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Photograph: (the sootr)
News in Short
- हाई कोर्ट ने नहीं माना, फूड सेफ्टी ऑफिसर के लिए बीडीएस को मेडिसिन डिग्री के समान
- किसी भर्ती में पात्रता संबंधी शर्तों में हाई कोर्ट नहीं दे सकता दखल
- एक्सपर्ट कमेटी मान चुकी है बीडीएस व मेडिसिल में डिग्री समकक्ष नहीं
- पात्रता शर्तों में कोर्ट नहीं कर सकती बदलाव या संशोधन
- डेंटल डिग्रीधारक ने फूड सेफ्टी ऑफिसर पोस्ट की पात्रता को दी थी चुनौती
News in Detail
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि फूड सेफ्टी ऑफिसर की पोस्ट के लिए बीडीएस की डिग्री को मेडिसिन में डिग्री के समान नहीं माना है। मामले में एक्सपर्ट कमेटी पहले ही बीडीएस को मेडिसिन में डिग्री के समान मानने से इंकार कर चुकी है और कोर्ट को इसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है। जस्टिस आनंद शर्मा ने कहा है कि कोर्ट को योग्यता के लिए सरकार की ओर से तय मापदंडों में इस सीमा मत दखल देने की स्वतंत्रता नहीं है जिससे मापदंड संशोधित हो जाएं या बदल जाएं।
इसलिए कर दिया आवेदन रद्द
आरपीएससी ने फूड सेफ्टी ऑफिसर की पोस्ट पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इस पोस्ट की पात्रता के लिए ​मेडिसिन में डिग्री होना जरुरी किया गया। याचिकाकर्ता अरविंद कुमार गुप्ता ने भी आवेदन किया था। उनके पास बीडीएस की डिग्री है। आरपीएसएसी ने बीडीएस को मेडिसिन में डिग्री के समकक्ष नहीं माना और आवेदन रद्ध कर दिया।
कानून में डेंटल को बाहर नहीं माना
याचिकाकर्ता ने आवेदन रद्ध होने को चुनौती देते हुए कहा कि इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट-1956 में मेडिसिन की परिभाषा में साफ है कि किसे मेडिसिन नहीं माना जाएगा। इसमें बीडीएस शामिल नहीं हैं। इससे साबित है कि आधुनिक वैज्ञानिक मेडिसिन की परिभाषा में सभी ब्रांच शामिल हैं।
कोर्ट को बताया गया कि एम्स दिल्ली और पुड्डुचेरी के जवाहरलाल इंस्टीट्यूट आॅफ पोस्ट ग्रेजुएट एज्यूकेशन व रिसर्च ने आरटीआई में दिए जवाब में डेंटल को मेडिसिन की ही ब्रांच माना है।
अलग-अलग हैं दोनों
राज्य सरकार के एडवोकट अर्चित बोहरा ने कहा कि मेडिसिन में डिग्री बीडीएस डिग्री से बिल्कुल अलग है। इसी प्रकार के मामले में तेलंगाना में एक्सपर्ट कमेटी बनी थी। कमेटी ने 1956 के कानून में मेडिसिन की डिग्री में डेंटल का उल्लेख नहीं है। ना ही बीडीएस डिग्री का एक्ट के शिड्यूल में कोई उल्लेख है। इसलिए बीडीएस मेडिसिन में डिग्री के समकक्ष नहीं है। राज्य को एम्पलॉयर की हैसियत से पोस्ट के अनुरुप पात्रता की शर्तें तय करने का अधिकार है।
कोर्ट नहीं कर सकता तय
कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट किसी पोस्ट के लिए सरकार की ओर तय की गई पात्रता को संशोधित या विस्तार नहीं कर सकता ना अन्य पात्रता को पहले से तय पात्रता के समान मानने के आदेश दे सकता है। एक्सपर्ट कमेटी भी मान चुकी है कि बीडीएस डिग्री को मेडिसिन की डिग्री के समान नहीं है तो कोर्ट के दखल की कोई गुंजाईश नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
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