नगर निगम या वसूली भाई: यूडी टैक्स वसूली के लिए दिया प्राइवेट कंपनी को ठेका, पूरे शहर को 18 साल के एकसाथ थमाए नोटिस
Mukesh Sharma | Jan 21, 2026, 14:58 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान का जयपुर नगर निगम ने यूडी टैक्स वसूली के लिए एक प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया है। यह कंपनी अब 18 साल के बकाया यूडी टैक्स की वसूली के लिए पूरे शहर को नोटिस दे रही है।
News In Short
- जयपुर नगर निगम करा रहा निजी कंपनी के जरिए यूडी टैक्स की गैर-कानूनी वसूली
- कानून के विपरीत 18 साल के यूडी टैक्स के दिए एक साथ वसूली के नोटिस
- बिना बिल दिए जा रहे सीधे डिमांड नोटिस और कुर्की नोटिस
- निजी कंपनी कर रही गैर-कानूनी तरीके से टैक्स का निर्धारण
- नगर निगम की इस कार्रवाई के विरोध में एकजुट हो रहे कारोबारी
News In Detail
वसूली के लिए स्पेरो सॉफ्टेक को ठेका
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भारी-भरकम राशि का नोटिस देखकर चौंके
कानूनी तौर पर ऐसे ले सकते है टैक्स
बिल प्राप्त करने के 15 दिन में टैक्स् जमा नहीं करवाने पर डिमांड नोटिस दिया जाएगा। डिमांड नोटिस देने के 15 दिन में टैक्स जमा नहीं होने पर कुर्की वारंट जारी होता है। कुर्की वारंट जारी करने व प्रोपर्टी अटैच कार्यवाही का अधिकार केवल आयुक्त को ही है।
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तीन साल से पुराने मामले में नहीं होती वसूली
अपनी नाकामी को छिपाता है निगम
सच्चाई यह है कि निगम ना तो हर साल सर्वे करता है और ना ही टैक्स का बिल देता है। बल्कि उसने प्रोपर्टी का सर्वे करने और टैक्स तय करने की जिम्मेदारी भी प्राईवेट कंपनी को दे दी है। जबकि यह गैर-कानूनी है। क्यों कि कानून के तहत प्रोपर्टी का सर्वे करके टैक्स की गणना करने व बिल जारी करने का काम निगम की राजस्व शाखा का है। प्राईवेट कंपनी का काम सिफ बिल के अनुसार टैक्स का पैसा कलेक्ट करके निगम में जमा करवाने का है।
क्या है यूडी टैक्स यानी नगरीय विकास कर
- राजस्थान नगरपालिका अधिनियम- 2009 के तहत राज्य सरकार राज्य की समस्त नगरपालिकाओं, नगर न्यास, नगर परिषद एवं नगर निगमों की परिसीमा में स्थित सम्पत्तियों पर गृहकर को समाप्त कर वित्तीय वर्ष 2007-08 से जो कर लगाया गया है, उसे नगरीय विकास कर कहते है।
- नगरीय विकास कर के दायरे में सभी वे सम्पत्तियां आती हैं, जो नियमों के तहत कर के दायरें में आती है। तथा जिन पर नगरीय विकास कर आवासीय,व्यावसायिक,औद्योगिक एवं संस्थानिक के अनुसार लगाया जाता है।
- सभी सम्पत्तियां नगरीय विकास कर के दायरें में नहीं आती है। राज्य सरकार के नियमानुसार निम्न सम्पत्तियां ही नगरीय विकास कर के दायरें में आती है।
- 300 वर्गगज से अधिक के आवासीय भूखण्ड
- 100 वर्गगज से अधिक के व्यावसायिक भूखण्ड पर या उक्त भूखण्ड पर निर्मित फ्लोर के अनुसार जो 900 वर्गफीट से अधिक हो।
- औद्योगिक भूखण्डों पर 500 वर्गगज से अधिक के भूखण्ड या उक्त भूखण्ड के निर्मित फ्लोर के अनुसार जो 4500 वर्गफीट से अधिक हो (औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन श्रेणी के उद्योग को छोडकर)।
- 100 वर्गगज से अधिक के संस्थानिक भूखण्डों पर भूखण्ड या उक्त भूखण्ड पर निर्मित फ्लोर के अनुसार जो 900 वर्गफीट से अधिक हो।
ऐसे होता है यूडी टैक्स का निर्धारण
- यूडी टैक्स समस्त 300 वर्गगज से अधिक के रिहायशी मकानों और फ्लैट में 1500 वर्गफीट से अधिक निर्मित क्षेत्र होने पर लगता है।
- खाली भूखण्ड पर भी यूडी टैक्स लागू है,लेकिन उक्त भूखण्ड यूडी टैक्स के दायरें में आना चाहिए यानि खाली भूखण्ड 300 एवं व्यावसायिक भूखण्ड 100 वर्गगज से अधिक हो।
- 100 वर्गगज से अधिक या 900 वर्गफीट से अधिक के व्यावसायिक भूखण्डों पर यूडी टैक्स लगता है।
तीन साल से पुराने टैक्स की वसूली नहीं
कानूनी रुप से नगर निगम तीन साल से पुराने टैक्स की वसूली का नोटिस नहीं दे सकता। इसके लिए निगम को भू—राजस्व कानून के तहत कलक्टर के जरिए वसूली करनी होती है। यूडी टैक्स के लिए हर साल ्रपत्येक प्रोपर्टी का सर्वे करके बिल देना जरुरी है। बिल देने के बाद 15 दिन में टैक्स जमा नहीं हो तो डिमांड नोटिस और इसके बाद भी 15 दिन में जमा नहीं होने पर आयुक्त कुर्की का वारंट दे सकता है। लेकिन,बिना बिल दिए सीधे डिमांड नोटिस देना नियम विरुद्ध है। विभूति भूषण शर्मा,एडवोकेट राजस्थान हाई कोर्ट
ना बिल दिया, ना नोटिस दिया
हमको ना तो पहले कभी कोई बिल दिया ना कोई नोटिस दिया और सीधे ही पिछले 18 साल का टैक्स जमा करने का डिमांड नोटिस दिया है। 50—50 गज की कई दुकानों को एक साथ दिखाकर टैक्स मांग रहे हैं। जबकि 100 वर्गगज की दुकान पर कोई टैक्स नहीं है। व्यापारी निगम की मनमानी के खिलाफ आंदोलन करेंगे और जरुरत होने पर अदालत का सहारा लेंगे। विवेक भारद्वाज, अध्यक्ष,चौड़ा रास्ता व्यापार मंडल,जयपुर।
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