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Photograph: (the sootr)
News In Short
77 वर्षीय घनश्याम चंद्र उपाध्याय ने कोटा विश्वविद्यालय से दूसरी पीएचडी प्राप्त की।
उनके पास अब तक 19 डिग्रियां हैं, जिनमें संस्कृत में दो पीएचडी शामिल हैं।
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने उन्हें दीक्षांत समारोह में उपाधि दी।
घनश्याम चंद्र का शोध 'दुर्गा सप्तशती' और 'चंडी शतक' पर रहा है।
80,117 विद्यार्थियों को इस समारोह में UG, PG और Ph.D. की डिग्रियां दी गईं।
News In Detail
राजस्थान में कोटा के 77 वर्षीय घनश्याम चंद्र उपाध्याय को दूसरी पीएचडी की उपाधि मिली है। यह उपाधि उन्हे कोटा विश्वविद्यालय ने दी है। उपाध्याय के पास अब 19 डिग्रियां हैं। उनका शोध ‘दुर्गा सप्तशती’ और ‘चंडी शतक’ जैसे संस्कृत ग्रंथों पर था। कोटा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने उन्हें सम्मानित किया। इस समारोह में 80,117 विद्यार्थियों को UG, PG और Ph.D. की डिग्रियां दी गई। 59 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। घनश्याम चंद्र ने अपनी पढ़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है।
77 साल की उम्र में दूसरी पीएचडी
कोटा के 77 वर्षीय घनश्याम चंद्र उपाध्याय ने हाल ही में दूसरी पीएचडी प्राप्त की है। उन्हें यह उपाधि संस्कृत में मिली है, जिसे राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने दी। घनश्याम चंद्र के पास अब तक 19 डिग्रियां हैं। इससे पहले 2014 में उन्होंने अपनी पहली पीएचडी भी संस्कृत में की थी, जिसका विषय 'दुर्गा सप्तशती' था।
दुर्गा सप्तशती पर शोध
घनश्याम चंद्र ने 'दुर्गा सप्तशती' पर गहन अध्ययन किया और इसे पूरा जीवन समर्पित किया। उनका कहना है कि यह ग्रंथ आज भी अधूरा पढ़ा जा रहा है। उन्होंने इसका प्रकाशन किया है और इसे बारह भाषाओं में अनुवादित किया है।
चंडी शतक पर तुलनात्मक अध्ययन
इस बार घनश्याम चंद्र ने अपनी पीएचडी 'चंडी शतक के तुलनात्मक अध्ययन' विषय पर की है। उनका कहना है कि चंडी शतक का प्रचलन अब विलुप्त हो चुका है, लेकिन उन्हें हमेशा से पढ़ाई और शोध में गहरी रुचि रही है। उनका इरादा अपनी पढ़ाई जारी रखने का है।
राज्यपाल का संबोधन
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों को छात्रों के साथ हर दिन चर्चा करनी चाहिए, ताकि बच्चों में जिज्ञासा पैदा हो और वे रिसर्च की ओर बढ़ें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को डिग्री लेने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वे अपने व्यवसाय के साथ-साथ खेती से भी जुड़ें।
80,117 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
इस समारोह में कुल 80,117 विद्यार्थियों को UG, PG और Ph.D. की डिग्रियां दी गईं। इसमें 59 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया, जिनमें 17 छात्र और 42 छात्राएं शामिल हैं। कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने इसे कोटा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक क्षमता का प्रमाण बताया।
पीएचडी डिग्रीधारी घनश्याम चंद्र
77 साल के घनश्याम चंद्र उपाध्याय ने कोटा विश्वविद्यालय से दूसरी पीएचडी हासिल की है। उनके पास अब तक 19 डिग्रियां हैं, और उन्होंने संस्कृत में पीएचडी की है। उनका शोध 'दुर्गा सप्तशती' और 'चंडी शतक' जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों पर रहा है।
राज्यपाल का प्रेरणादायक संबोधन
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने छात्रों को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व और जीवन के हर क्षेत्र में योगदान की बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़ी नई नीति बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बनाई गई है।
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