तो वह दोनों ही दलों के बागियों और वोटकटवा नेताओं पर रही लेकिन किसी का कोई असर नतीजों पर नजर नहीं आया। जबलपुर के सभी 8 विधानसभा सीटों पर किसी भी वोटकटवा का असर नहीं दिखा जिसके चलते भाजपा के 7 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की तो कांग्रेस के एकमात्र प्रत्याशी ने भी भारी अंतर से पूर्व की सीट अपने कब्जे में कर ली। प्रत्याशी चयन से भड़के आक्रोश के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि दोनों ही दलों के वोटकटवा पार्टियों को नुकसान पहुंचाएंगे और प्रत्याशियों की जीत हार में अहम भूमिका निभाएंगे लेकिन नतीजों के ऐलान के बाद वोट लकटवा फैक्टर पूरी तरह से गायब हो गया।
न बागियों की बगावत काम आई और न ही AIMIM का फैक्टर नजर आया
जबलपुर जिले की आठ विधानसभा सीटों में अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि बागी और पूर्व विधानसभा क्षेत्र से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के प्रत्याशी वोटकटवा की भूमिका में दिखेंगे लेकिन सभी आठों विधानसभा सीटों पर इनकी कोई भूमिका नजर नहीं आई। उत्तर और पश्चिम विधानसभा सीटों में बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा हावी रहा तो पूर्व विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम बाहुल्य वोटो को साधने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने गजेंद्र सोनकर 'गज्जू' को मैदान में उतारा लेकिन न ही बागियों की बगावत काम आई और न ही एआईएमआईएम का कहीं फैक्टर इस बार के विधानसभा चुनाव में नजर आया, जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी ने 8 विधानसभा सीटों में से 7 पर एक तरफा जीत दर्ज की।
ये हैं जीत के आंकड़े
जबलपुर की आठ विधानसभा सीटों में से ग्रामीण की चारों विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने एक तरफा जीत दर्ज की इसी तरह शहर की चार सीटों में से तीन पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने भारी मतों से अपने प्रत्याशियों को पटखनी दे दी। जबलपुर ग्रामीण के सिहोरा विधानसभा सीट से संतोष बरकड़े ने तो जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की, उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी जिले की एकमात्र महिला प्रत्याशी कांग्रेस की एकता ठाकुर को 42772 के भारी मतों से हराकर जिले की सबसे बड़ी जीत हासिल की।
न बागियों की बगावत काम आई और न ही AIMIM का फैक्टर नजर आया
जबलपुर जिले की आठ विधानसभा सीटों में अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि बागी और पूर्व विधानसभा क्षेत्र से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के प्रत्याशी वोटकटवा की भूमिका में दिखेंगे लेकिन सभी आठों विधानसभा सीटों पर इनकी कोई भूमिका नजर नहीं आई। उत्तर और पश्चिम विधानसभा सीटों में बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा हावी रहा तो पूर्व विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम बाहुल्य वोटो को साधने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने गजेंद्र सोनकर 'गज्जू' को मैदान में उतारा लेकिन न ही बागियों की बगावत काम आई और न ही एआईएमआईएम का कहीं फैक्टर इस बार के विधानसभा चुनाव में नजर आया, जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी ने 8 विधानसभा सीटों में से 7 पर एक तरफा जीत दर्ज की।
ये हैं जीत के आंकड़े
जबलपुर की आठ विधानसभा सीटों में से ग्रामीण की चारों विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने एक तरफा जीत दर्ज की इसी तरह शहर की चार सीटों में से तीन पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने भारी मतों से अपने प्रत्याशियों को पटखनी दे दी। जबलपुर ग्रामीण के सिहोरा विधानसभा सीट से संतोष बरकड़े ने तो जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की, उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी जिले की एकमात्र महिला प्रत्याशी कांग्रेस की एकता ठाकुर को 42772 के भारी मतों से हराकर जिले की सबसे बड़ी जीत हासिल की।
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