न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में जानतें हैं आप, तो जीत सकते हैं ट्रेक्टर, बुलेट या ई-बाइक

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक शानदार मौका है। अगर आप भी ट्रैक्टर, बुलेट, ई-स्कूटी और साढ़े छह करोड़ रुपए के ईनाम जीतना चाहते हैं तो MSP से जुड़ी यह खबर जरूर पढ़ें।

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Manya Jain
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भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की पूरी अर्थव्यवस्था किसानों पर टिकी है। लेकिन मौसम और बाजार के कारण खेती में जोखिम रहता है। अक्सर किसानों को फसलों का सही दाम नहीं मिलता। इसी नुकसान से बचाने के लिए सरकार मदद करती है। सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देती है। यह किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। आइए समझते हैं कि आखिर एमएसपी क्या होती है।

अगर आप भी किसान MSP के बारे में जानते हैं तो आपको ये खबर आपको शानदार ईनाम पाने का मौका दिला सकती है, इसलिए इस खबर को आखिर तक ध्यान से पढ़ें।

मध्यप्रदेश सरकार के वीर भारत न्यास के तहत किसानों के लिए देश की सबसे बड़ी क्विज़ शुरू की गई है। आपका पसंदीदा मीडिया हाउस "thesootr" भी इस महापर्व का हिस्सा है। "thesootr" का मकसद है कि इस बड़ी स्पर्धा में MP का हर किसान घर बैठे अपनी भागीदारी करे और करोड़ों रुपए के इनाम जीतने का मौका पाएं।

इनाम में क्या- क्या मिलेगा...

  • 55 ट्रेक्टर
  • 55 बुलेट मोटर साइकल
  • 55 ई-स्कूटी

और इसके अलावा हर जिले के लिए 11-11 हजार के पुरस्कार भी अलग से मिलेंगे। 

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https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/veer-bharat-nyas-kisan-quiz-11037793

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न्यूनतम समर्थन मूल्य किसके लिए होता है?

न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP किसानों के लिए एक सुरक्षा गारंटी है। सरकार फसल की एक तय कीमत पहले ही घोषित कर देती है। बाजार भाव कम होने पर भी सरकार इसी रेट पर खरीदेगी।

इसकी शुरुआत 1960 के दशक में हरित क्रांति के दौरान हुई थी। इसका मकसद किसानों को अधिक पैदावार के लिए प्रेरित करना था। साल 1965 में कृषि मूल्य आयोग बनाया गया था। बाद में 1985 में इसका नाम CACP कर दिया गया। यही संस्था सरकार को फसल की सही कीमत तय करने की सलाह देती है।

MSP लागू करने में FCI और नेफेड जैसी संस्थाएं बहुत जरूरी हैं। जब फसल के दाम बाजार में गिरते हैं, तब ये काम आती हैं। ये एजेंसियां तय कीमत पर किसानों से फसल खरीदती हैं। इससे किसानों को घाटे से बचने में मदद मिलती है। यह व्यवस्था उन्हें आर्थिक संकट से सुरक्षित रखती है। यह किसानों की कमाई पक्की करने का अच्छा तरीका है।

एमएसपी का निर्धारण कैसे होता है? 

सरकार हर साल बुवाई के मौसम से पहले 22 अनिवार्य फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है। सीएसीपी (MSP Paddy) एमएसपी तय करते समय खेती की लागत को तीन श्रेणियों में विभाजित करता है।

1. लागत के विभिन्न मानक (Cost Metrics)

  • A2 लागत: इसमें बीज, खाद और कीटनाशक का नकद खर्च आता है। इसमें डीजल और जमीन के किराए का पैसा भी जुड़ता है।

  • A2+FL लागत: इसमें नगद खर्च के साथ परिवार की मेहनत भी शामिल है। घर के सदस्यों के श्रम का मूल्य इसमें जोड़ा जाता है।

  • C2 लागत: यह खेती की पूरी और सबसे बड़ी लागत होती है। इसमें अपनी जमीन का किराया और औजारों का ब्याज भी जुड़ता है।

एमएसपी के दायरे में आने वाली फसलें 

वर्तमान में, भारत सरकार कुल 22 फसलों के लिए एमएसपी और गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) की घोषणा करती है:

श्रेणीफसलें
अनाज (Cereals)धान, गेहूं, मक्का, जौ, बाजरा, ज्वार और रागी।
दालें (Pulses)चना, अरहर, मूंग, उड़द और मसूर।
तिलहन (Oilseeds)मूंगफली, सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम और नाइजर।
व्यावसायिक फसलेंकपास, कच्चा जूट, खोपरा और गन्ना (FRP)।

किसानों के लिए एमएसपी का महत्व

  • बाजार के खतरे से बचाव: फसल ज्यादा होने पर दाम गिरने का डर रहता है। ऐसे में MSP किसानों (MSP wheat purchase) को बिचौलियों से बचाती है।

  • गरीबों को सस्ता राशन: सरकार किसानों से अनाज खरीदकर स्टॉक जमा करती है। यही अनाज राशन की दुकानों के जरिए गरीबों को मिलता है।

  • कमाई का पक्का भरोसा: किसान बुवाई से पहले ही अपनी कमाई जान लेते हैं। इससे वे खेती में खुलकर पैसा लगाने के लिए उत्साहित रहते हैं।

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