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Photograph: (the sootr)
News In Short
राजस्थान के श्रीगंगानगर में टांटिया यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा।
टांटिया यूनिवर्सिटी की नकल करते हुए बनाई गई फर्जी वेबसाइट।
वेबसाइट के जरिए छात्रों से फीस वसूलने और जाली डिग्रियां देने का काम चल रहा था।
पुलिस ने पंजाब के मुक्तसर से मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया।
आरोपी के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन और संदिग्ध डाटा बरामद किया गया है।
News In Detail
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में फर्जी डिग्री का एक नया साइबर फ्रॉड सामने आया है। इसमें टांटिया यूनिवर्सिटी के नाम पर एक फर्जी वेबसाइट बनाई गई थी। इस वेबसाइट के माध्यम से छात्रों से धोखाधड़ी की जा रही थी, जाली डिग्रियां और सर्टिफिकेट तैयार किए जा रहे थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सर्वजीत सिंह उर्फ जॉनी को पंजाब के मुक्तसर से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन और संदिग्ध डिजिटल डाटा बरामद किया गया है।
फर्जी वेबसाइट का संचालन और छात्रों से ठगी
आरोपी ने टांटिया यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट की नकल करते हुए एक फर्जी वेबसाइट बनाई थी। दोनों वेबसाइटों में केवल स्पेलिंग का मामूली अंतर था, जिससे छात्रों को भ्रमित किया जा रहा था। इस वेबसाइट पर प्रवेश परीक्षा, एडमिट कार्ड, परीक्षा परिणाम, मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और डिग्रियों की भ्रामक जानकारी डाली जा रही थी। इसके बदले में आरोपी छात्रों से फीस भी वसूलता था।
फर्जी डिग्रियां और सर्टिफिकेट का कारोबार
टांटिया यूनिवर्सिटी के प्रबंधन की शिकायत पर इस मामले की जांच शुरू की गई थी। यूनिवर्सिटी ने आरोप लगाया कि फर्जी वेबसाइट के माध्यम से छात्रों को जाली डिग्रियां और सर्टिफिकेट दिए जा रहे थे, जिससे न सिर्फ छात्रों को शैक्षिक और आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा पर भी खतरा मंडराया।
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
सदर थाना पुलिस ने इस मामले की जांच की और मुख्य आरोपी सर्वजीत सिंह उर्फ जॉनी को पंजाब के मुक्तसर से गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य संदिग्ध डिजिटल डाटा बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी काफी समय से इस धोखाधड़ी को चला रहा था और अन्य विश्वविद्यालयों से संबंधित डाटा भी उसके पास था।
संगठित गिरोह का संदेह
पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जिसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड लिया जाएगा, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके और ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई जा सके।
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