आईएएस तुकाराम मुंढे ने बताई नौकरी की मुश्किलें: कहा- बच्चे अफसर नहीं, एंटरप्रेन्योर बनें
Arohi Raj | Oct 23, 2026, 18:54 IST
आईएएस मुंढे अपने बच्चों को नौकरी से क्यों दूर रखना चाहते हैं।
देश में कई माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे आईएएस अधिकारी बनें। लेकिन इस नौकरी में बार-बार तबादलों से परिवार की जिंदगी भी प्रभावित होती है। महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अपनी एक्सपीरियंस शेयर किया है। मुंढे ने कहा कि वे अपने बच्चों को सिविल सर्विसेज में जाने की सलाह नहीं देंगे। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे एंटरप्रेन्योर बनें या समाज की सेवा करें।
5वीं क्लास से पहले छह बार बदलना पड़ा बेटे का स्कूल
उनके मुताबिक, उनकी पत्नी को भी हर नई पोस्टिंग के हिसाब से अपनी जिंदगी ढालनी पड़ी। नए शहर में घर और परिवार की दिनचर्या फिर से व्यवस्थित करनी पड़ती थी। यह एक्सपीरियंस बताता है कि ट्रांसफर का असर सिर्फ अधिकारी की नौकरी तक सीमित नहीं रहता है।
बच्चों को IAS या IPS बनने की सलाह नहीं दूंगा
सरकारी सेवा में अधिकारियों को नियमों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दायरे में काम करना पड़ता है। मुंढे का बयान इसी अंतर और नौकरी के निजी जीवन पर पड़ने वाले असर की ओर ध्यान दिलाता है।
कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे ?
करियर चुनते समय इन बातों पर गौर करें
करियर चुनते समय केवल पद और प्रतिष्ठा देखना पर्याप्त नहीं है। अपनी रुचि, पारिवारिक जरूरतों और जीवनशैली को भी समझना जरूरी है। सिविल सर्विसेज, एंटरप्रेन्योरशिप और पब्लिक लीडरशिप, तीनों से समाज में योगदान दिया जा सकता है। आखिरकार, करियर का चुनाव व्यक्ति की प्राथमिकताओं और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
FAQs
- IAS तुकाराम मुंढे ने अपने बेटे के स्कूल बदलने के अनुभव के बारे में क्या बताया?
IAS तुकाराम मुंढे ने बताया कि उनके बेटे को 5वीं क्लास से पहले छह बार स्कूल बदलना पड़ा, जिससे परिवार को कई शहरों में रहना पड़ा और बच्चे की पढ़ाई और दिनचर्या पर असर पड़ा। - IAS तुकाराम मुंढे किस पद पर कार्यरत हैं और उनके कार्यों में क्या शामिल हैं?
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मई 2026 से महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर हैं, जहां उनका कार्य खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और मिलावट से जुड़े मामलों की जाँच करना है। - कैरियर चुनते समय युवाओं को क्या बातें ध्यान में रखनी चाहिए, जैसा कि तुकाराम मुंढे ने बताया?
तुकाराम मुंढे ने सुझाव दिया कि युवाओं को सिर्फ पद और प्रतिष्ठा पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपनी रुचि, पारिवारिक जरूरतों और जीवनशैली को भी समझना चाहिए, क्योंकि सिविल सर्विसेज, एंटरप्रेन्योरशिप, और पब्लिक लीडरशिप तीनों से समाज में योगदान किया जा सकता है।
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