मुहाना थाने में ऋतुराज की मौत: बिना FIR के पुलिस पर टॉर्चर का आरोप, जांच में कई सवाल
Ashish Bhardwaj | Oct 07, 2026, 19:28 IST
मुहाना थाने में ऋतुराज की मौत
जयपुर के मुहाना थाना हिरासत में मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। चश्मदीदों ने जयपुर पुलिस टॉर्चर का आरोप लगाया है। डॉक्टर को सीटी स्कैन में दिमाग में अंदरूनी चोट मिली है। हालांकि पुलिस ने टॉर्चर करने से इनकार कर दिया है। मामले की न्यायिक जांच शुरू हो गई है।
जयपुर के मुहाना थाने से जुड़ा 19 वर्षीय ऋतुराज लोहार की मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। ऋतुराज मध्यप्रदेश के मंदसौर का रहने वाला था। 22 सितंबर को उसे एक शिकायत के सिलसिले में थाने लाए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और करीब 13 दिन इलाज के बाद 5 अक्टूबर को मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि थाने में ऋतुराज के साथ मारपीट की गई। उनका दावा है कि उसके सिर को दीवार से टकराया गया और पूछताछ के दौरान उसे बुरी तरह पीटा गया। पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया था।
मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई। भीलवाड़ा निवासी मनोज ने मुहाना थाने में शिकायत दी थी। इसमें मंदसौर निवासी प्रकाश लोहार पर दुबई से सस्ता सोना लाने के नाम पर करीब 22 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया था।
इसी शिकायत के सिलसिले में कुछ लोगों को पुलिस थाने लेकर आई थी। परिजनों और मामले से जुड़े लोगों के अनुसार ऋतुराज को भी दोपहर करीब 12 बजे थाने लाया गया।
करीब साढ़े तीन घंटे बाद उसकी हालत बिगड़ने की बात सामने आई। एक संतरी ने उसे बेसुध हालत में देखा। उसे बाहर लाया गया तो उसने उल्टी की और फिर होश में नहीं आया। इसके बाद पुलिस उसे अस्पताल लेकर गई।
मामले से जुड़े ललित और प्रहलाद ने आरोप लगाया कि थाने में ऋतुराज के साथ मारपीट हुई। उनके मुताबिक पुलिसकर्मियों ने उसे थप्पड़ मारे और बाल खींचे।उनका दावा है कि ऋतुराज को पूछताछ के लिए अलग कमरे में भी ले जाया गया। वहां से लौटने के बाद उसने खुद के साथ मारपीट की बात बताई थी।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है। पुलिस ने साफ कहा है कि ऋतुराज को टॉर्चर नहीं किया गया था।
ऋतुराज को पहले मुहाना के लकी हॉस्पिटल ले जाया गया। अस्पताल संचालक डॉ. अनिल जैन के मुताबिक, उसे करीब 4:15 बजे भर्ती कराया गया था। इसके बाद उसे नारायणा अस्पताल ले जाया गया। 23 सितंबर को उसकी हालत गंभीर होने पर एसएमएस अस्पताल पहुंचाया गया। यहां करीब 13 दिन इलाज चला। 5 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
ऋतुराज के दो CT स्कैन हुए थे। एक नारायणा अस्पताल में और दूसरा एसएमएस अस्पताल में हुआ। दोनों में सिर के अंदर चोट सामने आने की बात रिपोर्टों में बताई गई है।
एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, ऋतुराज के ब्रेन में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी थी। ऐसी चोट कई कारणों से हो सकती है। केवल CT स्कैन से चोट का कारण तय नहीं किया जा सकता।
इस मामले में अस्पताल के रिकॉर्ड भी सवाल खड़े कर रहे हैं। आरोप है कि लकी हॉस्पिटल में ऋतुराज को ‘ऋषिराज’ नाम से भर्ती कराया गया। इसके बाद नारायणा अस्पताल में उसे ‘ऋतु’ नाम से भर्ती कराने की बात सामने आई। परिजनों के अनुसार अस्पताल रिकॉर्ड में पिता का नाम और पता भी सही नहीं था। इन दावों की जांच जरूरी है।
लकी हॉस्पिटल का करीब 2,500 रुपए और नारायणा हॉस्पिटल का करीब 96 हजार रुपए का बिल पुलिस द्वारा दिए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस की अस्पतालों में मौजूदगी को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं।
मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि नारायणा अस्पताल में ऋतुराज को सांप के काटने की बात बताई गई। परिवार का कहना है कि पुलिस ने उन्हें भी काफी समय तक यही बताया। नारायणा अस्पताल में उसे 10 एंटीवेनम इंजेक्शन दिए जाने की बात सामने आई है। परिजनों का दावा है कि शरीर पर सांप के काटने का कोई निशान नहीं था। इस दावे की मेडिकल रिकॉर्ड से जांच होनी बाकी है।
ऋतुराज की मौत के बाद राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने मुहाना थाने की संबंधित अवधि की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवाधिकार से रिपोर्ट भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
अब जांच में सबसे अहम सवाल यही हैं। ऋतुराज को थाने क्यों लाया गया? उसके साथ पूछताछ के दौरान क्या हुआ? उसकी हालत अचानक कैसे बिगड़ी? अस्पताल रिकॉर्ड में नाम अलग क्यों दर्ज हुए?
इन सवालों के जवाब CCTV, पुलिस रिकॉर्ड, अस्पताल के दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिल सकते हैं। फिलहाल पुलिस टॉर्चर के आरोपों से इनकार कर रही है। मौत की असली वजह और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
परिजनों का आरोप है कि थाने में ऋतुराज के साथ मारपीट की गई। उनका दावा है कि उसके सिर को दीवार से टकराया गया और पूछताछ के दौरान उसे बुरी तरह पीटा गया। पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया था।
22 सितंबर को थाने लाया गया
इसी शिकायत के सिलसिले में कुछ लोगों को पुलिस थाने लेकर आई थी। परिजनों और मामले से जुड़े लोगों के अनुसार ऋतुराज को भी दोपहर करीब 12 बजे थाने लाया गया।
करीब साढ़े तीन घंटे बाद उसकी हालत बिगड़ने की बात सामने आई। एक संतरी ने उसे बेसुध हालत में देखा। उसे बाहर लाया गया तो उसने उल्टी की और फिर होश में नहीं आया। इसके बाद पुलिस उसे अस्पताल लेकर गई।
चश्मदीदों ने क्या बताया
CT स्कैन में ब्रेन इंजरी
ऋतुराज के दो CT स्कैन हुए थे। एक नारायणा अस्पताल में और दूसरा एसएमएस अस्पताल में हुआ। दोनों में सिर के अंदर चोट सामने आने की बात रिपोर्टों में बताई गई है।
एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, ऋतुराज के ब्रेन में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी थी। ऐसी चोट कई कारणों से हो सकती है। केवल CT स्कैन से चोट का कारण तय नहीं किया जा सकता।
अस्पताल में अलग नाम से भर्ती
लकी हॉस्पिटल का करीब 2,500 रुपए और नारायणा हॉस्पिटल का करीब 96 हजार रुपए का बिल पुलिस द्वारा दिए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस की अस्पतालों में मौजूदगी को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं।
सांप के काटने की बात क्यों आई सामने
अब CCTV से खुलेगा राज
आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानवाधिकार से रिपोर्ट भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
अब जांच में सबसे अहम सवाल यही हैं। ऋतुराज को थाने क्यों लाया गया? उसके साथ पूछताछ के दौरान क्या हुआ? उसकी हालत अचानक कैसे बिगड़ी? अस्पताल रिकॉर्ड में नाम अलग क्यों दर्ज हुए?
इन सवालों के जवाब CCTV, पुलिस रिकॉर्ड, अस्पताल के दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिल सकते हैं। फिलहाल पुलिस टॉर्चर के आरोपों से इनकार कर रही है। मौत की असली वजह और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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