राजस्थान में सचिन की अनदेखी से नाराज रहा गुर्जर वोटर, एग्जिट पोल में लगा चुका है सीएम गहलोत की कोशिशों का पलीता
Chandresh Sharma | Dec 02, 2023, 24:00 IST
राजस्थान में सचिन की अनदेखी से नाराज रहा गुर्जर वोटर, एग्जिट पोल में लगा चुका है सीएम गहलोत की कोशिशों का पलीता
एग्जिट पोल्स के रुझान यही बयां कर रहे हैं कि राजस्थान में परंपरा ही बाजी मारेगी, सत्ता में BJP काबिज होने जा रही है। कुछ एग्जिट पोल्स कांग्रेस के पक्ष में हैं, उनमें कांग्रेस महज बहुमत के कगार पर है।
JAIPUR. राजस्थान के एग्जिट पोल्स के रुझान यही बयां कर रहे हैं कि राजस्थान में परंपरा ही बाजी मारेगी, यानि सत्ता में बीजेपी काबिज होने जा रही है। राजस्थान में इस मर्तबा 75.45 फीसदी मतदान हुआ था। तमाम एग्जिट पोल जहां बीजेपी की सत्ता में वापसी दिखा रहे हैं, जो कुछ एग्जिट पोल्स कांग्रेस के पक्ष में हैं, उनमें भी कांग्रेस महज बहुमत के कगार पर दिखाई जा रही है। सीएम अशोक गहलोत के इतने प्रयासों के बावजूद सत्ता में वापसी न कर पाने (जैसा एग्जिट पोल के रुझान बता रहे हैं) के पीछे गुर्जर वोटों की नाराजगी को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। गुर्जर वोटर्स की नाराजगी के पीछे सबसे कारण भी यह बताया जा रहा है।
गुटबाजी पड़ गई कांग्रेस को भारी
साल 2018 के चुनावों में गुर्जरों के नेता सचिन पायलट ने वसुंधरा सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी। नतीजतन कांग्रेस 21 सीटों से छलांग लगाकर सीधा 100 सीटों पर जा पहुंची थी। सत्ता की कमान सौंपते वक्त आलाकमान ने सचिन पायलट को दूसरा दर्जा यानि उपमुख्यमंत्री का पद दे दिया था। जिसके चलते सचिन पायलट पूरे 5 साल नाराज ही रहे। जिसका असर गुर्जर वोटर्स पर भी पड़ा। इसके उलट बीजेपी ने दो दशकों से चली आ रही गुटबाजी को पूरी तरह से खत्म करने की पूरी कोशिश की और वह इसमें काफी हद तक सफल भी रही। जो बीजेपी अब तक भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही चलती थी। उसने आमूलचूल परिवर्तन करते हुए बाबा बालकनाथ, दीया कुमारी, राज्यवर्द्धन सिंह राठौर समेत कई दिग्गजों को मैदान में उतारकर बैलेंस कर दिया। 1989 के बाद यह पहली मर्तबा था जब बीजेपी चुनाव मैदान में बगैर सीएम फेस के उतरी।
इन प्रांतों में उलटफेर ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन
राजस्थान में चुनाव के नजरिए से 5 प्रमुख प्रांत हैं। शेखावटी, मारवाड़, मेवाड़, हड़ौती और ढूंढाड़। एग्जिट पोल के रुझान बताते हैं कि शेखावटी, मारवाड़ और मेवाड़ में बीजेपी-कांग्रेस में कांटे का मुकाबला है। जबकि हड़ौती और ढूंढाड़ की जनता ने बीजेपी को फुल सपोर्ट दे दिया है। ढूंढाड़ का इलाका सचिन पायलट का है जहां गुर्जर वोटर्स निर्णायक हैं। यहां की 32 सीटों में से कांग्रेस को पिछली मर्तबा 20 सीटें मिली थीं। एग्जिट पोल्स इस इलाके में बीजेपी को 25 सीटें मिलने का दावा कर रहे हैं।
इसी तरह हड़ौती में भी एग्जिट पोल्स बीजेपी को ज्यादा सीटें जीतता दिखा रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव में यहां कई सीटों पर बीजेपी का फट्टा साफ हो गया था। लेकिन इस चुनाव में बीजेपी ने अपना किला मजबूत कर लिया है। एग्जिट पोल्स कांग्रेस को यहां से काफी कम सीटें की उम्मीद जता रहे हैं।
गुटबाजी पड़ गई कांग्रेस को भारी
साल 2018 के चुनावों में गुर्जरों के नेता सचिन पायलट ने वसुंधरा सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी। नतीजतन कांग्रेस 21 सीटों से छलांग लगाकर सीधा 100 सीटों पर जा पहुंची थी। सत्ता की कमान सौंपते वक्त आलाकमान ने सचिन पायलट को दूसरा दर्जा यानि उपमुख्यमंत्री का पद दे दिया था। जिसके चलते सचिन पायलट पूरे 5 साल नाराज ही रहे। जिसका असर गुर्जर वोटर्स पर भी पड़ा। इसके उलट बीजेपी ने दो दशकों से चली आ रही गुटबाजी को पूरी तरह से खत्म करने की पूरी कोशिश की और वह इसमें काफी हद तक सफल भी रही। जो बीजेपी अब तक भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे के नेतृत्व में ही चलती थी। उसने आमूलचूल परिवर्तन करते हुए बाबा बालकनाथ, दीया कुमारी, राज्यवर्द्धन सिंह राठौर समेत कई दिग्गजों को मैदान में उतारकर बैलेंस कर दिया। 1989 के बाद यह पहली मर्तबा था जब बीजेपी चुनाव मैदान में बगैर सीएम फेस के उतरी।
इन प्रांतों में उलटफेर ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन
राजस्थान में चुनाव के नजरिए से 5 प्रमुख प्रांत हैं। शेखावटी, मारवाड़, मेवाड़, हड़ौती और ढूंढाड़। एग्जिट पोल के रुझान बताते हैं कि शेखावटी, मारवाड़ और मेवाड़ में बीजेपी-कांग्रेस में कांटे का मुकाबला है। जबकि हड़ौती और ढूंढाड़ की जनता ने बीजेपी को फुल सपोर्ट दे दिया है। ढूंढाड़ का इलाका सचिन पायलट का है जहां गुर्जर वोटर्स निर्णायक हैं। यहां की 32 सीटों में से कांग्रेस को पिछली मर्तबा 20 सीटें मिली थीं। एग्जिट पोल्स इस इलाके में बीजेपी को 25 सीटें मिलने का दावा कर रहे हैं।
इसी तरह हड़ौती में भी एग्जिट पोल्स बीजेपी को ज्यादा सीटें जीतता दिखा रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव में यहां कई सीटों पर बीजेपी का फट्टा साफ हो गया था। लेकिन इस चुनाव में बीजेपी ने अपना किला मजबूत कर लिया है। एग्जिट पोल्स कांग्रेस को यहां से काफी कम सीटें की उम्मीद जता रहे हैं।
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