बाड़मेर की बहू अब बनेगी गुजरात में जज, ससुराल में घूंघट में रहकर की तैयारी, एक कमरे को बनाया रीडिंग रूम
Ashish Bhardwaj | Mar 15, 2026, 12:27 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के बाड़मेर की दीपू कंवर बहू ने गुजरात न्यायिक सेवा में 79वीं रैंक हासिल कर जज बनने का सपना पूरा किया। शादी के सात साल बाद और एक बच्चे की माँ होते हुए, उन्होंने तीसरे प्रयास में सफलता पाई।
News In Short
- राजस्थान में बाड़मेर की बहू ने गुजरात में बनेगी जज।
- दो बार असफल रहीं, तीसरे प्रयास में मिली कामयाबी।
- घूंघट में रहकर की तैयारी, नहीं बना कामयाबी में बाधा।
- ससुराल में तैयारी के लिए एक कमरे को दी हॉस्टल की शक्ल।
- दीपू कंवर ने सफलता का श्रेय ससुराल वालों को दिया।
News In Detail
ससुराल का एक कमरा बना 'हॉस्टल'
उन्होंने अपने ससुराल के ही एक कमरे को 'हॉस्टल' की शक्ल दे दी थी। वहां उन्होंने दुनिया से कटकर दिन-रात अपनी किताबों के बीच गुजारे। दीपू बताती हैं कि तैयारी का यह सफर आसान नहीं था। दो बार असफलता हाथ लगी, लेकिन ससुराल वालों के अटूट विश्वास ने उन्हें टूटने नहीं दिया। तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी मंजिल पा ही ली।
जब ससुर की प्यार भरी डांट बनी ताकत
सफलता के बाद घूंघट में ही रहकर दीपू कहती हैं, ससुरजी के वे शब्द मेरे लिए टॉनिक से कम नहीं थे। इस सफलता में घूंघट कभी बाधा नहीं बना। यह किसी बहू के लिए सम्मान का प्रतीक है।
7 साल का संघर्ष और 79वीं रैंक
अपनी सफलता का श्रेय देते हुए दीपू भावुक होकर कहती हैं कि समाज में माना जाता है कि शादी के बाद ससुराल की जिम्मेदारियों के बीच सपने पीछे छूट जाते हैं। लेकिन मेरे ससुराल वालों ने मुझे जज बनने के लिए प्रेरित किया। अगर परिवार बेटियों और बहुओं के पंखों को उड़ान देने का फैसला कर ले, तो वे किसी भी मुकाम तक पहुँच सकती हैं।
खुशी का ठिकाना नहीं, गांव में जश्न
दीपू की यह कहानी आज उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो शादी के बाद अपने करियर को खत्म मान लेती हैं। बाड़मेर की इस जज बहू ने दिखा दिया है कि यदि ससुर 'पिता' बनकर और ससुराल 'मायका' बनकर साथ खड़ा हो जाए, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है।
मुख्य बिंदु एक नजर में:
उपलब्धि: गुजरात न्यायिक सेवा में चयन (79वीं रैंक)
प्रेरणा: ससुर थानसिंह और पति लोकेंद्र सिंह का सहयोग
संघर्ष: शादी के 7 साल बाद और तीसरे प्रयास में सफलता
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