MP के युवाओं का ये दुख काहे खत्म नहीं होता? युवाओं में चिंता, अब कैसे होंगी भर्तियां ?
Sandeep Kumar | Mar 16, 2024, 17:01 IST
आदर्श आचार संहिता लागू
लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का भारत निर्वाचन आयोग ने एलान कर दिया है। तारीखों के एलान के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है । अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आचार संहिता लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के हजारों युवाओं की नौकरी का क्या होगा।
संजय गुप्ता@ INDORE. लोकसभा चुनाव 2024 ( Lok Sabha Election 2024 ) का बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर तारीखों का ऐलान कर दिया है, लेकिन इस चुनाव के पहले प्रदेश के हजारों युवाओं की नौकरी की जो उम्मीदें थीं वो धराशाई हो गईं। यानी सरकार के वादों की मछली छपाक से पानी में चली गई। जबकि बीते पांच मार्च को खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीना ठोंककर नौ हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देने के साथ वादा किया था, उन्होंने सात दिन में यानी 12 मार्च तक 15 हजार और युवाओं को नियुक्ति पत्र देने को कहा था लेकिन हाल ये हैं कि फिलहाल सिर्फ 1100 नियुक्ति पत्र ही बांटे गए हैं। यानी साफ है कि अब चुनाव तक युवाओं की नौकरी की उम्मीदें पूरी नहीं हो पाएंगी।
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने नौकरी देने का वादा किया था। हाल ही में पांच मार्च को उन्होंने नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन ये वादा अब तक शत प्रतिशत पूरा नहीं हो सका और अब उम्मीद भी नहीं है कि आगे भी पूरा हो पाएगा क्योंकि लोकसभा चुनाव के लिए आज शनिवार यानी 16 मार्च से आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद नौकरी पर रोक लग गई है। आइए अब आपको बताते हैं कि सरकार ने कब-कब क्या-क्या वादे किए थे।
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26 जनवरी : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में गणतंत्र दिवस के मौके पर कहा था कि सरकार जल्द ही 28 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देगी। इसके बाद कर्मचारी चयन मंडल यानी ESB के रुके हुए रिजल्ट जारी होने लगे।
05 मार्च : मुख्यमंत्री ने भोपाल में नौ हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे, जिनमें पटवारी भी शामिल थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने अगले सात दिन में 15 हजार और नियुक्ति पत्र देने का वादा किया।
24 जनवरी : सरकार ने MPPSC 2019 और 2020 के 686 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्त पत्र बांटे और पांच साल बाद मध्यप्रदेश को नए डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और बाकी अधिकारी मिल सके।
11 मार्च : भोपाल में मुख्यमंत्री ने 1100 उम्मीदवारों को नियुक्त पत्र दिए।
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विज्ञापन नियमों के फेर में अटकी
सब इंस्पेक्टर की भर्ती विज्ञापन नियमों के फेर में ही अटककर रह गई। ये भर्ती फरवरी में निकलने वाली थी। पुलिस मुख्यालय, गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के बीच नियमों को लेकर तालमेल नहीं बना और भर्ती की फाइल इधर-उधर घूमती रही। यानी सरकार परीक्षा के नियम ही नहीं बना पाई। जिस वजह से 500 पदों पर होने वाली SI भर्ती परीक्षा का विज्ञापन ही नहीं निकल सका। इससे पहले SI भर्ती परीक्षा 2017 में हुई थी। शिक्षकों की बात करें तो प्रदेश में इनके लगभग 35 हजार पद खाली हैं , और फिलहाज महज 8720 पदों पर ही नियुक्ति कराई जा रही है, और हैरानी की बात ये है कि खुद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह कबूल कर रहे हैं कि ओबीसी आरक्षण के चलते 18 हजार पद रुके हुए हैं। हालत ये है कि कई विषयों में तो अनारक्षित और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए पद ही नहीं है।पटवारियों का हाल देखें तो इनके भी दो हजार पद खाली रह गए... प्रदेश के करीब 10 लाख युवाओं ने पटवारी भर्ती परीक्षा दी थी। लेकिन दो बार काउंसलिंग के बाद भी दो हजार पद खाली रह गए, और अब सरकार ने साफ कह दिया है कि तीसरी काउंसलिंग नहीं कराई जाएगी।
मध्यप्रदेश में भर्ती परीक्षाओं का रोस्टर चुनावी सीजन में ही जारी होता है। इससे पहले अधिकांश परीक्षाओं का शेड्यूल 2017-18 में निकला था यानी बीते विधानसभा चुनाव के दौरान। तब एसआई असिस्टेंट प्रोफेसर और पटवारी भर्ती जैसी परीक्षाएं कराई गई थीं, और 2024 आते-आते कुछ परीक्षाएं स्थगित हो गईं तो कई पदों पर भर्तियां ही नहीं हो पाईं। यानी अब बाकी नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों को 2027-28 तक इंतजार करना होगा।
अब कर्मचारी चयन मंडल का हालत देखें तो मंडल को ही पता नहीं है कि अब भविष्य में कोई भर्ती परीक्षा होनी या नहीं? ESB ने अब तक वार्षिक भर्ती परीक्षा कैलेंडर ही जारी नहीं किया है। इस वजह से भी प्रदेश के युवा लगातार निराश होते जा रहे हैं, और इसी निराशा के चलते उन्हें सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खेलना पड़ रहा है। हजारों उम्मीदवारों के सामने ये भी समस्या है कि हर साल उनकी उम्र और बेरोजगारी दोनों ही बढ़ती जा रही है और अब उनका दुख कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लिहाजा वो यही कहने को मजबूर हैं कि ये दुख काहे खतम नहीं होता।
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सीएम मोहन ने किया था वादा
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने नौकरी देने का वादा किया था। हाल ही में पांच मार्च को उन्होंने नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन ये वादा अब तक शत प्रतिशत पूरा नहीं हो सका और अब उम्मीद भी नहीं है कि आगे भी पूरा हो पाएगा क्योंकि लोकसभा चुनाव के लिए आज शनिवार यानी 16 मार्च से आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद नौकरी पर रोक लग गई है। आइए अब आपको बताते हैं कि सरकार ने कब-कब क्या-क्या वादे किए थे।
ये खबर भी पढ़िए...लोकसभा चुनाव 2024 में कौन-कौन से मुद्दे रहेंगे हावी, आइए जानते हैं चुनावी समर के इन हथियारों को
सरकार ने कब-कब क्या-क्या वादे किए और कब-कब नियुक्ति पत्र बांटे ?
26 जनवरी : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में गणतंत्र दिवस के मौके पर कहा था कि सरकार जल्द ही 28 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र देगी। इसके बाद कर्मचारी चयन मंडल यानी ESB के रुके हुए रिजल्ट जारी होने लगे।
05 मार्च : मुख्यमंत्री ने भोपाल में नौ हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे, जिनमें पटवारी भी शामिल थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने अगले सात दिन में 15 हजार और नियुक्ति पत्र देने का वादा किया।
24 जनवरी : सरकार ने MPPSC 2019 और 2020 के 686 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्त पत्र बांटे और पांच साल बाद मध्यप्रदेश को नए डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और बाकी अधिकारी मिल सके।
11 मार्च : भोपाल में मुख्यमंत्री ने 1100 उम्मीदवारों को नियुक्त पत्र दिए।
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विज्ञापन नियमों के फेर में अटकी सब इंस्पेक्टर की भर्ती
सब इंस्पेक्टर की भर्ती विज्ञापन नियमों के फेर में ही अटककर रह गई। ये भर्ती फरवरी में निकलने वाली थी। पुलिस मुख्यालय, गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के बीच नियमों को लेकर तालमेल नहीं बना और भर्ती की फाइल इधर-उधर घूमती रही। यानी सरकार परीक्षा के नियम ही नहीं बना पाई। जिस वजह से 500 पदों पर होने वाली SI भर्ती परीक्षा का विज्ञापन ही नहीं निकल सका। इससे पहले SI भर्ती परीक्षा 2017 में हुई थी। शिक्षकों की बात करें तो प्रदेश में इनके लगभग 35 हजार पद खाली हैं , और फिलहाज महज 8720 पदों पर ही नियुक्ति कराई जा रही है, और हैरानी की बात ये है कि खुद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह कबूल कर रहे हैं कि ओबीसी आरक्षण के चलते 18 हजार पद रुके हुए हैं। हालत ये है कि कई विषयों में तो अनारक्षित और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए पद ही नहीं है।पटवारियों का हाल देखें तो इनके भी दो हजार पद खाली रह गए... प्रदेश के करीब 10 लाख युवाओं ने पटवारी भर्ती परीक्षा दी थी। लेकिन दो बार काउंसलिंग के बाद भी दो हजार पद खाली रह गए, और अब सरकार ने साफ कह दिया है कि तीसरी काउंसलिंग नहीं कराई जाएगी।
पटवारियों के बाकी बचे 2000 पदों का क्या होगा ?
मध्यप्रदेश में भर्ती परीक्षाओं का रोस्टर चुनावी सीजन में ही जारी होता है। इससे पहले अधिकांश परीक्षाओं का शेड्यूल 2017-18 में निकला था यानी बीते विधानसभा चुनाव के दौरान। तब एसआई असिस्टेंट प्रोफेसर और पटवारी भर्ती जैसी परीक्षाएं कराई गई थीं, और 2024 आते-आते कुछ परीक्षाएं स्थगित हो गईं तो कई पदों पर भर्तियां ही नहीं हो पाईं। यानी अब बाकी नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों को 2027-28 तक इंतजार करना होगा।
ESB ने अब तक जारी नहीं किया वार्षिक भर्ती परीक्षा कैलेंडर
अब कर्मचारी चयन मंडल का हालत देखें तो मंडल को ही पता नहीं है कि अब भविष्य में कोई भर्ती परीक्षा होनी या नहीं? ESB ने अब तक वार्षिक भर्ती परीक्षा कैलेंडर ही जारी नहीं किया है। इस वजह से भी प्रदेश के युवा लगातार निराश होते जा रहे हैं, और इसी निराशा के चलते उन्हें सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खेलना पड़ रहा है। हजारों उम्मीदवारों के सामने ये भी समस्या है कि हर साल उनकी उम्र और बेरोजगारी दोनों ही बढ़ती जा रही है और अब उनका दुख कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लिहाजा वो यही कहने को मजबूर हैं कि ये दुख काहे खतम नहीं होता।
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