जयपुर में वैश्य समाज से मेयर बनाने की चर्चा तेज, ब्राह्मण-राजपूत भी दौड़ में शामिल
Ashish Bhardwaj | Sept 16, 2026, 16:19 IST
भाजपा में मेयर-डिप्टी मेयर
राजस्थान के जयपुर नगर निगम में बहुमत के बाद भाजपा में मेयर-डिप्टी मेयर पद के लिए दौड़ तेज हो गई। अब सामाजिक समीकरण साधने की कवायद तेज हो गई है। वैश्य समाज से मेयर बनाने की चर्चा सबसे ज्यादा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर नगर निगम में भाजपा को 150 में से 78 सीटें मिली।
- मेयर पद के लिए वैश्य समाज, खासकर जैन समुदाय पर सबसे ज्यादा चर्चा।
- सुनील कोठारी और पुनीत कर्नावट के बीच मेयर पद की मुख्य दावेदारी।
- डिप्टी मेयर के लिए ब्राह्मण, राजपूत और मूल ओबीसी समाज के नाम पर चर्चा।
जयपुर शहर के भाजपा विधायकों ने प्रदेश नेतृत्व से साफ कह दिया है कि मेयर उनकी अपनी विधानसभा सीट से न बनाया जाए। विधायकों का कहना है कि जिस विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का कोई विधायक नहीं है, वहां से मेयर बनाने को प्राथमिकता दी जाए। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायक असल में यह नहीं चाहते कि उनकी ही विधानसभा में कोई संभावित प्रतिद्वंद्वी खड़ा हो जाए।
वैश्य समाज पर क्यों टिकी है नजर
इसी सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पार्टी इस बार वैश्य समाज, खासतौर पर जैन समुदाय से मेयर बनाने पर विचार कर रही है। विधायकों की राय, पार्षदों से हुई रायशुमारी, वरिष्ठता और वित्तीय स्थिति को देखते हुए पार्टी की पहली पसंद इस पद के लिए सुनील कोठारी बताए जा रहे हैं।
कोठारी बनाम कर्नावट की टक्कर
ब्राह्मण चेहरे पर हो सकता है डिप्टी मेयर का दांव
सिर्फ 2009 में पंकज जोशी करीब 5 महीने के लिए मेयर रहे थे, जबकि पवन शर्मा और घनश्याम शर्मा कार्यवाहक मेयर की भूमिका में रहे। इसी वजह से पार्टी मेयर पद भले वैश्य समाज को दे, लेकिन अपने कोर वोट बैंक को साधने के लिए डिप्टी मेयर ब्राह्मण समाज से बना सकती है।
शैलेन्द्र भार्गव सबसे मजबूत दावेदार
अगर पार्टी किसी युवा चेहरे पर दांव लगाना चाहे, तो सीएम के ओएसडी आनंद शर्मा की पत्नी प्रतिभा शर्मा और सिविल लाइन विधानसभा क्षेत्र के वार्ड से जीते पार्षद शशि प्रकाश शर्मा के नामों पर भी चर्चा चल रही है।
राजपूत और कुमावत समाज भी दौड़ में शामिल
इसके अलावा मूल ओबीसी वर्ग में माली और कुमावत समाज से भी किसी को डिप्टी मेयर बनाने की संभावना जताई जा रही है। जयपुर में इन दोनों समाजों की अच्छी-खासी संख्या है और यह हमेशा से भाजपा के साथ रहे हैं। पिछली बार मेयर पद ओबीसी के लिए आरक्षित होने पर भी पार्टी ने इन दोनों समाजों की बजाय गुर्जर समाज से मेयर बनाया था, ऐसे में इस बार यह समीकरण डिप्टी मेयर पद पर आजमाया जा सकता है।
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