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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान के पूर्व मंत्री हेम सिंह भड़ाना का सोमवार को निधन
- भड़ाना भाजपा से दो बार विधायक रहे, मंत्री रहे
- भड़ाना कैंसर से पीड़ित थे। पिछले दिनों हुआ था ब्रेन हेमरेज
- छात्र जीवन से राजनीति में जुड़े रहे, फिर विधायक बने
- जमीनी नेता थे, मुखर कार्य शैली के लिए जाने जाते थे
News In Detail
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में भाजपा से दो बार के विधायक रहे पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का सोमवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने सुबह करीब 7:30 बजे अलवर में अपने निवास पर अंतिम सांसें ली। वे कैंसर से पीड़ित थे। पिछले दिनों उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया था। वे गुड़गांव में काफी दिन एडमिट रहे थे। उनके परिवार में दो दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
मुखर शौली की थी पहचान
करीब 60 वर्षीय हेम सिंह भड़ाना अलवर जिले के थानागाजी से 13 वीं और 14 वीं विधानसभा के सदस्य रहे। वह सरकार में खाद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री और मुद्रण एवं लेखन सामग्री,मोटर गैराज मंत्री भी रहे। उन्हें मुखर कार्य शैली के लिए जाना जाता था। वे मूलतः किशनगढ़बास के पास भगेरी कला के रहने वाले थे। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में ही होगा।
अस्पताल ले जाने से पहले ही मौत
हरीश हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर हरीश गुप्ता ने बताया कि सुबह 7:00 बजे भड़ाना को हॉस्पिटल लेकर आए थे। इमरजेंसी में इनको लेकर गए तो उस वक्त उनकी डेथ हो चुकी थी। वह कैंसर से पीड़ित थे। पिछले दिनों ब्रेन हेमरेज हो गया था। भड़ना के निधन के बाद अलवर और खैरथल में सोमवार को भाजपा के होने वाले सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए।
छात्र जीवन से जुड़े रहे राजनीति से
हेमसिंह भड़ाना ने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की। पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति से जुड़े रहे। वर्ष 1991 से लेकर 1992 तक राजकीय कला एवं विधि महाविद्यालय अलवर छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। फरवरी 2005 को पंचायत समिति किशनगढ़ बास के प्रधान बने।
वर्ष 2008 में थानागाजी से पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद 2013 से 2018 तक 14वीं विधानसभा के सदस्य रहे। उन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का स्वतंत्र प्रभार का राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद 2016 में मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान इन्हें मुद्रण एवं लेखन सामग्री एवं स्टेट मोटर गैराज और संपदा विभाग दिया गया।
संगठन में मजबूत पकड़
भड़ाना की गुर्जर समाज में गहरी पैठ थी। उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता था, जो कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे। वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था। लेकिन, वे पराजित हो गए।
निधन पर शोक संवेदना
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भड़ाना के निधन पर शोक संवदेना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अलवर ने एक जुझारू नेता खो दिया है।
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