जिस प्रॉपर्टी के कारण अरबपति बनीं बीजेपी विधायक सिद्धि कुमारी, उसी पर मच गया विवाद

Chakresh | Jan 09, 2024, 24:00 IST
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जिस प्रॉपर्टी के कारण अरबपति बनीं बीजेपी विधायक सिद्धि कुमारी, उसी पर मच गया विवाद
जिस प्रॉपर्टी के कारण अरबपति बनीं बीजेपी विधायक सिद्धि कुमारी, उसी पर मच गया विवाद

MLA सिद्धि कुमारी ने 2018 के चुनाव में एफिडेविट लगाकर अपनी संपत्ति करीब 8.89 करोड़ बताई थी, लेकिन 2023 के चुनाव के उन्होंने खुद को करीब 102 करोड़ की संपत्ति की मालकिन बताया है।

BIKANER. बीकानेर के पूर्व राजपरिवार में अरबों की संपत्ति को लेकर बुआ- भतीजी आमने-सामने हैं। बुआ पूर्व महाराजा करणी सिंह की बेटी हैं तो भतीजी बीकानेर पूर्व से बीजेपी विधायक सिद्धि कुमारी… 2018 के विधानसभा चुनाव तक तो सिद्धि कुमारी केवल करोड़पति थीं, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव के नामांकन में दिए हलफनामे में सिद्धि कुमारी ( MLA SIDDHI KUMARI ) ने कुछ नई प्रॉपर्टी दर्शाई और खुद को करीब 102 करोड़ की मालकिन बताया। यहीं से विवाद शुरू हो गया। बुआ राज्यश्री ( RAJYASHREE ) ने चुनाव आयोग को शिकायत कर दी। उनका कहना था कि ये सम्पत्तियां विवादित हैं और ऐसे में सिद्धि कुमारी, इन्हें अपनी संपत्तिनहीं बता सकतीं। दरअसल, यह झगड़ा महाराजा करणी सिंह ( MAHARAJA KARNI SINGH ) के निधन के बाद शुरू हुआ था। कई साल तक ये विवाद राजपरिवार के महलों के अंदर चलता रहा। अब ये लड़ाई पुलिस थाने तक पहुंच गई है।

आखिर कहां है इस संपत्ति विवाद की जड़?

MLA सिद्धि कुमारी ने 2018 के चुनाव में एफिडेविट लगाकर अपनी संपत्ति करीब 8.89 करोड़ बताई थी, लेकिन 2023 के चुनाव के उन्होंने खुद को करीब 102 करोड़ की संपत्ति की मालकिन बताया है। इसमें उन्होंने करणी भवन, प्राचीना और माउंट आबू की एक प्रॉपर्टी को भी अपना बताया है। बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले बीकानेर की राजमाता और दिवंगत करणी सिंह की पत्नी सुशीला कुमारी का निधन हो गया था। वे विधायक सिद्धि कुमारी की दादी और राज्यश्री कुमारी की मां लगती थीं। बताया जा रहा है कि राजमाता 80 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति सिद्धि कुमारी के नाम कर गई हैं। असल में अब विवाद इसी बात का है कि उस संपत्ति पर असल में किसका हक है?

राज्यश्री कुमारी के पक्ष का तर्क है कि राजमाता की वसीयत जिस तरीके से सार्वजनिक होनी चाहिए थी, अब तक नहीं हुई है। अधिकृत तौर पर खुलने के पहले राजमाता की संपत्ति को एक पक्ष ने अपने नाम होने का दावा कर दिया है। राज्यश्री ने करणी भवन, प्राचीना और माउंट आबू की संपत्तिसे जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग (ELECTION COMMISION) को एक शिकायत दर्ज कराई है। उनका दावा है कि प्राचीना का व्यावसायिक उपयोग गलत हो रहा है। इस पर उनका भी अधिकार है। इसी तरह करणी भवन और माउंट आबू की संपत्तिपर भी अकेले सिद्धि कुमारी का अधिकार नहीं है।

ये हैं राज्यश्री की आपत्तियां

  1. प्राचीना: जूनागढ़ परिसर के अंदर ही एक प्राचीना म्यूजियम सिद्धि कुमारी ने विधायक बनने से पहले शुरू किया था। राज्यश्री का कहना है कि यह संपत्तिरिहायशी है और व्यावसायिक रूप से इसका गलत उपयोग हो रहा है। खुद राज्यश्री ने प्राचीना पर स्वयं का चौथाई हिस्सा होने का दावा करते हुए न्यायालय में वाद लगाया हुआ है।
  2. करणी भवन : जूनागढ़ के अंदर ही बने इस भवन को लेकर भी बीकानेर की एक कोर्ट में वाद चल रहा है। राज्यश्री ने चुनाव आयोग को दी शिकायत में कहा है कि इस संपत्तिको रिहायशी बताया गया है, जबकि यहां होटल संचालित हो रहा है। यहां व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं। इसकी कीमत 34.27 करोड़ रुपए बताई गई है। वर्तमान में इसे एचआरएच ग्रुप (HRH GROUP BIKANER) ने लीज पर ले रखा है।
  3. माउंट आबू की संपत्ति: इस प्रॉपर्टी में सिद्धि कुमारी ने एफिडेविट में अपना अचल हिस्सा बताया है। राज्यश्री को इस पर भी आपत्ति है। उन्होंने शिकायत में कहा है कि ये संपत्तियां सिद्धि कुमारी के अकेले स्वामित्व की नहीं हैं।
  4. पैतृक वसीयत : शेयर्स, एफडीआर और अचल संपत्ति पर भी राज्यश्री ने आपत्ति दर्ज कराते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

देवस्थान विभाग में भी चल रहा एक मामला

बुआ-भतीजी का ये विवाद देवस्थान विभाग तक भी पहुंचा हुआ है। ट्रस्ट से जुड़े इस मामले में ट्रस्ट की संपति के उपयोग पर सवाल उठाए गए हैं। इसके बाद ट्रस्ट में भी कई फेरबदल किए गए। कुछ ट्रस्टियों को हटाया गया। इस मामले की अलग से जांच चल रही है।

करणी सिंह ने की थी वसीयत, उसके बाद से चल रहा विवाद

बीकानेर के महाराजा रहे करणी सिंह की 2 बेटियां हैं- राज्यश्री कुमारी और मधुलिका। एक बेटे नरेंद्र सिंह थे। राज्यश्री कुमारी की दो संतान है। इनमें एक बेटा और एक बेटी अनुपमा कुमारी हैं। इसी तरह मधुलिका कुमारी के एक बेटा रायसिंह है। वहीं नरेंद्र सिंह के बेटा नहीं था, बल्कि तीन लड़कियां दक्षा, महिमा और सिद्धि कुमारी हैं। इनमें से दक्षा कुमारी का निधन हो चुका है। स्वयं सिद्धि कुमारी अविवाहित हैं।

4 सितंबर 1988 को करणी सिंह का निधन हुआ था। निधन से पहले करणी सिंह ने अपनी संपत्तियों के बंटवारे को लेकर एक वसीयत भी कर दी थी। ये वसीयत कभी भी सार्वजनिक नहीं की गई। ऐसे में किस बेटी और बेटे को वसीयत में क्या- क्या दिया गया, इस बारे में अधिकृत तौर पर कोई जानकारी राजपरिवार से बाहर नहीं आई।

अब करणी सिंह की बेटी राज्यश्री का दावा है कि उनके पिता महाराजा करणी सिंह ने सारी वसीयत अपने एकमात्र बेटे नरेंद्र सिंह के नाम नहीं की थी। बेटी के रूप में उनका भी संपत्ति में हिस्सा है। राज्यश्री कुमारी के स्टाफ का कहना है कि राजमाता सुशीला ने अगर कुछ सिद्धि कुमारी के नाम किया है तो अभी ये तय किया जाना शेष है कि क्या वो राजमाता के स्वयं के अधिकार क्षेत्र में था या नहीं?

बुआ के खिलाफ सिद्धि कुमारी भी पहुंचीं थाने

खुद के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत के बाद सिद्धि कुमारी ने भी अपनी बुआ के खिलाफ बीकानेर में मुकदमा दर्ज करवाया है। दर्ज एफआईआर में राज्यश्री कुमारी के साथ ही उनके ऑफिस में काम करने वाले सामान्य कर्मचारियों पर भी मामला दर्ज कराया गया है। जिसमें राजेश पुरोहित और पुखराज शामिल हैं। ये दोनों उनके ऑफिस में वर्षों से काम कर रहे हैं। इसके अलावा राज्यश्री की शिकायत के आधार पर जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देने वाली कांग्रेस की प्रवक्ता ऋतु चौधरी को भी नामजद करवा दिया।

मेरे ऊपर लगे आरोप झूठे- राज्यश्री

राज्यश्री कुमारी ने एक बयान जारी कर कहा है कि राजमाता की वसीयत मुंबई में रजिस्टर्ड है। ये नियम है कि मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में कोई वसीयत रजिस्टर्ड है तो वो पहले हाईकोर्ट में प्रोबेट होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर भी उस वसीयत का जिक्र चुनाव नामांकन में किया गया। ये कानून का उल्लंघन है। मैंने इसी की शिकायत चुनाव आयोग में की थी।

इधर बयान देने से बच रहीं सिद्धि कुमारी

इस पूरे मामले में सिद्धि कुमारी किसी तरह का बयान देने से बच रही हैं। दैनिक भास्कर ने जब उनसे मोबाइल पर बात की तो इस विवाद पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। हालांकि सीधे तौर पर राज्यश्री ने भी कोई वक्तव्य नहीं दिया है, अलबत्ता एक वीडियो जारी कर सदर थाने में दर्ज मामले को गलत बताया है। ये भी कहा है कि हम मेहनती लोग हैं और अपना काम कर रहे हैं।

ट्रस्ट भी बनाए गए

महाराजा करणी सिंह के निधन के बाद राजपरिवार ने कई ट्रस्ट बना दिए। इन ट्रस्ट से ही अनेक सामाजिक कार्य होते रहे हैं। इनमें महाराजा राय सिंह ट्रस्ट, महाराजा करणी सिंह ट्रस्ट, महाराजा करणी सिंह फाउंडेशन आदि हैं। इन ट्रस्ट के माध्यम से चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में अनुदान देने का काम भी होता है। कई साहित्यकारों को किताबें छापने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाती है। पीबीएम अस्पताल में भी कई कार्य करवाए गए हैं। स्वयं सिद्धि कुमारी भी कई सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहती है। वो अपने विधायक कोटे से भी जनहित के कार्यों पर फोकस करती हैं। खासकर पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग में वो लाखों रुपए खर्च कर चुकी हैं।

Q & A

Q: बीकानेर राजघराने में बुआ-भतीजी के बीच संपत्ति विवाद की जड़ क्या है?

A: बुआ-भतीजी यानि राज्यश्री कुमारी और सिद्धी कुमारी के बीच संपत्ति विवाद की जड़ बीकानेर के महाराजा करणी सिंह की वसीयत है। करणी सिंह के निधन के बाद उनकी संपत्तियों के बंटवारे को लेकर वसीयत की गई थी, लेकिन ये वसीयत कभी भी सार्वजनिक नहीं की गई। ऐसे में किस बेटी और बेटे को वसीयत में क्या- क्या दिया गया, इस बारे में अधिकृत तौर पर कोई जानकारी राजपरिवार से बाहर नहीं आई। बुआ राज्यश्री कुमारी का दावा है कि उनके पिता महाराजा करणी सिंह ने सारी वसीयत अपने एकमात्र बेटे नरेंद्र सिंह के नाम नहीं की थी। बेटी के रूप में उनका भी संपत्ति में हिस्सा है। लेकिन विधायक और भजीजी सिद्धि कुमारी का दावा है कि राजमाता सुशीला ने उन्हें करणी भवन, प्राचीना और माउंट आबू की संपत्ति अपने नाम कर दी है।

Q: बीकानेर राजघराने में बुआ-भतीजी के बीच विवाद में कौन-कौन सी संपत्तियां शामिल हैं?

A: बुआ-भतीजी के बीच विवाद में शामिल संपत्तियों में करणी भवन, प्राचीना, माउंट आबू की संपत्ति और कुछ शेयर्स, एफडीआर और अचल संपत्ति शामिल हैं।

Q: बीकानेर राजघराने में बुआ- भतीजी के बीच विवाद कब से चल रहा है?

A: बुआ-भतीजी के बीच विवाद महाराजा करणी सिंह के निधन के बाद से चल रहा है। कई साल तक ये विवाद राजपरिवार के महलों के अंदर चलता रहा। अब ये लड़ाई पुलिस थाने तक पहुंच गई है।

Q: बीकानेर राजघराने में बुआ-भतीजी के बीच विवाद का क्या हल निकलेगा?

A: बुआ-भतीजी के बीच विवाद का हल कोर्ट में होगा। दोनों पक्षों ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा और फैसला सुनाएगा।

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