चूरू जिला परिषद चुनाव, राजेंद्र राठौड़ के बेटे को मिला भाजपा का सिंबल, दिनभर के सस्पेंस के बाद हुआ फैसला
Mukesh Sharma | Oct 22, 2026, 20:37 IST
राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम को BJP का सिंबल
राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम राठौड़ को भाजपा ने चूरू जिला परिषद चुनाव के लिए टिकट दिया।
राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम राठौड़ को भाजपा ने चूरू जिला परिषद चुनाव के लिए टिकट दिया। उनकी पत्नी कनिका सिंह को भी पहले ही पार्टी ने टिकट दे दिया था। बुधवार को पराक्रम ने वार्ड 39 से नामांकन दाखिल किया था। पार्टी की मीटिंग में उनके टिकट को रोकने का निर्णय लिया गया था। लेकिन फिर अंततः पराक्रम को पार्टी सिंबल दे दिया गया।
राजस्थान में सीनियर भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम राठौड़ को आखिरकार दिनभर के सस्पेंस के बाद भाजपा ने चूरू जिला परिषद चुनाव के लिए वार्ड 39 से पार्टी सिंबल दे ही दिया। पराक्रम सिंह की पत्नी कनिका सिंह को भाजपा पहले ही टिकट दे चुकी थी,लेकिन पराक्रम का टिकट रोक लिया गया था। इसके बाद से ही उनके नाम वापसी की चर्चा भी चल रही थी,लेकिन अंतत: गुरुवार शाम पार्टी ने उन्हें भी पार्टी सिंबल दे ही दिया। पराक्रम ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी भी साझा की।
पराक्रम ने बुधवार को चूरु जिला परिषद (Zila Parishad Election) के वार्ड संख्या 39 से भाजपा के टिकट पर नामांकन दाखिल कर दिया था। जबकि,उनकी पत्नी कनिका सिंह ने वार्ड 23 से भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया है। गुरुवार को सुबह पार्टी मीटिंग में उनके टिकट को होल्ड पर रख लिया था। राजेंद्र राठौड़ इससे नाराज भी हो गए थे और उन्होंने मीटिंग में खरी-खोटी भी सुना दी थी। हालांकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दखल देने से मामला शांत हो गया था। लेकिन पराक्रम को पार्टी सिंबल देने पर शाम तक फैसला हुआ और अंतत: उन्हें सिंबल दे दिया गया। अब राजेंद्र राठौड़ के पुत्र और पुत्रवधु दोनों चूरु जिला परिषद का चुनाव लड़ रहे हैं।
राजेंद्र राठौड़ राजस्थान विधानसभा में सात बार विधायक चुने गए हैं और भाजपा के सीनियर नेताओं में से हैं। वह राजस्थान विधानसभा में उप-नेता प्रतिपक्ष और नेता प्रतिपक्ष और मंत्री रहे हैं। राजनीतिक मुद्दे हों या विधानसभा के नियम कायदों की बात हो,राठौड़ ने सत्ता और विपक्ष में रहते हुए अपनी प्रतिभा का बेबाक परिचय दिया है।
2023 में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम रहा है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हें न तो लोकसभा चुनाव में और न ही राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया। राजस्थान में भाजपा सरकार का आधा कार्यकाल खत्म होने के बावजूद उन्हें अब तक कोई बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी भी नहीं दी गई है।
पराक्रम सिंह ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद से पार्टी के निर्देश पर नाम वापिस लिया था। ऐसे में जिला परिषद चुनाव में उन्हें टिकट देने में संशय से निश्चित तौर पर राजेंद्र राठौड़ की राजनीतिक हैसियत पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।
पराक्रम राठौड़ ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर ज्यादा में थे। वह अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते थे और अपने साथ 33 जिला संघों के समर्थन का दावा कर रहे थे। लेकिन,बाद में उन्होंने पार्टी के निर्देश पर अपना नाम वापिस ले लिया था।
अपने बेटे के टिकट को लेकर पार्टी में संशय की स्थित होने व इससे नाराजगी व्यक्त करने पर राठौड़ (rajendra rathore) का कहना था कि वह पार्टी लाइन क्रॉस करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। राठौड़ अब हर हाल में अपनी पुत्रवधू चुनाव जितवाकर जिला प्रमुख बनाने की कोशिश करेंगे।
कर चुके थे नामांकन
राजेंद्र राठौड़ की राजनीतिक स्थिति पर सवाल
2023 में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम रहा है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हें न तो लोकसभा चुनाव में और न ही राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया। राजस्थान में भाजपा सरकार का आधा कार्यकाल खत्म होने के बावजूद उन्हें अब तक कोई बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी भी नहीं दी गई है।
पराक्रम सिंह ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद से पार्टी के निर्देश पर नाम वापिस लिया था। ऐसे में जिला परिषद चुनाव में उन्हें टिकट देने में संशय से निश्चित तौर पर राजेंद्र राठौड़ की राजनीतिक हैसियत पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।
आरसीए चुनाव में 33 जिला संघ के समर्थन का था दावा
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