JDA ने पुलिस को आवंटित जमीन का पट्टा किया निरस्त, 4.50 करोड़ देकर कराई थी रजिस्ट्री
Ashish Bhardwaj | Oct 10, 2026, 11:34 IST
पुलिस को आवंटित जमीन निरस्त
जेडीए और पुलिस विभाग के बीच जमीन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। जेडीए ने पुलिस कॉरपोरेशन का पट्टा निरस्त कर दिया और अपनी संपत्ति का बोर्ड लगा दिया। पुलिस ने इस जमीन के लिए 4.50 करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन अब यह खर्च बेकार होने की आशंका है। जामडोली थाने की जमीन भी जेडीए द्वारा पहले ही निरस्त कर दी गई थी।
जवाहर सर्किल के पास होटल ललित के पीछे की जमीन को लेकर जेडीए और पुलिस विभाग आमने-सामने आ गए हैं। यह जमीन राजस्थान पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के नए भवन के लिए दी गई थी। जेडीए ने अब इसका पट्टा निरस्त कर दिया है। जबकि कॉरपोरेशन इस जमीन की रजिस्ट्री पर करीब 4.50 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है।
जेडीए ने जमीन पर अपनी संपत्ति का बोर्ड भी लगा दिया है। यानी पुलिस कॉरपोरेशन का पट्टा निरस्त होने के बाद जमीन पर अब जेडीए का दावा है। JDA Jaipur के इस कदम से पुलिस भवन की पूरी योजना अधर में लटक गई है।
पुलिस विभाग को बताया गया है कि पट्टा निरस्त करने का फैसला मुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया गया है। अब इस जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनाने की योजना है। जेडीए के मुताबिक इसमें पुलिस विभाग को जरूरत के अनुसार जगह दी जा सकती है।
राजस्थान पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का दफ्तर अभी पुलिस मुख्यालय की सातवीं मंजिल पर चल रहा है। नए भवन की जरूरत को देखते हुए जेडीए ने यह जमीन चिह्नित की थी।
होटल ललित के पीछे की इस जमीन पर पहले बस्ती बसी हुई थी। जेडीए के लिए यहां से कब्जे हटाना मुश्किल हो रहा था। इसके बाद जमीन पुलिस विभाग को देने का प्रस्ताव आया।
फरवरी 2025 में आवंटन का निर्णय हुआ। मई 2025 में कॉरपोरेशन की तत्कालीन प्रबंध निदेशक बिनिता ठाकुर के नाम लीज होल्ड पट्टा जारी करने के आदेश हुए। इसके बाद जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
जमीन पर बने मकान और दूसरे निर्माण हटाने के लिए कई विभागों ने मिलकर कार्रवाई की। इसमें पुलिस, जेडीए की प्रवर्तन शाखा और दूसरे विभाग शामिल रहे। जनवरी 2026 तक कब्जे हटा दिए गए। वहां रह रहे लोगों को पास की सड़क पर शिफ्ट कराया गया।
जिस जमीन को खाली कराने में खुद जेडीए नाकाम था, वह पुलिस ने खाली करा दी। अब उसी जमीन पर जेडीए का बोर्ड लगा है।
कब्जे हटने के बाद कॉरपोरेशन ने डीएलसी (DLC – District Level Committee) दर पर रजिस्ट्री कराई। इस पर करीब 4.50 करोड़ रुपए खर्च हुए। भवन का नक्शा बनवाने और भूमि पूजन की तैयारी चल रही थी। इसी बीच अचानक पट्टा निरस्त कर दिया गया।
अब 4.50 करोड़ की रजिस्ट्री और चारदीवारी पर हुए खर्च पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने जमीन के लिए भुगतान किया, कब्जे हटवाए और भवन की तैयारी की। तो क्या यह सारा खर्च अब बेकार चला जाएगा? खर्च की भरपाई पर अभी कोई फैसला सामने नहीं आया है।
यह जेडीए पुलिस जमीन विवाद का पहला मामला नहीं है। जामडोली थाना भी अभी किराए के भवन में चल रहा है। जेडीए ने 2025 में थाने के लिए केशव विद्यापीठ के पास करीब 5 हजार वर्ग मीटर जमीन दी थी। मई 2025 में इसका कब्जा पत्र भी दे दिया गया था।
पुलिस वहां निर्माण शुरू करने की तैयारी में थी। लेकिन जुलाई 2026 में यह आवंटन भी निरस्त कर दिया गया। इसके बाद जेडीए ने थाने के लिए सुमेल में करीब 2 हजार वर्ग मीटर जमीन देने का फैसला किया। यानी थाने को पहले से 60 प्रतिशत कम जमीन मिलेगी।
अगर आप सोच रहे हैं कि पुलिस को भवन की जरूरत है, तो जमीन बार-बार क्यों बदली जा रही है? यही सवाल अब दोनों विभागों के बीच खिंचाव की वजह बना हुआ है।
जेडीए का कहना है कि उस जगह की प्लानिंग बदल दी गई है। वहां जेडीए बहुमंजिला इमारत बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इसके लिए वित्त विभाग से बजट मिलने की बात कही गई है।
जेडीए के मुताबिक जरूरत होने पर Rajasthan Police को इसी इमारत में जगह दी जा सकती है। भविष्य में दूसरे विभागों के लिए भी ऐसी योजना पर काम करने की बात कही गई है। लेकिन रजिस्ट्री, कब्जे हटाने और चारदीवारी के खर्च का समायोजन कैसे होगा, यह अभी साफ नहीं है।
पट्टा निरस्त, लगा जेडीए का बोर्ड
मुख्यमंत्री के निर्देश पर फैसला
पुलिस मुख्यालय की सातवीं मंजिल पर दफ्तर
कैसे मिली थी जमीन
फरवरी 2025 में आवंटन का निर्णय हुआ। मई 2025 में कॉरपोरेशन की तत्कालीन प्रबंध निदेशक बिनिता ठाकुर के नाम लीज होल्ड पट्टा जारी करने के आदेश हुए। इसके बाद जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
कब्जे हटाने में लगे महीनों
जिस जमीन को खाली कराने में खुद जेडीए नाकाम था, वह पुलिस ने खाली करा दी। अब उसी जमीन पर जेडीए का बोर्ड लगा है।
4.50 करोड़ की रजिस्ट्री का क्या होगा
अब 4.50 करोड़ की रजिस्ट्री और चारदीवारी पर हुए खर्च पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने जमीन के लिए भुगतान किया, कब्जे हटवाए और भवन की तैयारी की। तो क्या यह सारा खर्च अब बेकार चला जाएगा? खर्च की भरपाई पर अभी कोई फैसला सामने नहीं आया है।
जामडोली थाने की जमीन भी गई
5 हजार से 2 हजार वर्ग मीटर
अगर आप सोच रहे हैं कि पुलिस को भवन की जरूरत है, तो जमीन बार-बार क्यों बदली जा रही है? यही सवाल अब दोनों विभागों के बीच खिंचाव की वजह बना हुआ है।
जेडीए बहुमंजिला इमारत की योजना
दूसरे विभागों के लिए भी मॉडल
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