25 मार्च से शुरू होगा प्रवेशोत्सव अभियान, घर-घर जाकर 3 से 18 वर्ष के बच्चों का होगा सर्वे

Ashish Bhardwaj | Mar 06, 2026, 13:19 IST
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school cholo
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में इस बार एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है। सभी स्कूलों में अधिक से अधिक बच्चों के नामांकन के लिए 25 मार्च से प्रवेशोत्सव अभियान चलाया जाएगा।

News In Short

  • राजस्थान में 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए 25 मार्च से बच्चों के नामांकन का बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा।
  • इस अभियान में शिक्षक घर-घर जाकर 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यालय से जोड़ेंगे।
  • अभियान चार चरणों में 27 मार्च, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल और 15 अप्रैल को संचालित किया जाएगा।
  • सर्वे कार्य में 25% कर्मचारी घर-घर सर्वे करेंगे, जबकि बाकी 75% स्कूलों में नियमित काम करेंगे।
  • शिक्षा विभाग का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और नामांकन सुनिश्चित करना है।

News In Detail

Bikaner: राजस्थान में शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए सभी स्कूलों में अधिक से अधिक बच्चों के नामांकन का बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा। शिक्षा विभाग का यह अभियान इस बार 25 मार्च से चलाया जाएगा। इस बार प्रदेश में नया शिक्षा सत्र एक जुलाई की बजाय एक अप्रैल से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

अभियान में घर-घर जाएंगे शिक्षक

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने 25 मार्च से प्रवेशोत्सव सघन अभियान के तहत घर-घर सर्वे कर 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की पहचान करने और उन्हें विद्यालय से जोड़ने के निर्देश जारी किए हैं। अभियान के तहत शिक्षक और शिक्षा विभाग के अन्य कार्मिक घर-घर जाकर उन बच्चों का पता लगाएंगे, जो अभी तक विद्यालय से नहीं जुड़े हैं या पढ़ाई छोड़ चुके हैं।

चार चरणों में चलेगा अभियान

आदेश में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अभियान को प्राथमिकता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 27 मार्च, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल और 15 अप्रैल को चार अलग-अलग चरणों में सघन सर्वे अभियान चलाया जाएगा। इन चरणों में शिक्षक और विभागीय कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर घर-घर सर्वे करेंगे तथा प्रत्येक घर की जानकारी डिजिटल मॉड्यूल में दर्ज करेंगे।

प्रवेशोत्सव के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी

आदेश के अनुसार इस वर्ष प्रवेशोत्सव के लिए सर्वे कार्य को बेहतर संचालित करने के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी जाएगी। संबंधित पीईईओ और यूसीईईओ अपने क्षेत्र में कार्यरत उप-प्राचार्य, व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक, अध्यापक लेवल-1 और लेवल-2, प्रयोगशाला सहायक, पुस्तकालयाध्यक्ष, शारीरिक शिक्षक सहित अन्य कार्मिकों को गांव, ढाणी और वार्डों में विभाजित कर घरों का आवंटन करेंगे। इन कार्मिकों को निर्धारित घरों में जाकर 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों की जानकारी जुटानी होगी।

मॉड्यूल में दर्ज होगी जानकारी

अभियान के तहत सर्वे करने वाले कार्मिकों को प्रत्येक घर की जानकारी डिजिटल प्रवेशोत्सव मॉड्यूल में दर्ज करनी होगी। इसमें उन बच्चों का विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा जो विद्यालय में नामांकित नहीं हैं या पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। विभाग का उद्देश्य है कि ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शीघ्र विद्यालय से जोड़ा जाए और उनका नामांकन सुनिश्चित किया जाए।

सर्वे में लगेंगे 25 फीसदी कर्मचारी

सर्वे अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कर्मचारियों को समूहों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक चरण में 25 प्रतिशत कार्मिक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और शेष 75 प्रतिशत कर्मचारी विद्यालयों में नियमित कार्य करते रहेंगे। अगले चरणों में यह अनुपात बदलते हुए अन्य कार्मिकों को भी सर्वे कार्य में लगाया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि विद्यालयों का नियमित शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित न हो और सर्वे अभियान भी प्रभावी ढंग से पूरा हो सके।

हर बच्चे को लाएंगे स्कूल

आदेश में यह भी कहा गया है कि आंगनबाड़ी में प्रवेश योग्य बच्चों के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग का सहयोग लिया जाएगा, जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को साक्षरता कार्यक्रम से जोड़ने के लिए साक्षरता विभाग की मदद ली जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिक्षा से वंचित किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति छूट न पाए।



ChatGPT Image Mar 6, 2026, 01_18_43 PM
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शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल औपचारिक सर्वे नहीं बल्कि बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसलिए सभी कार्मिकों को पूर्ण जिम्मेदारी, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का लक्ष्य है कि राज्य में कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित न रहे और सभी योग्य बच्चों का समय पर नामांकन सुनिश्चित किया जा सके।

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