20 दिन की पैरोल खत्म होने के बाद भी जेल नहीं पहुंचे आसाराम, जोधपुर में दर्ज हुआ मामला

Jageshwar Prasad | Oct 28, 2026, 12:57 IST
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तय समय पर सरेंडर नहीं करने पर आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज
तय समय पर सरेंडर नहीं करने पर आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज

नाबालिग से यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में जोधपुर केंद्रीय कारागार में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। पैरोल पर रिहा होने के बाद तय समय पर जोधपुर सेंट्रल जेल नहीं पहुंचने पर रातानाडा थाने में आसाराम के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज कर लिया गया है।

थानाधिकारी जुल्फिकार के अनुसार, जोधपुर केंद्रीय कारागार के प्रहरी बनवारीलाल की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि बंदी आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर 50,000 रुपए के निजी मुचलके पर 20 दिन की मेडिकल पैरोल पर छोड़ा गया था।

उन्हें 27 अक्टूबर की शाम 5 बजे तक जेल में आकर वापस सरेंडर करना था, लेकिन वह तय समय पर नहीं पहुंचे। इसके चलते उनके विरुद्ध राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58 (ख) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से पैरोल बढ़ाने से इनकार, जेल लौटना होगा | Supreme Court denies Asaram's parole extension, he has to return to jail
आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कोर्ट ने पैरोल बढ़ाने से किया इनकार, अब जेल में वापस लौटना होगा
27 Oct 2026 ,
By Jageshwar Prasad
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने मेडिकल आधार पर उनकी पैरोल की अवधि बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते अब आसाराम को आज शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में वापस आत्मसमर्पण करना होगा।
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने मेडिकल आधार पर उनकी पैरोल की अवधि बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते अब आसाराम को आज शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में वापस आत्मसमर्पण करना होगा।

अदालती अर्जी खारिज और देर रात जोधपुर आगमन

आसाराम मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित गवर्नमेंट धन्वंतरि आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करवा रहे थे। पैरोल की अवधि समाप्त होने से ठीक पहले उनके कानूनी वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर मेडिकल आधार पर पैरोल की अवधि बढ़ाने की गुहार लगाई थी। लेकिन अदालत ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें तुरंत सरेंडर करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया।

राहत याचिकाएं खारिज होने के बाद आसाराम के वकील जोधपुर जेल प्रशासन के पास पहुंचे और कानूनी औपचारिकताएं निभाते हुए मोहलत मांगी। इसके बाद आसाराम को उज्जैन से एयर एंबुलेंस के जरिए जोधपुर लाया गया, जहां वे देर रात लगभग 10:15 बजे पहुंचे।

आसाराम को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने का आदेश, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार | Court orders release of Asaram on 20-day parole, High Court reprimands government
आसाराम को कोर्ट से मिली राहत, हाईकोर्ट ने सरकार से कहा - 20 दिन की पैरोल पर करें रिहा
06 Oct 2026 ,
By Ashish Bhardwaj
राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को आसाराम को 20 दिन की पैरोल देने का आदेश दिया था। आरोप है कि राज्य सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया। इसे लेकर आसाराम के वकील ने सरकार की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि उसके आदेश का पालन किया जाए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को आसाराम को 20 दिन की पैरोल देने का आदेश दिया था। आरोप है कि राज्य सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया। इसे लेकर आसाराम के वकील ने सरकार की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि उसके आदेश का पालन किया जाए।

जेल के कड़े नियम और पुलिस में दर्ज हुई FIR

हवाई अड्डे से आसाराम को सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल (Jodhpur Central Jail) ले जाया गया, लेकिन जेल मैन्युअल और सुरक्षा नियमों के अनुसार सूर्यास्त के बाद किसी भी बंदी या कैदी को जेल परिसर के भीतर प्रवेश देने की अनुमति नहीं होती है। इस प्रशासनिक नियम के कारण जेल प्रशासन ने उन्हें रात में अंदर लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद आसाराम को शहर के आरोग्य अस्पताल ले जाया गया।

इसी बीच, जेल की सुरक्षा और व्यवस्था देख रहे प्रहरी बनवारीलाल ने रातानाड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। थानाधिकारी जुल्फिकार के अनुसार, जेल प्रहरी की इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58 (ख) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।


3 साल की सजा का प्रावधान और पैरोल पर संकट

वर्ष 2015 में राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) द्वारा बनाए गए कारागार अधिनियम संशोधनों के तहत पैरोल नियमों का उल्लंघन एक गंभीर अपराध है। धारा 58 (ख) में यह साफ प्रावधान है कि यदि कोई कैदी तय समय पर वापस जेल नहीं आता या पैरोल की शर्तों को तोड़ता है, तो उसे दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष तक का अतिरिक्त कारावास, 3,000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

कानूनी जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद अब आसाराम के लिए भविष्य में दोबारा पैरोल पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। अदालती नियमों की अनदेखी और दर्ज हुई नई एफआईआर का असर उनकी लंबित याचिकाओं पर भी पड़ सकता है। इस बीच, जोधपुर में जेल और अस्पताल परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उनके औपचारिक सरेंडर की कार्रवाई पूरी की जा रही है।

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