गहलोत का मुख्यमंत्री पर पलटवार, बोले- परिसीमन से प्रदेश को बर्बाद किया, जनता मौका मिलते ही देगी झटका
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सूखे और अकाल को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में स्थिति गंभीर है। सरकार को गिरदावरी तुरंत पूरी करानी चाहिए। उन्होंने पंचायत चुनाव में परिसीमन पर भी सवाल उठाए। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को माफी मांगने की भी बात कही।
जैसलमेर, फलोदी और जोधपुर के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना होने से पूर्व गहलोत ने आवास पर मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि गांवों में लोग परेशान हैं। बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर सहित कई इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है।
भाषण से नहीं चलेगा काम
चारे का दाम करीब 20 रुपए किलो तक पहुंच गया है। प्रदेश में पेयजल संकट भी लगातार बढ़ रहा है। गहलोत ने सरकार को चेताया कि समय रहते मुख्यमंत्री स्तर पर सूखे की मॉनिटरिंग नहीं की गई तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार को जमीनी हकीकत पता करनी चाहिए। जहां गिरदावरी पूरी नहीं हुई है, वहां इसे तत्काल पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि अकाल आने पर राहत तुरंत नहीं मिलती। इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है।
जैसलमेर रवाना होने से पूर्व निवास पर पत्रकारों से बातचीत।अकाल-सूखे की स्थिति के संदर्भ में :इस बार प्रदेश में जो भयंकर अकाल और सूखा पड़ा है, उसका अंदाजा अभी तक इस सरकार को नहीं है, जिसका मुझे बेहद दुख है। अन्य राज्यों (चाहे वे भाजपा शासित ही क्यों न हों) में मुख्यमंत्रियों ने दौरे शुरू कर दिए हैं और स्टेट लेवल पर पूरी मॉनिटरिंग हो रही है। लेकिन राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां सरकार को गांवों में पड़े भयंकर सूखे का अहसास ही नहीं है। मैं हाल ही में बीकानेर गया था, वहां स्थिति बहुत गंभीर है। जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे क्षेत्रों में भी हालात बेहद चिंताजनक बन चुके हैं। यदि मुख्यमंत्री स्तर पर मॉनिटरिंग कर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो पूरे प्रदेशवासियों को भारी तकलीफ का सामना करना पड़ेगा।आज पशुधन मरने लगा है। कल ही मेरी बात हुई, जैसलमेर में हजारों गायें मर चुकी हैं। चारे का कोई प्रबंधन नहीं है; चारा 20 रुपये किलो तक पहुंच गया है। पूरे उत्तर भारत और विशेषकर राजस्थान में पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है; हमारे बांध खाली पड़े हैं। सरकार के पास सारे आंकड़े मौजूद हैं, उन्हें सब मालूम है कि किस बांध में कितना पानी है। जब पानी ही नहीं है, तो सिंचाई और पीने के पानी की बहुत बड़ी समस्या आने वाली है।मैं बार-बार यह इसलिए बोल रहा हूं ताकि सरकार इसे गंभीरता से ले। केवल लंबी-चौड़ी बातें और भाषण देने से काम नहीं चलेगा। जल्द से जल्द गिरदावरी पूरी करवाकर अकाल राहत कार्य शुरू किए जाएं।मुझे अहसास है कि अकाल और सूखे के समय इतनी जल्दी काम शुरू करना किसी भी सरकार के लिए बड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि गायों के लिए कैंप खोलने पड़ते हैं, चारे-पानी का ट्रांसपोर्टेशन करना होता है और रोजगार देना पड़ता है। लेकिन एक वक्त था जब हमारी सरकार ने 16 अगस्त से ही राहत कार्य शुरू कर दिए थे और लगातार 10-11 महीने तक काम चालू रखा था; गांव वालों को वह आज भी याद है।मैं मानता हूं कि इनके लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा, लेकिन इनकी तो 'डबल इंजन' की सरकार है! तो ये केंद्र से बात क्यों नहीं करते? अपने समय में हम भी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी से इमदाद (मदद) लेकर आए थे। तब मैं 'काम के बदले अनाज' योजना लाया था और अकाल में शानदार प्रबंधन किया था। आज इस सरकार को भी उसी गंभीरता से इस संकट को लेना चाहिए।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) October 18, 2026
केंद्र से मदद क्यों नहीं मांग रही सरकार?
उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सूखे की स्थिति में 16 अगस्त से ही राहत कार्य शुरू कर दिए थे। केंद्र से मदद लेकर गांवों में अकाल राहत के काम करवाए गए थे।
अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते काम के बदले अनाज योजना के जरिए भी राहत पहुंचाई गई थी। उन्होंने सवाल किया कि अब जब राजस्थान में डबल इंजन की सरकार है तो सूखे के लिए केंद्र से मदद क्यों नहीं मांगी जा रही।
परिसीमन पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि घनश्याम तिवाड़ी, अरुण चतुर्वेदी और राजेंद्र राठौड़ ने बैठकर 6 महीने तक वार्डों का परिसीमन किया। कहीं 250 मतदाताओं का वार्ड है। तो कहीं 3,500, 10 हजार, 15 हजार और 20 हजार मतदाताओं वाले वार्ड बनाए गए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि इस तरह लोकतंत्र का मजाक क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन का भी चुनाव में इस्तेमाल किया गया। निकाय चुनाव में पुलिस की गुंडागर्दी देखने को मिली है।
गहलोत ने कहा कि पुलिस के बड़े अधिकारी भी अब कह रहे हैं कि उन्हें सरकार के प्रेशर में काम करना पड़ा। मुख्यमंत्री कार्यालय से लगातार मॉनिटरिंग हो रही थी। मुख्यमंत्री खुद अधिकारियों को बुलाकर धमका रहे थे।
जनता देगी झटका
जनता अभी चुप है। लेकिन मौका मिलते ही ऐसा झटका देगी जिसे भजनलाल सरकार याद रखेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है।
मदन राठौड़ से माफी की मांग
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का नाम आते ही लोगों को पुलवामा और जम्मू-कश्मीर की घटनाएं याद आती हैं। इसलिए इस मुद्दे पर लोगों में स्वाभाविक आक्रोश है।
विदेशी टूलकिट पर पलटवार
तब कई केंद्रीय मंत्री जेल गए थे। लेकिन बाद में सभी निर्दोष साबित हुए। न तो काला धन आया और न ही लोगों के खाते में 15 लाख रुपए आए। गहलोत ने कहा कि उस समय कांग्रेस ने भाजपा के आंदोलनों को विदेशी ताकतों से जोड़कर आरोप नहीं लगाए थे।
आज विपक्ष आंदोलन कर रहा है तो उस पर इस तरह के आरोप लगाना केवल राजनीतिक बयानबाजी है।
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