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Photograph: (the sootr)
News in Short
अंजलि कच्छावा, भीलवाड़ा की पहलवान, भारतीय टीम का हिस्सा बनीं।
अंजलि ने सीनियर रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।
अंजलि के पिता ने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी जमीन बेची।
अंजलि कच्छावा का चयन क्रोएशिया के जगरेब में होने वाले सीनियर रेसलिंग टूर्नामेंट के लिए हुआ है।
अंजलि की मां को उम्मीद है कि वह भारत के लिए मेडल जीतेंगी।
News in Detail
राजस्थान की कपड़ा नगरी भीलवाड़ा की बेटी अंजलि कच्छावा ने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष से भारतीय कुश्ती टीम में स्थान हासिल किया है। अंजलि कच्छावा का चयन क्रोएशिया के जगरेब में होने वाले सीनियर रेसलिंग टूर्नामेंट के लिए हुआ है। अंजलि की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उनकी सफलता का श्रेय उनके पिता जगदीश कच्छावा को जाता है। उन्होने अपनी बेटी के सपनों को साकार करने के लिए जमीन तक बेच दी, ताकि अंजलि पहलवानी की दुनिया में अपनी पहचान बना सके।
पिता ने बेच दी जमीन, बेटी ने रचा इतिहास
अंजलि कच्छावा के पिता जगदीश कच्छावा छोटे-मोटे किसानी के काम में लगे हुए है। उन्होंने अपनी बेटी की पहलवानी के सपने को पूरा करने के लिए अपने प्लॉट तक बेच दिए। पिता का कहना है कि बच्चों को अनुशासन में रखना बहुत जरूरी है। सफलता तो हर किसी को मिलती है, लेकिन अनुशासन ही सबसे महत्वपूर्ण है। अंजलि ने भी अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए हर संभव मेहनत की और अब भारतीय टीम का हिस्सा बन गई हैं।
अंजलि की सफलता की कहानी
अंजलि कच्छावा की कहानी को सुनकर हिंदी फिल्म "दंगल" के डायलॉग "म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के" की याद आती है, जो सच साबित हो रही है। जैसे फिल्म में महावीर सिंह फोगाट की बेटियों की कहानी को पर्दे पर उतारा गया था, वैसे ही अंजलि का परिवार भी संघर्ष और सफलता की मिसाल पेश कर रहा है। अंजलि के पिता का मानना है कि बेटी ने पहलवानी में जो कदम बढ़ाया है। न केवल परिवार का नाम रोशन हुआ है, बल्कि राजस्थान का भी नाम गौरवमयी हुआ है।
अंजलि का गोल्ड मेडल और आगामी टूर्नामेंट
अंजलि कच्छावा ने हाल ही में सीनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था और अब वह 4 से 8 फरवरी तक क्रोएशिया के जगरेब में होने वाले सीनियर रेसलिंग टूर्नामेंट में भाग लेंगी। अंजलि 2 फरवरी से 4 फरवरी तक इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भारतीय कुश्ती टीम के कैंप का हिस्सा बनेंगी, जो उनके लिए एक और महत्वपूर्ण कदम होगा।
मां की डबल खुशी की उम्मीद
अंजलि की मां का कहना है कि बेटी ने पहलवानी में काफी सफलता पाई है। यदि वह भारत के लिए मेडल जीतती हैं तो यह उनकी खुशी का डबल होगा। परिवार के इस समर्थन और संघर्ष से अंजलि ने पहलवानी में अपनी पहचान बनाई है और अब वह अपनी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं।
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