आमेर में टूरिस्ट गाइड की मौत पर बवाल, बाजार बंद: किले तक जीप ले जाने से रोका तो मारा था चाकू
Ashish Bhardwaj | Sept 08, 2026, 11:53 IST
टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी
राजस्थान के आमेर में जीप को लेकर हुए विवाद में घायल टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी की SMS अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद आमेर बाजार बंद कर विरोध जताया गया।
Jaipur: राजधानी जयपुर के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल आमेर में टूरिस्ट गाइड पर हुए जानलेवा हमले ने मंगलवार को बड़ा रूप ले लिया। आमेर किले तक जीप ले जाने को लेकर हुए विवाद में चाकू से गंभीर रूप से घायल टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी की SMS अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की खबर आमेर पहुंचते ही स्थानीय लोगों, व्यापारियों और टूरिस्ट गाइड्स का गुस्सा फूट पड़ा। विरोध में आमेर कस्बे के बाजार बंद करा दिए गए और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। हालात को देखते हुए क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया है।
मामले में जीप चालक आजम और उसके साथी नाजिश पर मनीष पर चाकू से हमला करने का आरोप है। पुलिस दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ आमेर थाने में पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
पूरा मामला सोमवार, 7 सितंबर की सुबह का है। पुलिस के अनुसार सुबह करीब 10 बजे आमेर के मावठा सरोवर के पास टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी वाहनों को आमेर किले की ओर आगे जाने से रोक रहे थे। इसी दौरान जीप चालक आजम से उनकी कहासुनी हो गई।
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आजम और उसके साथी नाजिश ने मनीष पर हमला कर दिया। इसी दौरान मनीष के पेट में चाकू मार दिया गया। गंभीर रूप से घायल मनीष मौके पर गिर गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और गंभीर हालत में SMS अस्पताल पहुंचाया।
मनीष की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
मनीष पर हमले की खबर सोमवार को फैलते ही बड़ी संख्या में टूरिस्ट गाइड और स्थानीय लोग आमेर थाने पहुंच गए थे। लोगों ने करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कार्रवाई का भरोसा दिया था।
पुलिस ने घटना के बाद आजम और नाजिश को हिरासत में लिया। दोनों से घटनाक्रम को लेकर पूछताछ शुरू की गई। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
मंगलवार को मनीष की मौत की खबर आमेर पहुंचते ही लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। स्थानीय व्यापारी, टूरिस्ट गाइड और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग विरोध में उतर आए। आमेर कस्बे में दुकानें बंद करा दी गईं और प्रदर्शन शुरू हो गया।
प्रदर्शनकारी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग कर रहे हैं। पर्यटन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील आमेर क्षेत्र में हुई वारदात के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले में एक और गंभीर बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 सितंबर को भी मनीष सोनी का पार्किंग में पर्यटकों को अवैध रूप से ले जाने के मुद्दे पर विवाद हुआ था। इसके बाद मनीष कथित तौर पर अपने ऊपर हमला होने की आशंका जताते हुए आमेर थाने में शिकायत देने पहुंचे थे।
आरोप है कि उस समय पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की और मनीष वापस लौट गए। अब सात दिन बाद चाकू से हमले में उनकी मौत होने के बाद स्थानीय लोग पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
यदि जांच में यह सामने आता है कि मनीष ने पहले ही खतरे की आशंका जताई थी और पुलिस को इसकी जानकारी थी, तो यह मामला सिर्फ चाकूबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस की कथित लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
पुलिस के अनुसार आरोपी आजम के खिलाफ आमेर थाने में पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सोमवार का हमला अचानक हुई कहासुनी का नतीजा था या इसके पीछे पहले से चला आ रहा विवाद भी था।
इसके साथ ही हमले में इस्तेमाल चाकू की बरामदगी और दोनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका की जांच की जा रही है।
मनीष की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों और पीड़ित पक्ष की ओर से प्रशासन के सामने कई मांगें रखी गई हैं। इनमें पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता, परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी और डेयरी बूथ आवंटित करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने, आमेर महल और आसपास अवैध रूप से वाहन चलाने वालों पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से आमेर थाने के स्टाफ को बदलने तथा पूर्व शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप में SHO और संबंधित जांच अधिकारी पर कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
मनीष की हत्या के बाद आमेर में लंबे समय से चल रहे टूरिस्ट गाइड और वाहन संचालन के विवाद का मुद्दा भी सामने आ गया है। प्रदर्शनकारी आमेर महल और आसपास अवैध रूप से पर्यटकों को ले जाने वाले वाहनों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
अब पुलिस के लिए सिर्फ हत्या के मामले की जांच ही चुनौती नहीं है, बल्कि आमेर जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर गाइड, जीप चालकों और अन्य पर्यटन गतिविधियों के संचालन को लेकर बने विवाद को नियंत्रित करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
1 सितंबर: मनीष का पार्किंग/पर्यटकों को ले जाने के मुद्दे पर विवाद होने और पुलिस से शिकायत की कोशिश का दावा।
7 सितंबर, सुबह करीब 10 बजे: मावठा सरोवर के पास किले की ओर वाहन ले जाने को लेकर मनीष और जीप चालक आजम में विवाद।
7 सितंबर: मनीष के पेट में चाकू लगने से गंभीर रूप से घायल, एसएमएस अस्पताल में भर्ती।
7 सितंबर: टूरिस्ट गाइड और स्थानीय लोग आमेर थाने पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। आजम और नाजिश को पुलिस ने हिरासत में लिया।
8 सितंबर, सुबह करीब 5 बजे: इलाज के दौरान मनीष सोनी की मौत।
8 सितंबर: मौत की खबर के बाद आमेर में आक्रोश; बाजार बंद और लोगों का प्रदर्शन। क्षेत्र में पुलिस बल तैनात।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मनीष ने हमले से पहले ही पुलिस के सामने खतरे की आशंका जताई थी तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? साथ ही विश्व प्रसिद्ध आमेर पर्यटन क्षेत्र में वाहनों के संचालन को लेकर ऐसा कौन सा विवाद चल रहा था, जो आखिरकार एक टूरिस्ट गाइड की जान जाने तक पहुंच गया।
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मामले में जीप चालक आजम और उसके साथी नाजिश पर मनीष पर चाकू से हमला करने का आरोप है। पुलिस दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ आमेर थाने में पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
सोमवार सुबह शुरू हुआ विवाद, पेट में मारा चाकू
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आजम और उसके साथी नाजिश ने मनीष पर हमला कर दिया। इसी दौरान मनीष के पेट में चाकू मार दिया गया। गंभीर रूप से घायल मनीष मौके पर गिर गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और गंभीर हालत में SMS अस्पताल पहुंचाया।
मनीष की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
हमले के बाद ही घेर लिया था आमेर थाना
पुलिस ने घटना के बाद आजम और नाजिश को हिरासत में लिया। दोनों से घटनाक्रम को लेकर पूछताछ शुरू की गई। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
मौत की खबर आते ही फिर भड़का आक्रोश, बंद हुए बाजार
प्रदर्शनकारी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग कर रहे हैं। पर्यटन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील आमेर क्षेत्र में हुई वारदात के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल-1 सितंबर को ही जताई थी हमले की आशंका?
आरोप है कि उस समय पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की और मनीष वापस लौट गए। अब सात दिन बाद चाकू से हमले में उनकी मौत होने के बाद स्थानीय लोग पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
यदि जांच में यह सामने आता है कि मनीष ने पहले ही खतरे की आशंका जताई थी और पुलिस को इसकी जानकारी थी, तो यह मामला सिर्फ चाकूबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस की कथित लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच
इसके साथ ही हमले में इस्तेमाल चाकू की बरामदगी और दोनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका की जांच की जा रही है।
परिवार और प्रदर्शनकारियों ने रखीं कई मांगें
इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने, आमेर महल और आसपास अवैध रूप से वाहन चलाने वालों पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से आमेर थाने के स्टाफ को बदलने तथा पूर्व शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप में SHO और संबंधित जांच अधिकारी पर कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
पर्यटन स्थल पर अवैध वाहनों का मुद्दा भी आया सामने
अब पुलिस के लिए सिर्फ हत्या के मामले की जांच ही चुनौती नहीं है, बल्कि आमेर जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर गाइड, जीप चालकों और अन्य पर्यटन गतिविधियों के संचालन को लेकर बने विवाद को नियंत्रित करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
दो दिन में ऐसे बढ़ता गया मामला
7 सितंबर, सुबह करीब 10 बजे: मावठा सरोवर के पास किले की ओर वाहन ले जाने को लेकर मनीष और जीप चालक आजम में विवाद।
7 सितंबर: मनीष के पेट में चाकू लगने से गंभीर रूप से घायल, एसएमएस अस्पताल में भर्ती।
7 सितंबर: टूरिस्ट गाइड और स्थानीय लोग आमेर थाने पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। आजम और नाजिश को पुलिस ने हिरासत में लिया।
8 सितंबर, सुबह करीब 5 बजे: इलाज के दौरान मनीष सोनी की मौत।
8 सितंबर: मौत की खबर के बाद आमेर में आक्रोश; बाजार बंद और लोगों का प्रदर्शन। क्षेत्र में पुलिस बल तैनात।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मनीष ने हमले से पहले ही पुलिस के सामने खतरे की आशंका जताई थी तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? साथ ही विश्व प्रसिद्ध आमेर पर्यटन क्षेत्र में वाहनों के संचालन को लेकर ऐसा कौन सा विवाद चल रहा था, जो आखिरकार एक टूरिस्ट गाइड की जान जाने तक पहुंच गया।
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