गहलोत बोले- किसान 2200 रुपए में खरीद रहे खाद, किरोड़ी का जवाब- स्टॉक पूरा, कालाबाजारी पर हो रही कार्रवाई
Mukesh Sharma | Oct 09, 2026, 20:24 IST
गहलोत बोले- किसानों को महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही खाद
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान में किसानों को 1350 रुपए का डीएपी खाद का कट्टा 2100 से 2200 रुपए में खरीदना पड़ रहा है। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खाद की कमी से इनकार किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 दिन का डीएपी स्टॉक मौजूद है। गहलोत ने पुलिस हिरासत में मौतों पर भी सवाल उठाए।
राजस्थान में सरसों की बुवाई के बीच डीएपी खाद को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही। मजबूरी में उन्हें 1350 रुपए का डीएपी कट्टा 2100 से 2200 रुपए में खरीदना पड़ रहा। गहलोत ने इसे लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। वहीं, कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने खाद की कमी से इनकार किया। उनका कहना है कि प्रदेश में पर्याप्त खाद मौजूद है। कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही। खाद के अलावा गहलोत ने पुलिस हिरासत में मौतों और अरावली के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश में इस समय सरसों की बुवाई चल रही है। किसानों को सबसे ज्यादा डीएपी खाद की जरूरत है, लेकिन कई जगह खाद नहीं मिल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को 1350 रुपए का डीएपी कट्टा ब्लैक में 2100 से 2200 रुपए तक में खरीदना पड़ रहा है। सहकारी समितियां खाद की मांग भेज चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिली है।
गहलोत ने कहा कि हालात ऐसे हैं कि सरकार के अपने मंत्री और विधायकों को खाद की कमी का मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने उठाना पड़ा। इसके बाद भी किसानों की परेशानी दूर नहीं हुई।
उन्होंने दावा किया कि सितंबर से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खाद की कमी की शिकायतें आ रही हैं। कुछ जगह किसानों को डीएपी के साथ नैनो डीएपी जैसे दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतें भी मिली हैं।
गहलोत ने सवाल उठाया कि जब किसान को बुवाई के लिए महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है, तो सरकार किस विकास की बात कर रही है? उन्होंने सरकार से तुरंत खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की।
गहलोत के आरोपों पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की पर्याप्त व्यवस्था है। किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
कृषि मंत्री के मुताबिक, खरीफ 2026 के दौरान प्रदेश में 5.10 लाख मीट्रिक टन डीएपी की मांग थी। इसके मुकाबले 5.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई गई। इसी तरह यूरिया की मांग 11 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि 17.15 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया उपलब्ध कराया गया।
किरोड़ी ने बताया कि फिलहाल प्रदेश में 1.05 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.63 लाख मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक है। इसके अलावा करीब 35 हजार मीट्रिक टन डीएपी की खेप रास्ते में है। यह खाद 14 अक्टूबर तक किसानों को उपलब्ध हो जाएगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि मौजूदा खपत के हिसाब से प्रदेश में करीब 18 दिन का डीएपी और 35 दिन का यूरिया उपलब्ध है। केंद्र सरकार से भी लगातार खाद की सप्लाई मिल रही है। ऐसे में किसानों को खाद की कमी को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। हालांकि, गहलोत की ओर से उठाया गया सवाल स्थानीय स्तर पर खाद की उपलब्धता और उसकी बिक्री को लेकर है। वहीं, कृषि मंत्री ने पूरे प्रदेश में मौजूद स्टॉक के आंकड़े दिए हैं।
कृषि मंत्री ने खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी दी। उनके मुताबिक, वर्ष 2026-27 में अब तक 11,770 खाद विक्रेताओं की जांच की गई है। इस दौरान 9,585 नमूने लिए गए। गड़बड़ी मिलने पर 1,238 विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए। वहीं, 64 विक्रेताओं की बिक्री पर रोक लगाई गई। इसके अलावा 128 फर्मों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए हैं। खाद की बिक्री में गड़बड़ी के मामलों में 25 FIR दर्ज हुई हैं और 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। किरोड़ी ने कहा कि खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और दूसरे उत्पाद जबरन बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
खाद के मुद्दे के साथ गहलोत ने राजस्थान में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान में 2024-25 के दौरान पुलिस हिरासत में नौ मौतें हुई थीं। वहीं, 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 18 हो गई।
गहलोत के मुताबिक, एक साल में यह आंकड़ा दोगुना हो गया। उन्होंने दावा किया कि 2025-26 में राजस्थान पुलिस हिरासत में मौतों के मामले में देश में दूसरे नंबर पर रहा। पूर्व मुख्यमंत्री ने जयपुर में एक किशोर की मौत का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि घटना के चार दिन बाद भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई। गहलोत ने मांग की कि संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज हो। उन्हें तुरंत पद से हटाया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
गहलोत ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक किशोर की उम्र जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर 16 साल 9 महीने थी। उन्होंने सवाल उठाया कि नाबालिग होने के बावजूद उसे थाने में क्यों रखा गया। उनका कहना है कि किशोर न्याय कानून के तहत नाबालिगों के मामले में अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। गहलोत ने रिपोर्ट और चश्मदीदों के हवाले से आरोप लगाया कि किशोर के साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने कहा कि किशोर को दूसरे नाम से निजी अस्पताल ले जाने और वहां सांप के काटने की बात कहने के आरोप भी सामने आए हैं। इस आधार पर उसे एंटीवेनम के 10 इंजेक्शन लगाए जाने की बात कही गई है।
गहलोत ने अरावली पहाड़ियों के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अरावली राजस्थान की जीवनरेखा है। इसे बचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की उच्चस्तरीय कमेटी 11 से 13 अक्टूबर के बीच डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर का दौरा करेगी। इस दौरान 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा के टीएडी सभागार में लोगों की राय सुनी जाएगी।
गहलोत ने किसानों, पंचायत प्रतिनिधियों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों से अपील की कि वे कमेटी के सामने अपनी बात जरूर रखें। उन्होंने कहा कि पिछली बार कमेटी के दौरे के दौरान स्थानीय लोगों की बात ठीक से नहीं सुने जाने की शिकायतें आई थीं। उम्मीद है कि इस बार लोगों की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा।
गहलोत ने अरावली की पहाड़ियों के लिए तय की गई 100 मीटर की परिभाषा का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग पहले ही इस पर आपत्ति जता चुके हैं। उनका तर्क है कि इस परिभाषा के कारण राजस्थान की बड़ी संख्या में पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकती हैं। गहलोत ने कहा कि लोगों के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश पर रोक लगाई थी।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह अरावली को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों की चिंताओं को भी गंभीरता से ले। इस तरह राजस्थान में खाद की उपलब्धता को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस के बीच गहलोत ने पुलिस हिरासत में मौतों और अरावली संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खाद के स्टॉक और कार्रवाई के आंकड़े देकर सरकार का पक्ष रखा है।
गहलोत बोले- किसानों को महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही खाद
गहलोत ने कहा कि हालात ऐसे हैं कि सरकार के अपने मंत्री और विधायकों को खाद की कमी का मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने उठाना पड़ा। इसके बाद भी किसानों की परेशानी दूर नहीं हुई।
उन्होंने दावा किया कि सितंबर से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खाद की कमी की शिकायतें आ रही हैं। कुछ जगह किसानों को डीएपी के साथ नैनो डीएपी जैसे दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतें भी मिली हैं।
गहलोत ने सवाल उठाया कि जब किसान को बुवाई के लिए महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है, तो सरकार किस विकास की बात कर रही है? उन्होंने सरकार से तुरंत खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की।
किरोड़ी बोले- प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं
कृषि मंत्री के मुताबिक, खरीफ 2026 के दौरान प्रदेश में 5.10 लाख मीट्रिक टन डीएपी की मांग थी। इसके मुकाबले 5.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई गई। इसी तरह यूरिया की मांग 11 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि 17.15 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया उपलब्ध कराया गया।
किरोड़ी ने बताया कि फिलहाल प्रदेश में 1.05 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.63 लाख मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक है। इसके अलावा करीब 35 हजार मीट्रिक टन डीएपी की खेप रास्ते में है। यह खाद 14 अक्टूबर तक किसानों को उपलब्ध हो जाएगी।
प्रदेश में 18 दिन का डीएपी स्टॉक
कालाबाजारी पर 25 FIR, 11 लोग गिरफ्तार
गहलोत ने पुलिस हिरासत में मौतों पर उठाए सवाल
गहलोत के मुताबिक, एक साल में यह आंकड़ा दोगुना हो गया। उन्होंने दावा किया कि 2025-26 में राजस्थान पुलिस हिरासत में मौतों के मामले में देश में दूसरे नंबर पर रहा। पूर्व मुख्यमंत्री ने जयपुर में एक किशोर की मौत का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि घटना के चार दिन बाद भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई। गहलोत ने मांग की कि संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज हो। उन्हें तुरंत पद से हटाया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
किशोर की मौत पर पुलिस की भूमिका पर सवाल
अरावली पर भी गहलोत ने की लोगों से अपील
गहलोत ने किसानों, पंचायत प्रतिनिधियों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों से अपील की कि वे कमेटी के सामने अपनी बात जरूर रखें। उन्होंने कहा कि पिछली बार कमेटी के दौरे के दौरान स्थानीय लोगों की बात ठीक से नहीं सुने जाने की शिकायतें आई थीं। उम्मीद है कि इस बार लोगों की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा।
अरावली की 100 मीटर वाली परिभाषा पर भी सवाल
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह अरावली को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों की चिंताओं को भी गंभीरता से ले। इस तरह राजस्थान में खाद की उपलब्धता को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस के बीच गहलोत ने पुलिस हिरासत में मौतों और अरावली संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खाद के स्टॉक और कार्रवाई के आंकड़े देकर सरकार का पक्ष रखा है।
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