/sootr/media/media_files/2026/02/12/polish-contable-2026-02-12-12-30-40.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान के बाड़मेर में डमी कैंडिडेट बैठाकर पुलिस भर्ती परीक्षा पास करने के आरोप में एसओजी ने तीन सिपाहियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
- जांच में ओमप्रकाश, गंगाराम और सुमेरमल के दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं।
- एसओजी ने ओएमआर शीट और मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया, जिससे फर्जीवाड़ा सामने आया।
- 2014 में एमबीसी गर्ल्स कॉलेज से इन सिपाहियों ने फर्जी तरीके से परीक्षा पास की थी।
- बाड़मेर एसपी ने इस मामले की जांच के लिए एसओजी को निर्देश दिए थे।
News In Detail
राजस्थान के बाड़मेर में 12 साल पहले पुलिस भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास करने के आरोप में एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने तीन सिपाहियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एसओजी ने जांच के दौरान पाया कि तीन सिपाही-ओमप्रकाश, गंगाराम और सुमेरमल ने फर्जी तरीके से परीक्षा में भाग लिया था। इस फर्जीवाड़े के मामले को लेकर एसओजी ने दस्तावेजों की जांच की। जांच में यह मामला स्पष्ट हुआ कि इन तीनों ने डमी कैंडिडेट के तौर पर परीक्षा दी थी।
एसओजी की जांच में खुलासा
एसओजी की जांच में यह बात सामने आई कि बाड़मेर के एमबीसी गर्ल्स कॉलेज और वर्धमान आदर्श विद्या मंदिर बालोतरा में डमी कैंडिडेट बैठाए गए थे। ओमप्रकाश, गंगाराम और सुमेरमल के हस्ताक्षरों का मिलान नहीं हुआ था। इससे इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच के बाद एसओजी ने पाया कि इन सिपाहियों ने वर्ष 2014 में राजस्थान कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में फर्जी तरीके से सफलता प्राप्त की थी।
तकनीकी जांच से हुआ फर्जीवाड़ा का खुलासा
एसओजी ने इन सिपाहियों के दस्तावेजों की गहरी जांच की और पाया कि ओमप्रकाश और गंगाराम के हस्ताक्षर अलग-अलग थे। जबकि उनकी ओएमआर शीट और प्रवेश पत्र पर हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते थे। एसओजी ने इन उम्मीदवारों के मोबाइल नंबरों का तकनीकी शाखा से सी-ट्रेस रिकार्ड चेक किया, और जांच के दौरान दस्तावेजों की पुष्टि की। इन सिपाहियों ने 2014 में बाड़मेर के एमबीसी गर्ल्स कॉलेज से पुलिस भर्ती परीक्षा पास की थी।
एसपी ने एसओजी को मामले से अवगत कराया
बाड़मेर के एसपी नरेंद्रसिंह मीना ने 8 अक्टूबर 2025 को एसओजी को इस मामले से अवगत कराते हुए इसकी जांच शुरू करने का आदेश दिया। एसपी द्वारा दी गई जानकारी के बाद एसओजी ने इस मामले में कार्रवाई शुरू की और इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया।
पुलिस भर्ती में पारदर्शिता की आवश्यकता
इस मामले में एक बड़ा सवाल उठता है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कितनी कमी है, जिसके चलते डमी कैंडिडेट परीक्षा में पास हो जाते हैं। यह घोटाला न केवल राज्य की पुलिस भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे उन सभी उम्मीदवारों का भी हक मारा जाता है, जो ईमानदारी से परीक्षा में बैठते हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस घोटाले में शामिल सभी लोगों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाएगा।
पुलिस भर्ती परीक्षा डमी कैंडिडेट मामला एक नजर में
यह मामला 12 साल पहले की पुलिस भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। एसओजी की जांच में यह खुलासा हुआ कि तीन सिपाहियों ने डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास की थी। एसओजी ने दस्तावेजों की जांच की और मोबाइल नंबरों की सी-ट्रेस रिकार्ड चेक की। इसके बाद ओमप्रकाश, गंगाराम और सुमेरमल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस घोटाले ने यह सिद्ध कर दिया है कि पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भर्ती प्रक्रिया में सुधार और तकनीकी निगरानी की आवश्यकता है।
ये भी पढे़:-
एमपी में बादलों का डेरा, सुबह और शाम पड़ेगी हल्की ठंड, सीजी और राजस्थान में गर्मी की दस्तक
बजट 2026-27: 'विकसित राजस्थान' का ब्लूप्रिंट; खेती से लेकर तकनीक तक, हर सेक्टर के लिए खुला खजाना
बजट का गणित: कमाई कम और कर्ज का बोझ ज्यादा, क्या उधारी के भरोसे विकसित राजस्थान का सपना होगा पूरा
राजस्थान बजट 2026 की वो बड़ी घोषणाएं, जो हो सकती है आपके लिए काम की
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us