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Photograph: (the sootr)
Jaipur. राजस्थान के जयपुर के आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) में एक बड़े रिश्वत कांड का मामला सामने आया है, जिसमें सीबीआई (CBI) को कई अहम सुराग मिले हैं। इस मामले में सीबीआई ने 25 नवंबर को वकील राजेंद्र सिंह सिसोदिया को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इसके बाद 26 नवंबर को सीबीआई ने ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीतालक्ष्मी को गिरफ्तार किया।
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छापेमारी से मिले महत्वपूर्ण सुराग
सीबीआई की छापेमारी में ज्यूडिशियल मेंबर सीतालक्ष्मी की तलाशी में कई कीमती साड़ियां और गहने मिले, जिनकी खरीदारी कथित तौर पर कैश से की गई थी। ये गहने और साड़ियां उन लोगों ने खरीदी थीं, जो इस कांड से जुड़े थे। इसके अलावा, वकील राजेंद्र सिसोदिया की सर्च में एक डायरी मिली है, जिसमें ITAT अफसरों से किए गए लेन-देन का पुराना हिसाब मौजूद है।
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डायरी में छुपे खतरनाक सबूत
वकील की डायरी में मिले पुराने हिसाब से सीबीआई को यह संकेत मिलते हैं कि इस कांड में कई लोग शामिल थे और यह घोटाला वर्षों से चल रहा था। इसके अलावा, मोबाइल चैट्स भी डिलीट की गई थीं, लेकिन सीबीआई ने उन्हें रिकवर कर लिया है। इन चैट्स से मामले में नया सबूत सामने आया है, जो आरोपियों के खिलाफ मजबूत आधार तैयार कर रहा है।
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सीबीआई की कार्रवाई और पूछताछ
सीबीआई ने गिरफ्तार आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ के लिए 2 दिसंबर तक समय लिया है। सभी आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सुराग सही हैं।
घूसकांड में गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पहला आरोपी वकील राजेंद्र सिसोदिया था, जिसे 5.5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद, सीबीआई ने ज्यूडिशियल मेंबर सीतालक्ष्मी को गिरफ्तार किया और उनकी सरकारी कार से 30 लाख रुपए नकद बरामद किए। तीसरा आरोपी मुज्जम्मिल है, जो अपीलकर्ता था और जिसने रिश्वत की डील सेट की थी।
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विभाग का नुकसान और गैंग का खुलासा
इस पूरे घोटाले के बारे में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि पिछले तीन सालों में 99 फीसदी मामलों में आयकर विभाग को हार का सामना करना पड़ा। कमीशन और रिश्वत के कारण करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी हुई, जिससे देश को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि इस रिश्वत कांड में वकीलों, सीए और प्राइवेट व्यक्तियों का एक बड़ा गिरोह शामिल था।
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छापेमारी और गैंगस्टर सीए का फरार होना
गैंगस्टर सीए के फरार होने की जानकारी मिली है। सीबीआई के छापे की भनक लगते ही वह भाग गया था। ITAT में घोटाले के रिकॉर्ड को जब्त करने के बाद सीबीआई ने इस गिरोह का पर्दाफाश किया। सीबीआई द्वारा की गई यह छापेमारी घूसखोरी के खिलाफ एक मजबूत कदम है।
वकील, ज्यूडिशियल मेंबर और अन्य सरकारी कर्मचारियों के सहयोग से एक बड़ा गिरोह काम कर रहा था। सीबीआई के इस अभियान ने देशभर में घूसखोरी के मामलों में एक नई मिसाल पेश की है।
ITAT रिश्वत कांड के प्रमुख तथ्य
घटना की तारीख : 25 नवंबर, 2025 (वकील की गिरफ्तारी)
गिरफ्तार आरोपी : राजेंद्र सिसोदिया, डॉ. एस. सीतालक्ष्मी, मुज्जम्मिल
बरामद रकम : 30 लाख रुपए (डॉ. सीतालक्ष्मी की सरकारी कार से)
मुख्य आरोप : रिश्वत और कमीशनखोरी
आगे की कार्रवाई : आरोपियों से पूछताछ और क्रॉस वेरिफिकेशन
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