सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: मत्स्य पालन को मिलेगा उद्योग का दर्जा, एमएसएमई से जुड़ेगा सेक्टर
Sandeep Kumar | Oct 23, 2026, 17:55 IST
एमपी में मछली पालन को मिलेगा उद्योगों जैसा फायदा
भोपाल में राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया। मत्स्य पालन को फूड प्रोसेसिंग और MSME से जोड़ा जाएगा। इस सेक्टर को बड़े उद्योगों जैसी छूट और इंसेंटिव मिलेंगे। चार जलाशयों में 7,430 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इंदिरा सागर जलाशय मॉडल बनेगा। मध्य प्रदेश में 2025-26 के दौरान 4.95 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा मछली उत्पादन हुआ।
मोहन यादव का ऐलान, उद्योग का दर्जा
मुख्यमंत्री बोले, यह स्वर्णिम समय है
मत्स्य पालन को लेकर सीएम मोहन ने कहा है कि वर्तमान दौर देश और प्रदेश के लिए स्वर्णिम समय है।
By: — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
मछली उत्पादन में देश की छलांग
ललन सिंह बोले, भारत दूसरे स्थान पर
केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि भारत आज दुनिया में मत्स्य उत्पादन में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
By: राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), केंद्रीय मंत्री
बघेल बोले, दुग्ध उत्पादन में भारत नंबर-1
भारत आज दुग्ध उत्पादन में दुनिया में नंबर-1 और मत्स्य उत्पादन में नंबर-2 पर है।
By: एसपी सिंह बघेल, केंद्रीय राज्य मंत्री
देश के मत्स्य उत्पादन में इनलैंड फिशरीज का योगदान 75 प्रतिशत है। इनलैंड फिशरीज का मतलब गैर-तटीय क्षेत्रों में मछली पालन है। मरीन यानी समुद्री फिशरीज का हिस्सा सिर्फ 25 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं।
इंदिरा सागर जलाशय बनेगा मॉडल
परियोजना के तहत करीब 4 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य है। एक्वापोनिक्स तकनीक से भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसमें मछली पालन के साथ सब्जियां उगाई जाती हैं। मध्य प्रदेश मत्स्य उद्योग (Madhya Pradesh fisheries) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग भी मिला है। केंद्र ने प्रदेश को रिजर्वायर फिशरीज क्लस्टर में शामिल किया है। यह जलाशय आधारित मत्स्य पालन की योजना है।
इसके तहत खंडवा का इंदिरा सागर जलाशय मॉडल बनेगा। रायसेन का हलाली जलाशय भी मॉडल बनेगा। हलाली जलाशय को सम्राट अशोक सागर के नाम से भी जाना जाता है।
यहां मत्स्य बीज और चारे से लेकर मार्केटिंग तक की व्यवस्था होगी। हलाली जलाशय में 2024-25 के दौरान उत्पादकता 361 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष दर्ज हुई। वर्ष 2025-26 में यह उत्पादकता 319 किलोग्राम रही। विभागीय जानकारी के मुताबिक, मध्यम श्रेणी के जलाशयों में यह सर्वाधिक उत्पादकता है।
मध्य प्रदेश मत्स्य उद्योग का लक्ष्य
क्या सरकार यह लक्ष्य पूरा कर पाएगी? इसका जवाब आने वाले वर्षों में मिलेगा। नीति के तहत करीब 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनसे मत्स्य बीज, चारा, प्रसंस्करण और शीत भंडारण की व्यवस्थाएं विकसित होंगी। परिवहन और निर्यात की सुविधाओं का भी विस्तार होगा।
इन निवेश प्रस्तावों से करीब 3.5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। जलाशयों के पास मछली उतारने के केंद्र बनाए जाएंगे। रोग निदान प्रयोगशालाएं और प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित होंगी। एकीकृत मत्स्य पालन में बतख और कुक्कुट पालन भी शामिल हैं। इसके अलावा मोती और मखाना उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रामीण युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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