/sootr/media/media_files/2026/01/16/senchuri-2026-01-16-17-33-01.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
- जयपुर की जलमहल झील के नाले पर जेडीए ने दे दिया पट्टा
- नाला पाटकर खड़ी कर दी प्राइवेट म्यूजियम इमारत
- शिकायत पर जेडीए ने पट्टे को माना गलत, फिर भी कार्रवाई नहीं
- मामला एनजीटी में पहुंचा तो उसने छह सप्ताह में मांगा जवाब
- यह नाला नाहरगढ़ सेंचुरी का हिस्सा, निर्माण गतिविधियों पर है रोक
News In Detail
राजस्थान में जयपुर की नाहरगढ़ सेंचुरी में जलमहल झील के कैचमेंट एरिया में नाले पर अतिक्रमण कर बनाए संजय म्यूजियम का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहुंच गया है। गंभीर बात यह है कि म्यूजियम बनाने के लिए जेडीए ने गैर कानूनी रूप से पट्टा भी जारी कर दिया। हालांकि, बाद में जेडीए ने म्यूजियम निर्माण को अतिक्रमण के दायरे में माना। लेकिन, अतिक्रमण बरकार रहा। म्यूजियम इमारत बनने से नाले के जरिए नाहरगढ़ की पहाड़ियों से जलमहल में आने वाला पानी बंद हो गया।
एनजीटी ने छह सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
एनजीटी की सेंट्रल जोन भोपाल बैंच ने नाले की जमीन पर पट्टा देने व उस पर पक्का निर्माण किए जाने पर केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही जेडीए व अन्य से 6 सप्ताह में जवाब तलब किया है। इसके साथ ही एनजीटी ने जयपुर कलेक्टर के साथ डीएफओ और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों की कमेटी बनाकर मौके की जांच करके एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
जेडीए ने नाले पर दिया पट्टा
शिकायतकर्ता राजेंद्र तिवाड़ी का कहना है कि नाहरगढ़ सेंचुरी नाहरगढ़ व जयपुर तहसील में है। इसके खसरा नंबर 133 में नाला है। नाहरगढ़ पहाड़ी से आने वाला बरसाती पानी इसके जरिए जलमहल झील में जाता है। जेडीए ने गैर—मुमकिन नाले के खसरा नंबर 133 व 136 संजय म्यूजियम को आवंटन करके पट्टा जारी कर दिया। इसके आधार पर म्यूजियम संचालक संजय शर्मा ने नाले की जमीन में भराव करके विशाल व्यावसायिक निर्माण कर दिया है। इससे अब जलमहल को मिलने वाला बरसाती पानी अब बंद हो गया है। इस तरह की गतिविधियां पर्यावरणीय नियम तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम—1972 का खुला उल्लंघन है।
जेडीए भी मान चुका अतिक्रमण,लेकिन किया कुछ नहीं
इस संबंध में ​शिकायत करने पर जयपुर कलेक्टर और जेडीए ने नाहरगढ़ क्षेत्र का पीटी सर्वे करवाया था। इस सर्वे के बाद जेडीए ने रिपोर्ट में माना है कि खसरा नंबर 133 का 0.2276 हैक्टेयर, खसरा नंबर 136 रकबा 0.5059 तथा खसरा नंबर 212/2 रकबा 0.1897 की किस्म गैर-मुमकिन नाले की है। यह अतिक्रमण के दायरे में आता है। जेडीए ने पट्टा रद्ध करने तथा अतिक्रमण रिपोर्ट देकर संजय म्यूजियम के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने को प्रवर्तन शाखा को लिखा हुआ है। इसके बावजूद आज तक इस निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सेंचुरी में निर्माण व भू-परिवर्तन नहीं हो सकता
एनजीटी ने नोटिस जारी करते हुए कहा है कि पहले हेमराज मीणा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में यह निर्णय हो चुका है कि अभ्यारण्य क्षेत्र में किसी प्रकार का नया निर्माण या भू-उपयोग परिवर्तन नहीं हो सकता। इसके बावजूद जेडीए ने वन विभाग की अनुमति के बगैर सभी नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए संजय म्यूजियम को गैर-मुमकिन नाले की जमीन पर गैर-कानूनी रूप से पट्टा दे दिया। म्यूजियम ने इस जमीन पर निमार्ण करके वर्षा जल के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र को रोक दिया है। यह राजस्थान हाई कोर्ट के अब्दुल रहमान मामले में दिए फैसले के विपरीत है।
यह है अब्दुल रहमान का फैसला
राजस्थान हाई कोर्ट ने अब्दुल रहमान के मामले में 2 अगस्त 2004 को आदेश पारित किया था। हाई कोर्ट के आदेश पर एक एक्सपर्ट कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने प्रदेश के जल स्रोतों व जलागम क्षेत्रों की स्थिति व उसमें सुधार के लिए सुझाव मांगे थे। कमेटी ने रिपोर्ट में जलागम क्षेत्र के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण को हटाने व इनमें बरसाती पानी की आवक के लिए 15 अगस्त 1947 की स्थिति बहाल करने का सुझाव दिए थे।
1947 की स्थिति बहाल करने के भी निर्देश
इस रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने राजस्थान सरकार को जलागम क्षेत्रों को उनके 15 अगस्त,1947 के मूल स्वरूप में स्थापित करने को कहा था। अदालत ने इस आदेश में कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमणों को हटाने के लिए पुख्ता कदम उठाने को भी कहा था।
हालात जस के तस ही रहे
इसके बाद सरकारी तंत्र सक्रिय हुआ। प्रदेश के सभी जिलों के नदी, तालाबों, नालों समेत प्रमुख जल स्रोतों की सुध ली गई। इनके कैचमेंट एरिया का रिकॉर्ड खंगाला गया। कैचमेंट एरिया में आने वाली जमीनों के खातेदार व निर्माण करने वालों को नोटिस जारी हुए। जमीनें सरकारी खाते में दर्ज करने के लिए लगभग आठ हजार से ज्यादा मुकदमे रेफरेंस भी राजस्व मंडल में दायर हुए, लेकिन हालात जस के तस ही रहे।
खबरें यह भी पढ़िए..
एमपी, सीजी और राजस्थान में शीतलहर से बढ़ी सर्दी, ठंड और कोहरे का अलर्ट जारी
खनन से अरावली हो रही खोखली, पूर्वी राजस्थान के रेगिस्तान बनने का खतरा, रिपोर्ट में खुलासा
राजस्थान रोडवेज की बसों में सात दिन करें निःशुल्क यात्रा, परिवहन निगम का बड़ा ऐलान
राजस्थान में कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा भ्रष्टाचार, कई नेताओं या उनके परिवार पर उठी अंगुली
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us