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Photograph: (the sootr)
News in Short
- बीकानेर में चल रहा खेजड़ी बचाओ आंदोलन स्थगित
- नया कानून आने तक खेजड़ी वृक्ष की कटाई पर रहेगी रोक
- राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई ने संतों को सरकार का पत्र सौंपा।
- विधानसभा के इसी सत्र में सख्त कानून लाने की तैयारी
- बीकानेर में दो फरवरी से चल रहा था खेजड़ी बचाओ आंदोलन
News in Detail
​राजस्थान के बीकानेर में 11 दिन से चल रहा खेजड़ी बचाओ आंदोलन फिलहाल स्थगित हो गया। विश्नोई समाज के भारी विरोध के आगे झुकते हुए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदेश में नया कानून आने तक खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
​देर रात पहुंचे सरकार के दूत​
राज्य मंत्री केके विश्नोई सरकार का आधिकारिक पत्र (चिट्ठी) लेकर गुरुवार देर रात धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने संतों और आंदोलनकारियों के बीच शासन सचिव जोगाराम द्वारा जारी पत्र को पढ़कर सुनाया, जिसमें खेजड़ी की कटाई रोकने के पुख्ता निर्देश दिए गए थे।
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...आंदोलन स्थगन की घोषणा​
सरकारी चिट्ठी मिलने के बाद आंदोलन संयोजक राम गोपाल बिश्नोई ने इसे जनता के संघर्ष की बड़ी जीत बताया। सरकार के इस कदम का संतों ने स्वागत किया। उन्होंने फिलहाल अपना महापड़ाव स्थगित करने की घोषणा की।
​ क्यों खास है यह कानून?​
राजस्थान का राज्य वृक्ष पश्चिमी राजस्थान में 'खेजड़ी' केवल एक पेड़ नहीं है, बल्कि यह यहां की सांस्कृतिक और विशिष्ट पहचान का हिस्सा है। शासन सचिव द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि ​खेजड़ी के प्रति समाज की गहरी भावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार विशेष संरक्षण कानून लाने का निर्णय ले चुकी है। ​मुख्यमंत्री ने विधानसभा के इसी सत्र में इस नियम को लाने की घोषणा की है। ​जब तक औपचारिक कानून पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक पूरे प्रदेश में खेजड़ी की कटाई पर सख्त रोक रहेगी।
अब दिख रही हलचल
मुख्यमंत्री भजनलाल ने समाज के विभिन्न वर्गों, संतों और प्रमुख व्यक्तियों से चर्चा के बाद इस कानून को जल्द से जल्द विधानसभा में लाने के निर्देश दिए थे। फरवरी माह में ही इसकी प्रारंभिक घोषणा की जा चुकी थी, जिस पर अब अमल होता दिख रहा है।
संतों की यह है चेतावनी
हालांकि आंदोलनकारी संतों ने अपना रुख स्पष्ट रखते हुए कहा है कि कानून बनने की दिशा में सरकार के बढ़ते कदमों को देखकर हमने महापड़ाव स्थगित किया है। यदि कानून सही और प्रभावी बना, तो आंदोलन पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा। लेकिन, यदि कानून के मसौदे में कोई कमी रही या सरकार अपने वादे से पीछे हटी, तो समाज फिर से सड़कों पर उतरने और महापड़ाव डालने से पीछे नहीं हटेगा।
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