जयपुर में 10 हजार कर्मचारियों के बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर, महापौर बोले- कमी वाले इलाकों में करेंगे व्यवस्था

Jageshwar Prasad | Oct 24, 2026, 10:51 IST
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जयपुर में 10 हजार कर्मचारी, फिर भी नहीं उठ रहा कचरा, खुले डिपो बढ़े
जयपुर में 10 हजार कर्मचारी, फिर भी नहीं उठ रहा कचरा, खुले डिपो बढ़े

दीपावली पर जयपुर में कचरा बढ़ा तो नगर निगम ने सफाई के लिए 3 हजार अतिरिक्त कर्मचारी लगा दिए। इन पर एक महीने में करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के पास 7 हजार स्थायी सफाईकर्मी पहले से हैं। इसके बावजूद न घर से रोज कचरा उठ रहा है और न कचरा डिपो से।

10 हजार कर्मचारी होने के बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। खुले कचरा डिपो 400 से बढ़कर 600 हो गए। इनमें से भी 78 से कचरा नहीं उठ पाता।

दरअसल, दीपावली पर शहर में रोजाना निकलने वाला कचरा 2200 टन से बढ़कर 3000 टन पहुंच गया है। यानी रोज 800 टन अतिरिक्त कचरा निकल रहा है। ऐसे में घरों से रोज कचरा नहीं उठ रहा है। कुछ जगह एक दिन तो कुछ जगह दो दिन छोड़कर हूपर आ रहे हैं। इससे घरों में कचरा जमा हो रहा है और लोग खुले में कचरा डालने को मजबूर हैं।

निगम ने सफाईकर्मी तो बढ़ा दिए, लेकिन घरों से कचरा उठाने और उसे डिपो से आगे पहुंचाने की व्यवस्था नहीं बढ़ाई। इसी तालमेल की कमी का खामियाजा शहर भुगत रहा है।

3 हजार अतिरिक्त कर्मचारी लगाए

जयपुर नगर निगम (Municipal Corporation Jaipur) ने सफाई के लिए 3 हजार अतिरिक्त कर्मचारी लगा दिए हैं। इन पर एक महीने में करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के पास 7 हजार स्थायी सफाईकर्मी पहले से हैं। इसके बावजूद न घर से रोज कचरा उठ रहा है और न कचरा डिपो से।

यानी 10 हजार कर्मचारी होने के बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। निगम ने सफाईकर्मी तो बढ़ा दिए, लेकिन घरों से कचरा उठाने और उसे डिपो से आगे पहुंचाने की व्यवस्था नहीं बढ़ाई। इसी तालमेल की कमी का खामियाजा शहर भुगत रहा है।


हूपरों के बंटवारे में असमानता

नगर निगम के रिकॉर्ड में 13 जोन के 150 वार्डों में सुबह घर-घर कचरा उठाने के लिए 797 हूपर दर्ज हैं। विद्याधर नगर, सांगानेर, झोटवाड़ा, वैशाली नगर, जगतपुरा, झालाना और आदर्श नगर जोन के 67 वार्डों में 409 हूपर हैं। यानी औसतन 6 हूपर प्रति वार्ड।

हवामहल-आमेर, किशनपोल, मालवीय नगर, सिविल लाइंस, मुरलीपुरा और मानसरोवर जोन के 83 वार्डों में सिर्फ 388 हूपर हैं। यानी औसतन 4.7 हूपर प्रति वार्ड। हालांकि, यह तुलना वाहनों की संख्या के आधार पर है।

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जयपुर में आवारा पशुओं के हमले के कारण एक व्यक्ति की जान जाने के मामले में अदालत ने मुआवजे का आदेश जारी किया है। यह मामला चार साल पुराना है, जब गिर्राज प्रसाद को एक सांड ने टक्कर मारी थी। मृतक की पत्नी ने इस संदर्भ में नगर निगम और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दायर की थी।

जोनवार बंटवारे में लापरवाही

जोनवार रिकॉर्ड में हवामहल-आमेर में सर्वाधिक 81 हूपर दर्ज हैं। मानसरोवर में 73, वैशाली नगर और सिविल लाइंस में 71-71 हूपर हैं। किशनपोल में 42 और जगतपुरा में 43 हूपर ही हैं।

झोटवाड़ा के वार्ड 26 में 20 हूपर दर्ज हैं। लेकिन निगम के पास यह स्पष्ट जवाब नहीं है कि किस वार्ड में कितने घरों से कचरा उठाना है। रोज कितने फेरे जरूरी हैं और कितने वाहन वास्तव में सड़क पर हैं, इसका भी स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है।

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जयपुर नगर निगम ने 100 दिन में 100 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लक्ष्य रखा है, लेकिन अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती में देरी और शहर में कचरे के ढेर मिलने से सवाल उठ रहे हैं। महापौर सुनील कोठारी ने The Sootr से कहा कि वे खुद निगरानी कर रहे हैं और जयपुर को सफाई में नंबर वन बनाएंगे।

खुले डिपो 50% बढ़े

शहर में खुले कचरा डिपो की संख्या 400 से बढ़कर 600 हो गई है। यानी 200 नए डिपो बन गए। इनमें 78 डिपो से कचरा नहीं उठ रहा। यह कुल डिपो का 13 प्रतिशत है।

निगम ने छह जोन में घर-घर कचरा संग्रहण का जिम्मा ठेका कंपनियों को दे रखा है। इसके बावजूद कई इलाकों में हूपर तय समय पर नहीं पहुंच रहे। कहीं रोजाना के फेरे पूरे नहीं हो रहे तो कहीं एक चक्कर लगाकर ही काम खत्म किया जा रहा है।

सवाल है कि ठेका कंपनियों के वाहनों और उनके फेरों की निगरानी कौन कर रहा है? यदि नियमित उठाव हो रहा है तो खुले डिपो क्यों बढ़ रहे हैं?

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दिवाली से पहले जयपुर में साफ-सफाई का काम तेजी से चल रहा लेकिन नगर निगम ने कचरा उठाकर ले जाने की व्यवस्था में जो बदलाव किया है, उससे परेशानी बढ़ गई। बिना लिखित आदेश के लागू इस नई व्यवस्था में निगम की गाड़ियों को पहले से ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही। इससे कचरा उठाने में ज्यादा समय लग रहा है और सफाई का काम भी प्रभावित हो रहा।

महापौर सुनील कोठारी ने दिए निर्देश

महापौर सुनील कोठारी (Sunil Kothari) ने कहा कि शहर में संचालित हूपरों की संख्या को लेकर अधिकारियों से चर्चा की है। जिन क्षेत्रों में हूपरों की कमी है, वहां अतिरिक्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
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