बेटे की शादी में भी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे बाबूलाल कटारा, 6 जमानत अर्जियां खारिज
Mukesh Sharma | Oct 09, 2026, 19:35 IST
पेपर लीक के छह मामलों में बाबूलाल कटारा की अंतरिम जमानत अर्जियां खारिज हुईं।
पेपर लीक केस में जेल में बंद आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा की छह अंतरिम जमानत अर्जियां खारिज हो गई हैं। तीन मामलों में बेटे की शादी में पुलिस कस्टडी में शामिल होने की छूट मिली, लेकिन बाकी तीन मामलों में अनुमति नहीं मिलने से वे जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा अपने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। पेपर लीक से जुड़े छह मामलों में सीबीआई, ईडी और एडीजे कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। हालांकि, तीन मामलों में कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में शादी में शामिल होने की अनुमति दी है। लेकिन बाकी तीन मामलों में यह छूट भी नहीं मिलने से कटारा के जेल से बाहर आने का रास्ता बंद है।
कटारा ने अपने बेटे डॉ. दीपेश कटारा की शादी के लिए 60 दिन की अंतरिम जमानत मांगी थी। शादी 12 दिसंबर 2026 को तय है। उनका कहना था कि पत्नी बीमार है और घर में शादी की तैयारियां संभालने वाला कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है।
जयपुर महानगर प्रथम की सीबीआई और ईडी कोर्ट ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 के पेपर लीक से जुड़े तीन मामलों में कटारा की अंतरिम जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें 9 से 13 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी में बेटे के विवाह समारोह में शामिल होने की अनुमति दी।
इसके लिए दो-दो लाख रुपए की जमानत और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी शर्तें रखी गई हैं। जेल प्रशासन को पुलिस कस्टडी में ले जाने के दौरान सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे।
कटारा को सबसे बड़ा झटका जयपुर महानगर द्वितीय की एडीजे कोर्ट-1 से लगा। एसआई भर्ती 2020, स्कूल लेक्चरार भर्ती 2022 और कृषि व्याख्याता भर्ती परीक्षा से जुड़े तीन मामलों में कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।
इन मामलों में कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में भी शादी में शामिल होने की अनुमति नहीं दी। ऐसे में सीबीआई और ईडी कोर्ट से मिली छूट के बावजूद कटारा फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। अब उन्हें राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख करना पड़ सकता है। जेल से बाहर आने के लिए सभी संबंधित मामलों में जरूरी कानूनी अनुमति मिलना आवश्यक होगा।
कटारा के वकील ने कोर्ट में कहा कि दीपेश उनका इकलौता बेटा है और 12 दिसंबर को उसकी शादी है। विवाह से जुड़ी धार्मिक रस्में निभाना पिता की जिम्मेदारी है।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि कटारा की पत्नी बीमार हैं। ऐसे में शादी की तैयारियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए उन्हें 60 दिन की अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए।
जमानत अर्जियों का विरोध करते हुए एसओजी के विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट भंवर सिंह चौहान ने कोर्ट में कटारा पर गंभीर आरोप लगाए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कटारा ने आरपीएससी सदस्य रहते हुए वरिष्ठ अध्यापक भर्ती 2022 का सामान्य ज्ञान और मनोविज्ञान का पेपर अपने भांजे विजय डामोर के जरिए आरोपी अनिल मीणा उर्फ शेर सिंह को 60 लाख रुपए में बेचा था।
सरकारी वकील ने दलील दी कि कटारा को पहले भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत में राहत नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि कटारा की ओर से आरोप तय करने की बहस आगे नहीं बढ़ाई जा रही है, जिससे ट्रायल में देरी हो रही है।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कहा कि कटारा पहले राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग कर चुके हैं और मानसिक बीमारी का हवाला देकर भी जमानत मांग चुके हैं।
सरकारी वकील ने यह भी दलील दी कि कटारा का बेटा एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है और उसने अपनी सगाई की व्यवस्था खुद की थी। ऐसे में वह शादी की तैयारियां भी संभाल सकता है।
अभियोजन ने कटारा के जमानत पर बाहर आने के बाद फरार होने की आशंका जताई। साथ ही पंचायत चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने की मंशा का आरोप भी लगाया। ये अभियोजन पक्ष की दलीलें हैं, कोर्ट से सिद्ध हुए तथ्य नहीं।
छह अंतरिम जमानत अर्जियां खारिज होने के बाद कटारा के पास उच्च अदालत से राहत मांगने का विकल्प बचा है। तीन मामलों में मिली पुलिस कस्टडी की अनुमति तब तक प्रभावी नहीं हो सकेगी, जब तक अन्य मामलों में भी जेल से बाहर ले जाने के लिए जरूरी कानूनी अनुमति नहीं मिलती।
इस तरह बेटे की शादी में शामिल होने के लिए कटारा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
कटारा ने अपने बेटे डॉ. दीपेश कटारा की शादी के लिए 60 दिन की अंतरिम जमानत मांगी थी। शादी 12 दिसंबर 2026 को तय है। उनका कहना था कि पत्नी बीमार है और घर में शादी की तैयारियां संभालने वाला कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है।
तीन मामलों में 9 से 13 दिसंबर तक शादी में शामिल होने की छूट
इसके लिए दो-दो लाख रुपए की जमानत और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी शर्तें रखी गई हैं। जेल प्रशासन को पुलिस कस्टडी में ले जाने के दौरान सुरक्षा के इंतजाम करने होंगे।
बाकी तीन मामलों में नहीं मिली कोई राहत
इन मामलों में कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में भी शादी में शामिल होने की अनुमति नहीं दी। ऐसे में सीबीआई और ईडी कोर्ट से मिली छूट के बावजूद कटारा फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। अब उन्हें राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख करना पड़ सकता है। जेल से बाहर आने के लिए सभी संबंधित मामलों में जरूरी कानूनी अनुमति मिलना आवश्यक होगा।
पत्नी की बीमारी और बेटे की शादी का दिया हवाला
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि कटारा की पत्नी बीमार हैं। ऐसे में शादी की तैयारियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए उन्हें 60 दिन की अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए।
सरकारी वकील बोले- 60 लाख रुपए में बेचा था पेपर
सरकारी वकील ने दलील दी कि कटारा को पहले भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत में राहत नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि कटारा की ओर से आरोप तय करने की बहस आगे नहीं बढ़ाई जा रही है, जिससे ट्रायल में देरी हो रही है।
जमानत मिलने पर फरार होने की आशंका भी जताई
सरकारी वकील ने यह भी दलील दी कि कटारा का बेटा एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है और उसने अपनी सगाई की व्यवस्था खुद की थी। ऐसे में वह शादी की तैयारियां भी संभाल सकता है।
अभियोजन ने कटारा के जमानत पर बाहर आने के बाद फरार होने की आशंका जताई। साथ ही पंचायत चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने की मंशा का आरोप भी लगाया। ये अभियोजन पक्ष की दलीलें हैं, कोर्ट से सिद्ध हुए तथ्य नहीं।
अब हाईकोर्ट से ही राहत की उम्मीद
इस तरह बेटे की शादी में शामिल होने के लिए कटारा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
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