रेगिस्तान में अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 9 को , इस बार शिकारी पक्षी के भी होंगे दीदार

राजस्थान के बीकानेर में 9 से 11 जनवरी तक आयोजित होगा अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव। इस बार कई नए आकर्षणों के साथ होगा आयोजित। इसमें बर्ड फेस्टिवल, ऊंट सज्जा और फर्र कटिंग जैसे कार्यक्रमों का होगा आयोजन।

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

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Bikaner. राजस्थान के बीकानेर में नए साल में शुभारम्भ में अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई है। 9 से 11 जनवरी तक रेगिस्तान के धोरों में कई कार्यक्रम होंगे। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ के अनुसार इस बार वन विभाग के सहयोग से 10 जनवरी को बर्ड फेस्टिवल का भी आयोजन किया जाएगा। इस फेस्टिवल में जुड़बीड़ और लव कुश वाटिका में बर्ड वॉचिंग और नेचर वॉक जैसे कार्यक्रम भी होंगे। 

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शिकारी पक्षी के भी दीदार 

बीकानेर में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव में पहली बार शिकारी पक्षी गिद्ध सहित कई अन्य जीवों को देखने का पर्यटकों के लिए विशेष इंतजाम किया है। पर्यटन विभाग ने इस बार वन विभाग के साथ भी इस उत्सव में नए रौमांच का विदेशी मेहमानों के लिए खास आयोजन किया है।

 रेगिस्तान में अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 9 को

9 जनवरी से शुरू होने वाला यह तीन दिवसीय उत्सव बीकानेर की सांस्कृतिक धरोहर को प्रकट करने का बेहतरीन अवसर होगा। इस दौरान, "हमारी विरासत" कार्यक्रम के तहत हेरिटेज वॉक का आयोजन भी किया जाएगा।
इसके अलावा, बीकानेरी फूड फेस्टिवल कला प्रदर्शनी और मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण शो जैसी आकर्षक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन सभी कार्यक्रमों से उत्सव का माहौल और भी रंगीन और जीवंत हो जाएगा।

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फर्र कटिंग कला और ऊंटों का श्रृंगार 

ऊंट उत्सव के दौरान ऊंटों का अद्भुत करतब और डांस देखने के लिए सैलानी बड़ी संख्या में बीकानेर आते हैं। फर्र कटिंग कला और ऊंटों का श्रृंगार इस उत्सव के खास आकर्षणों में शामिल हैं। राजस्थानी मांडने और संस्कृति को ऊंटों के शरीर पर बारीकी से बाल काटकर उकेरा जाता है। इसके लिए कई ऊंट पालक उत्सव के दौरान अपने ऊंटों को सुंदर बनाने के लिए पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। हालांकि, यह कला अब धीरे-धीरे कम होती जा रही है, क्योंकि इस कला को करने वाले कारीगर अब मुश्किल से मिलते हैं।

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ऊंट उत्सव 2026 के प्रमुख आकर्षण 

  •  10 जनवरी को वन विभाग के सहयोग से बर्ड फेस्टिवल का होगा आयोजन।
  • ऊंटों पर राजस्थानी मांडने और फर्र कटिंग की अनूठी कला का भी होगा आयोजन।
  • स्थानीय लोग बताते है कि ऊंट सज्जा प्रतियोगिता में 50 हजार रुपये तक ऊंटों के श्रृंगार में खर्च होते हैं। 
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव में देशी के साथ विदेशों से भी लोग इस कला में भाग लेने के लिए आते हैं।
  • मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण शो: सुंदरता और कला से जुड़ी आकर्षक प्रतियोगिताएं।

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विदेशी महिला का उत्सव में हिस्सा लेना  

फर्र कटिंग कला इतनी अद्भुत है कि हर साल एक विदेशी महिला मेगुमी जापान से केवल इस कला में हिस्सा लेने के लिए बीकानेर आती है। जानकारों के अनुसार मेगुमी कई दिनों पहले बीकानेर पहुंचकर इस कला में हिस्सा लेती है।
हालांकि इस बार वह बीकानेर नहीं आई हैं। फिर भी यह कला न केवल राजस्थान की विरासत को जीवित रखती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।

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ऊंटों के श्रृंगार पर खर्चा 

कैमल फेस्टिवल के दौरान ऊंट सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसमें ऊंटों को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस श्रृंगार में गोरबंद, पीतल पिलाण, चांदी का गिरबान, घुंघरू और नेवरी जैसी वस्तुओं से सजाया जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इन सजावटों में 50,000 रुपये से भी अधिक खर्च हो जाते हैं, ताकि ऊंट सबसे सुंदर दिखे और प्रतियोगिता जीत सके।

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ऊंट उत्सव में कम हो रहे प्रतिभागी 

बीकानेर के अक्कासर गांव के स्थानीय लोग बताते हैं कि जब से ऊंट उत्सव की शुरुआत हुई थी, तब से वे इस उत्सव में हिस्सा ले रहे हैं। पहले 10 से 12 ऊंट पालक इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 5-6 रह गई है।
उन्हें लगता है कि यह कला काफी कठिन है और इसमें बहुत मेहनत लगती है, जिससे अब कम लोग ही इसमें हिस्सा लेते हैं।

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मुख्य बिंदू:

  • इस साल बीकानेर अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव में बर्ड फेस्टिवल, ऊंट सज्जा प्रतियोगिता, फर्र कटिंग कला और मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण शो जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। 
  • हर साल एक विदेशी महिला मेगुमी जापान से फर्र कटिंग कला में हिस्सा लेने के लिए बीकानेर आती है।
  • ऊंटों को सजाने में 50 हजार रुपये तक खर्च हो जाते है। इसमें गोरबंद, पीतल पिलाण और चांदी का गिरबान जैसी वस्तुओं से सजाया जाता है। 
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