अवैध निर्माण पर कोर्ट में चले जाते हैं लोग, जेडीए के सामने बड़ी चुनौती, जानें पूरा मामला

राजस्थान के जयपुर में अवैध निर्माण पर लोग जेडीए की कार्यवाई से बचने के लिए कोर्ट में चले जाते हैं। कोर्ट में इस तरह के 10 हजार से अधिक मामलों में पेंडिंग चल रहे है। निर्माणकर्ता कोर्ट से राहत न मिलने पर खुद निर्माण हटाने का हलफनामा पेश करते हैं।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short 

  • जयपुर में अवैध निर्माणकर्ताओं ने जेडीए की कार्रवाई से बचने के लिए कोर्ट का सहारा लिया है।
  • जेडीए के 10,000 से अधिक अवैध निर्माण मामलों में पेंडेंसी बढ़ रही है।
  • जय जवान कॉलोनी में एक निर्माणकर्ता ने कोर्ट में राहत पाने के बाद 6 महीने में निर्माण हटाने का हलफनामा दिया।
  • जेडीए प्रवर्तन शाखा 7 दिन में अवैध निर्माण हटाने का नोटिस देती है, लेकिन कोर्ट में मामला लंबा खींच जाता है।
  • जेडीए अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के हस्तक्षेप से अवैध निर्माण हटाने में देरी हो रही है।

News In Detail 

जयपुर शहर में अवैध निर्माणकर्ताओं द्वारा जेडीए की कार्रवाई से बचने के लिए कोर्ट का सहारा लिया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप, जेडीए के 10 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण से जुड़े मामले ट्रिब्यूनल में लंबित चल रहे हैं। इन मामलों में जेडीए ने अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस भेजे हैं। लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप के कारण यह मामले लटक रहे हैं।

कोर्ट के हस्तक्षेप से पेंडेंसी बढ़ी

जेडीए ने सरकारी जमीनों और अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। लेकिन कई निर्माणकर्ता जेडीए के नोटिस के बाद कोर्ट में जाकर मामले को लंबा खींचने का तरीका अपनाते हैं। कोर्ट में महीनों तक मामला चलता रहता है। और जब उन्हें राहत नहीं मिलती, तो वे 6 महीने में अवैध निर्माण हटाने का हलफनामा दे देते हैं। इस प्रक्रिया से ट्रिब्यूनल में मामलों की पेंडेंसी बढ़ती जा रही है, जो जेडीए के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।

जय जवान कॉलोनी का मामला

जय जवान कॉलोनी में ऐसा ही एक मामला सामने आया, यहां अवैध निर्माण करने वाले ने जेडीए के नोटिस के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई एक साल तक चलती रही, लेकिन अंत में निर्माणकर्ता ने अवैध निर्माण को स्वीकार किया और 6 महीने में उसे हटाने का हलफनामा पेश किया। जेडीए द्वारा 15 फरवरी 2025 को जारी किए गए नोटिस के बाद, यह स्पष्ट हुआ कि निर्माणकर्ता ने केवल सेटबैक क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं किया, बल्कि बिना स्वीकृत मानचित्रों के भी निर्माण किया था।

जेडीए का कार्यवाही का तरीका

जेडीए प्रवर्तन शाखा अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी करती है और 7 दिन में उसे हटाने का समय देती है। यदि निर्माणकर्ता कोर्ट का सहारा लेते हैं और राहत नहीं मिलती, तो वे अंततः 6 महीने में अवैध निर्माण हटाने का हलफनामा दे देते हैं। जेडीए प्रवर्तन शाखा के अधिकारी राहुल कोटोकी ने कहा कि इस प्रक्रिया के कारण अवैध निर्माण हटाने में देरी हो रही है और पेंडेंसी बढ़ रही है।

जेडीए की कार्रवाई की सख्त जरूरत

राज्य के अधिकारियों का कहना है कि यदि कोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई एकजुट नहीं होती, तो अवैध निर्माणकर्ताओं का मनोबल बढ़ सकता है। जेडीए को अपने तरीके से इस मुद्दे का समाधान निकालने की आवश्यकता है ताकि अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

जेडीए की कार्यवाई एक नजर की 

अवैध निर्माण को लेकर जेडीए अवैध निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी करती है और उन्हें 7 दिन के भीतर निर्माण हटाने का समय देती है। अगर निर्माणकर्ता कोर्ट का सहारा लेते हैं, तो मामला लंबा खिंचता है। जय जवान कॉलोनी में एक निर्माणकर्ता ने कोर्ट से राहत प्राप्त करने की कोशिश की, लेकिन अंत में उसने अवैध निर्माण को स्वीकार करते हुए उसे 6 महीने में हटाने का हलफनामा दिया।कोर्ट में मामले लंबित रहने के कारण अवैध निर्माणकर्ताओं को राहत मिलती है, जिससे वे निर्माण हटाने में देरी कर देते हैं और ट्रिब्यूनल में पेंडेंसी बढ़ जाती है।

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