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Photograph: (the sootr)
Jaipur. राजस्थान में सर्द मौसम है, लेकिन ब्यूरोक्रेसी और नेताओं के टकराव से माहौल में गर्मी है। कहीं मंत्री अपने दरबार में टॉप अफसरों के हाजिरी नहीं लगाने से उखड़े हुए हैं तो कहीं मंत्री अफसरों से नाराज होकर गुस्से में कागजात मेज पर पटक रहे हैं। इतना ही नहीं, सांसद और विधायक भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में अफसरों को निकल जाने का हुक्म सुना रहे हैं। इस टकराव का सीधा असर सरकार के कामकाज पर पड़ रहा है।
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सीएमओ में पहुंच रही शिकायतें
अफसरों और नेताओं के बीच टकराव की शिकायतें मुख्यमंत्री तक भी पहुंची हैं। सूत्रों का कहना है कि मंत्री, सांसद और विधायकों ने अपने क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक अधिकारियों के खिलाफ सीएम से शिकायत की हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर ग्रामीण के एसपी के बारे में यह तक शिकायत कर दी कि वे पद संभालने के एक महीने बाद भी उनसे मिलने नहीं आए। ब्यूरोक्रेसी का नेताओं से बढ़ रहा टकराव सरकार के लिए मुसीबत बन रहा है।
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मंत्री ने कलेक्टर को फटकारा
हाल ही में सीकर में शहरी सेवा शिविर का निरीक्षण पर पहुंचे वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा कलेक्टर मुकुल शर्मा पर भड़क उठे। हुआ यह कि परिवादियों की सुनवाई के दौरान बीच में जैसे ही कलेक्टर मुकुल बोलने लगे तो मंत्री को गुस्सा आ गया। उन्होंने कलेक्टर को यहां तक कह दिया कि आप भ्रष्टाचारियों का समर्थन कर रहे हैं। आपकी जो मर्जी हो तो उस तरह जिले को चलाइए, मैं जा रहा हूं। कलेक्टर से नाराज मंत्री का कागजात मेज पर पटकते हुए का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
राजस्थान में सीकर के कलेक्टर पर वन मंत्री संजय शर्मा इतना गुस्से हुए कि वह कागज फैंक कर उठ कर जाने लगे... #SikarCollector#Rajasthan#SanjaySharma#Anger#GovernmentOfficials#PoliticalTension#BreakingNews#ViralIncidentpic.twitter.com/4ZwLGHWeLC
— TheSootr (@TheSootr) December 23, 2025
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एसपी के खिलाफ केंद्रीय मंत्री की शिकायत
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर ग्रामीण के एसपी नारायण टोगस के खिलाफ बाकायदा
मुख्यमंत्री से शिकायत की। उनकी सितंबर माह की यह लिखित शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। पत्र में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि एसपी कार्यभार ग्रहण करने के एक माह बाद भी उनसे संपर्क नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र की कानून व्यवस्था और प्रस्तावित दौरे से संबंधित प्रोटोकॉल के संबंध में चर्चा के लिए एसपी से बार बार संपर्क किया। लेकिन, उनकी तरफ से अभी तक कोई बात नहीं की गई। महत्वपूर्ण विषयों पर अनदेखी गंभीर लापरवाही और उदासीनता का स्पष्ट संकेत देती है।
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प्रतापगढ़ कलेक्टर से नाराज सांसद
इसी तरह उदयपुर सांसद मुन्नालाल रावत और प्रतापगढ़ कलेक्टर डॉ. अंजली राजोरिया विवाद भी सुर्खियों में रहा। सांसद ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कलेक्टर की शिकायत की। दूसरी तरफकलेक्टर ने भी मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सांसद के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कलेक्टर का आरोप है कि सांसद सिर्फ अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने का दबाव डाल रहे हैं, जो कि गलत है।
विधायक ने कलेक्टर और एडीएम को फटकारा
नवंबर में श्रीगंगानगर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक जयदीप बिहानी जिला कलेक्टर और एडीएम पर बिफर गए। उन्होंने मंच पर ही कलेक्टर मंजू को खरी-खरी सुनाई। यहां तक कि कलेक्टर और एडीएम को कार्यक्रम से बाहर जाने का आदेश दिया। विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर दोनों अधिकारियों की की शिकायत की। बाद में कलेक्टर और एडीएम ने भी सरकार को अपना स्पष्टीकरण भेजा।
जयपुर सांसद ने अफसरों को लगाई लताड़
जयपुर में हाल ही में शहरी समस्या समाधान शिविर में भाजपा की लोकसभा सांसद मंजू शर्मा अफसरों की कार्यशैली पर जमकर नाराज हुईं। उन्होंने कहा कि आप लोग जनता के काम नहीं करते हो। जनता हमारे दरवाजे पर बार-बार शिकायतें करती है। अगर काम ही नहीं करना है तो तनख्वाह क्यों लेते हो। नगर निगम के अफसरों को फटकार लगाने का महिला सांसद का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
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अफसरों से क्यों नाराज हैं नेताजी
एक ​सीनियर अधिकारी का कहना है कि हालांकि, प्रत्येक सरकार में अफसरों और नेताओं के बीच छोटा-मोटा मनमुटाव होता है। लेकिन, सोशल मीडिया पर टकराव के वीडियो चलने से स्थिति अधिक नाजुक हो रही है। दोनों पक्षों को बात करते समय संयम बरतना चाहिए। उधर, वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद मलिक का कहना है कि नेता पर जनता का काम कराने का दबाव रहता है। लेकिन, कई बार सांसद विधायक नियम की परवाह किए बगैर अफसरों पर काम करने का दबाव बनाते हैं। काम नहीं होने पर दोनों पक्षों में टकराव की स्थिति आ जाती है।
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वसुंधरा ने बयान में खींचा था अफसरों को
हाल ही भाजपा के एक कार्यक्रम में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया ने अफसरों के काम नहीं करने का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि कार्यकर्ता पार्टी के एम्बेसडर हैं। नौकरशाही को उनके काम करने ही होंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि अफसरों एक ही घंटे में कार्यकर्ताओं के फोन उठाएं,
अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहें।
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