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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान के शेखावाटी अंचल में शनिवार सुबह 6:33 बजे भूकंप के झटके किए गए महसूस।
- सीकर और आसपास के क्षेत्रों में 3.5 की तीव्रता वाला आया भूकंप।
- भूकंप का केंद्र जयपुर से 69 किमी दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में था।
- भूकंप का हाइपोसेंटर जमीन से 5 किमी नीचे था, जिससे तेज झटके महसूस हुए।
- प्रशासन ने पुराने और जर्जर मकानों का मुआयना कर दिए निर्देश।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के शेखावाटी अंचल में शनिवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सीकर जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों में सुबह-सुबह धरती कंपन करने से लोग दहशत में आ गए और अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस भूकंप से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई।
​सुबह 6:33 बजे महसूस हुए झटके
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के अनुसार शनिवार को सुबह 6 बजकर 32 मिनट 59 सेकंड पर भूकंप रिकॉर्ड किया गया। जब लोग अपनी सुबह की दिनचर्या शुरू कर रहे थे, तभी अचानक खाटूश्यामजी, पलसाना, धींगपुर और आसपास के गांवों में तेज कंपन महसूस किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घरों की खिड़कियां और दरवाजे बजने लगे और छतों पर रखे सामान में हल्की हलचल देखी गई।
​जयपुर से 69 किमी दूर था केंद्र
इसका केंद्र राजधानी जयपुर से लगभग 69 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में जमीन के भीतर था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 3.5 की तीव्रता का भूकंप मध्यम श्रेणी का माना जाता है, जो झटके तो महसूस कराता है लेकिन आमतौर पर बड़े नुकसान का कारण नहीं बनता।
​सतह के करीब था 'हाइपोसेंटर'
​इस भूकंप की सबसे खास और चिंताजनक बात इसकी गहराई रही। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से महज 5 किलोमीटर नीचे था। ​विशेषज्ञों का कहना है कि जब भूकंप का केंद्र जमीन की सतह के इतना करीब (कम गहराई पर) होता है तो ऊर्जा का प्रभाव सीधे तौर पर ऊपर की बस्तियों पर पड़ता है। यही कारण है कि कम तीव्रता के बावजूद लोगों को काफी तेज झटके महसूस हुए।
क्यों कांप रही है शेखावाटी की धरती
​भू-विशेषज्ञों का मानना है कि शेखावाटी क्षेत्र में बढ़ती भूकंपीय गतिविधियों के पीछे मानवीय हस्तक्षेप बड़ा कारण हो सकता है। अंधाधुंध निर्माण, सुरंग और खनन कार्य के लिए अरावली के पहाड़ों को काटे जाने चट्टानों का संतुलन बिगड़ रहा है। इससे भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों की संभावना बनी रह सकती है। प्रशासन ने शेखावाटी के प्रभावित इलाकों में पटवारियों और स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने और जर्जर मकानों का मुआयना करें, जिससे किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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