डिप्टी CM के पूर्व OSD दीपम रायपुरा की चार्जशीट पर सवाल! एक करोड़ की कथित रिश्वत का जिक्र नहीं, लोकायुक्त ने मांगी रिपोर्ट
Kaushiki | Oct 24, 2026, 11:23 IST
शराब ठेका आवंटन में फर्जीवाड़े का आरोप, 2.75 करोड़ की FDR पर सवाल
मध्य प्रदेश में शराब दुकानों के आवंटन से जुड़ा मामला फिर चर्चा में है। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी दीपम रायपुरा के खिलाफ चार्जशीट जारी हुई है। आबकारी विभाग ने इसमें कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। लेकिन एक करोड़ रुपए की कथित रिश्वत का जिक्र नहीं किया है।
मामला 2.75 करोड़ रुपए की एफडीआर से भी जुड़ा है। आरोप है कि पांच रुपए की फोटोकॉपी के आधार पर ठेके मंजूर हुए। अब लोकायुक्त ने मामले से जुड़े डाक्यूमेंट्स और जांच रिपोर्ट मांगी है। रायपुरा को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
आबकारी विभाग ने पूर्व प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायपुरा को चार्जशीट जारी की है। रायपुरा पहले डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी भी रह चुके हैं। उन पर शराब दुकान आवंटन में नियमों की अनदेखी करने का आरोप है।
मामला भोपाल के वित्त वर्ष 2024-25 के शराब ठेकों से जुड़ा है। विभाग ने आरोपों की जांच के लिए चार गवाह तय किए हैं। रायपुरा को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब देना होगा। वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर भी अपना पक्ष रख सकते हैं।
इस मामले में रायपुरा पर एक करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप भी है। लेकिन विभागीय चार्जशीट में इस आरोप को शामिल नहीं किया गया है। चार्जशीट में सुरक्षा राशि और लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख है। शराब ठेकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि एक करोड़ रुपए की कथित रिश्वत का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है।
इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW के बाद लोकायुक्त भी सक्रिय हुआ है। लोकायुक्त डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने आबकारी आयुक्त से डॉक्यूमेंट मांगे हैं। उन्होंने दो सदस्यीय विभागीय जांच टीम (Departmental Inquiry Team) की रिपोर्ट भी तलब की है।
इस रिपोर्ट में शराब दुकानों के ठेके मंजूर करने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी है। सूत्रों के मुताबिक आबकारी विभाग ने संबंधित दस्तावेज लोकायुक्त कार्यालय को भेज दिए हैं। MP Excise Department Case में अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
मामला भोपाल के एकल समूह टीपीएलएफ-14 से जुड़ा है। यह समूह पांडुड़ी चौराहा क्षेत्र का बताया गया है। आरोप है कि ठेके की सुरक्षा राशि मंजूर करने में नियमों का पालन नहीं हुआ। इसके अलावा लाइसेंस जारी करने और ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में भी गड़बड़ी हुई। ये अनियमितताएं वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान होने का आरोप है। उस समय दीपम रायपुरा प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर कार्यरत थे।
शराब दुकानों के ठेके के लिए सुरक्षा राशि जमा करना जरूरी होता है। इसके लिए बैंक की एफडीआर भी दी जा सकती है। एफडीआर यानी बैंक में जमा रकम का प्रमाण होता है। इस मामले में लाइसेंसी जसवंत ने 2.75 करोड़ रुपए की ई-एफडीआर दी थी। आरोप है कि अधिकारियों ने बिना सत्यापन इसे स्वीकार कर लिया।
यह एफडीआर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की बताई गई थी। लेकिन बैंक ने 12 अक्टूबर के पत्र में इसे जारी करने से इनकार किया था। इसके अलावा आरोप है कि बैंक निर्धारित श्रेणी में भी शामिल नहीं था। इन बातों के बावजूद एफडीआर स्वीकार करने पर सवाल उठे हैं।
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि 2.75 करोड़ रुपए की असली एफडीआर के बजाय रंगीन फोटोकॉपी लगाई गई थी। इस फोटोकॉपी की कीमत महज पांच रुपए बताई गई है। इसी दस्तावेज के आधार पर दो शराब दुकानों के ठेके हासिल करने का आरोप है। इस प्रक्रिया में दीपम रायपुरा की कथित मदद की बात भी सामने आई है। हालांकि संबंधित आरोपों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
शराब ठेके की बाकी सुरक्षा राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा होनी थी। लेकिन यह रकम 12 मई को जमा कराई गई। इसके अलावा 20 अप्रैल को जमा हुई 50 प्रतिशत नकद राशि पर भी आपत्ति है। आरोप है कि इस रकम को न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी में समायोजित कर दिया गया। यानी ठेके की सुरक्षा राशि और ड्यूटी से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठे हैं।
शराब ठेका मां माइन्स नाम की फर्म को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया भी विवाद में है। आरोप है कि ट्रांसफर से पहले फर्म की पार्टनरशिप डीड नहीं ली गई। पार्टनरशिप डीड में किसी फर्म के भागीदारों की जानकारी रहती है। 27 जुलाई 2024 के दस्तावेज में विजय सिंह को भागीदार बताया गया था।
जबकि फर्म के ट्रांसफर का आदेश 27 दिसंबर को जारी हुआ। इसके अलावा प्रताप धाकड़ और आशीष धाकड़ के नाम भी चालान में दर्ज किए गए। आरोप है कि उस समय ये लोग संबंधित फर्म के भागीदार नहीं थे। इसके बावजूद दस्तावेजों में इन्हें भागीदार या लाइसेंसी बताया गया।
ठेके की सुरक्षा राशि के लिए 76 लाख रुपए की ई-बैंक गारंटी भी स्वीकार की गई थी। यह गारंटी विजय सिंह के नाम पर थी। आरोप है कि 15 जुलाई 2024 को इसे मंजूर किया गया।
लेकिन उस समय विजय सिंह संबंधित फर्म के भागीदार नहीं थे। वे उस समय शराब दुकान के लाइसेंसी भी नहीं थे। नियमों के मुताबिक फर्म से जुड़े दस्तावेज जरूरी थे। इसके बावजूद व्यक्तिगत बैंक गारंटी स्वीकार करने का आरोप है।
Liquor Shop Allotment Case में चेक स्वीकार करने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति है। आरोप है कि अधिकारियों ने फर्म के पोस्ट-डेटेड चेक नहीं लिए। इसके बजाय एक गैर-भागीदार के व्यक्तिगत बैंक खाते के चेक स्वीकार किए गए। पोस्ट-डेटेड चेक पर भविष्य की तारीख लिखी होती है। विभागीय आरोप पत्र में इस प्रक्रिया को भी अनियमितता बताया गया है।
फर्जी एफडीआर के मामले में ठेकेदार जसवंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। यह मामला भोपाल के कोहेफिजा थाने में दर्ज किया गया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए दो शराब दुकानों के ठेके लिए गए।
हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में पूर्व डिप्टी कमिश्नर विनोद रघुवंशी का नाम भी सामने आया है। पुलिस जांच में दूसरे अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा सकती है। यदि उनके खिलाफ सबूत मिलते हैं तो उन्हें आरोपी बनाया जा सकता है।
शराब ठेका आवंटन में कथित गड़बड़ी से सरकार को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई गई है। मामले में करोड़ों रुपए के नुकसान का दावा किया गया है। हालांकि नुकसान की कुल रकम अभी स्पष्ट नहीं है। जांच में बैंक दस्तावेज और लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। इनकी जांच से सरकारी राजस्व को हुए संभावित नुकसान का पता चल सकेगा।
MP Lokayukta Investigation में अब विभागीय जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल होगी। दूसरी तरफ दीपम रायपुरा को अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देना है। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की आगे की प्रक्रिया तय होगी। मामले में ठेकेदार के खिलाफ पुलिस जांच भी चल रही है। अब यह देखना होगा कि जांच में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी सामने आती है।
FAQs:
रायपुरा के खिलाफ चार्जशीट जारी
मामला भोपाल के वित्त वर्ष 2024-25 के शराब ठेकों से जुड़ा है। विभाग ने आरोपों की जांच के लिए चार गवाह तय किए हैं। रायपुरा को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब देना होगा। वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर भी अपना पक्ष रख सकते हैं।
एक करोड़ की रिश्वत का जिक्र नहीं
लोकायुक्त ने मांगी जांच रिपोर्ट
इस रिपोर्ट में शराब दुकानों के ठेके मंजूर करने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी है। सूत्रों के मुताबिक आबकारी विभाग ने संबंधित दस्तावेज लोकायुक्त कार्यालय को भेज दिए हैं। MP Excise Department Case में अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
भोपाल के शराब ठेके में गड़बड़ी
2.75 करोड़ की FDR बिना जांच स्वीकार
यह एफडीआर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की बताई गई थी। लेकिन बैंक ने 12 अक्टूबर के पत्र में इसे जारी करने से इनकार किया था। इसके अलावा आरोप है कि बैंक निर्धारित श्रेणी में भी शामिल नहीं था। इन बातों के बावजूद एफडीआर स्वीकार करने पर सवाल उठे हैं।
पांच रुपए की फोटोकॉपी से ठेका
सुरक्षा राशि जमा करने में देरी
फर्म के ट्रांसफर में गड़बड़ी का आरोप
जबकि फर्म के ट्रांसफर का आदेश 27 दिसंबर को जारी हुआ। इसके अलावा प्रताप धाकड़ और आशीष धाकड़ के नाम भी चालान में दर्ज किए गए। आरोप है कि उस समय ये लोग संबंधित फर्म के भागीदार नहीं थे। इसके बावजूद दस्तावेजों में इन्हें भागीदार या लाइसेंसी बताया गया।
76 लाख की बैंक गारंटी पर सवाल
लेकिन उस समय विजय सिंह संबंधित फर्म के भागीदार नहीं थे। वे उस समय शराब दुकान के लाइसेंसी भी नहीं थे। नियमों के मुताबिक फर्म से जुड़े दस्तावेज जरूरी थे। इसके बावजूद व्यक्तिगत बैंक गारंटी स्वीकार करने का आरोप है।
निजी खाते के चेक भी स्वीकार किए
ठेकेदार जसवंत पर FIR दर्ज
हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में पूर्व डिप्टी कमिश्नर विनोद रघुवंशी का नाम भी सामने आया है। पुलिस जांच में दूसरे अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा सकती है। यदि उनके खिलाफ सबूत मिलते हैं तो उन्हें आरोपी बनाया जा सकता है।
सरकारी राजस्व को नुकसान का आरोप
जांच में आगे क्या होगा?
FAQs:
- पूर्व OSD दीपम रायपुरा पर क्या आरोप लगे हैं?
दीपम रायपुरा पर शराब दुकानों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोप हैं। इनमें बिना वेरिफिकेशन एफडीआर स्वीकार करना और लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में गड़बड़ी शामिल है। - शराब ठेका आवंटन में 2.75 करोड़ रुपए की FDR का क्या विवाद है?
आरोप है कि 2.75 करोड़ रुपए की असली एफडीआर के बजाय पांच रुपए की रंगीन फोटोकॉपी जमा कराई गई। इसी दस्तावेज के आधार पर दो शराब दुकानों के ठेके लेने का आरोप है। - लोकायुक्त ने शराब दुकान आवंटन मामले में क्या कार्रवाई की है?
लोकायुक्त डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने आबकारी आयुक्त से मामले के दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने दो सदस्यीय विभागीय जांच टीम की रिपोर्ट भी तलब की है। - शराब ठेका आवंटन मामले में किसके खिलाफ FIR दर्ज हुई है?
भोपाल के कोहेफिजा थाने में शराब ठेकेदार जसवंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी है। मामला कथित फर्जी एफडीआर से जुड़ा है। अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच में सामने आ सकती है।
एक साल में 54 विधायक अपने शहर का मास्टर प्लान फाइनल करा चुके, यूडीएच मंत्री का मास्टर प्लान दूसरी बार भी रद्द
By Jageshwar Prasad
चूरू में भीषण सड़क हादसा, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत; 7 माह की बच्ची घायल
By Jyoti Mahender Bhardwaj
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: 16 जिलों की 3,314 ग्राम पंचायतों में मतदान, सरपंच पद के लिए 16,795 प्रत्याशी मैदान में
By Jyoti Mahender Bhardwaj
देवास में 20 दिन में 13 लोगों की मौत से मचा हड़कंप, परिजन बोले-जहरीली शराब पीने से पहले आंखों की रोशनी गई, फिर जान, प्रशासन का आरोपों से इनकार
By Manya Jain
जयपुर में 10 हजार कर्मचारियों के बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर, महापौर बोले- कमी वाले इलाकों में करेंगे व्यवस्था
By Jageshwar Prasad
राजस्थान के 7 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट, माउंट आबू में पारा 12.8 डिग्री पहुंचा
By Jyoti Mahender Bhardwaj
छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 50 ट्रेन कैंसिल, 10 राज्यों के यात्री होंगे परेशान, देखें पूरी लिस्ट...
By Harrison Masih