देश का ऐसा जिला जहां गांव-गांव में मिलते हैं शहीद, कहानी वीर भूमि की

राजस्थान में झुंझुनूं जिले के वीर जवानों ने देश के लिए शहादत दी है। उनकी वीरता, बलिदान और सैन्य परंपरा ने जिले को सम्मान प्रदान किया। जिले के 485 जवान अब तक शहीद हो चुके हैं।

author-image
Ashish Bhardwaj
New Update
Indian-Army-

Photograph: (The sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News In Short 

  • राजस्थान के झुंझुनूं को कहा जाता हैं सैनिकों का जिला।
  • 1971 के युद्ध में शेखावाटी क्षेत्र से  हुए थे 168 सैनिक शहीद, इनमें 108 सैनिक झुंझुनूं जिले से।
  • कारगिल युद्ध में भी झुंझुनूं जिले से हुए थे 22 सैनिक शहीद।
  • सैनिकों को मिल चूका है कीर्ति चक्र, वीर चक्र, शौर्य चक्र, सेना मेडल, नौसेना मेडल, और मेंशन इन डिस्पैच जैसे कई पुरस्कार।
  • अब भी जिले में 24 से अधिक डिफेंस एकेडमी।

News In Detail 

राजस्थान और सेना का बड़ा गहरा नाता है। झुंझुनूं राजस्थान का एक ऐसा जिला है, जहां हर गली, हर मोहल्ले में फौज का फर्ज, हर गांव में शहादत की कहानी सुनने को मिल जाती है। झुंझुनूं जिले के 485 जवान अब तक शहीद हो चुके। सेना के करीब 81 जवानों को वीरता पुरस्कार मिल चुका है।

वीरता पुरस्कारों की सूची

झुंझुनूं जिले के सैनिकों को कई वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। 

  • कीर्ति चक्र: 04
  • वीर चक्र: 23
  • शौर्य चक्र: 10
  • सेना मेडल: 23
  • नौसेना मेडल: 02
  • मेंशन इन डिस्पैच: 14

1971 का युद्ध 

भारत-पाक युद्ध 1971 महज 13 दिन चला, लेकिन इस युद्ध में 3900 जवान शहीद हुए। शेखावाटी क्षेत्र ने इसमें 168 वीर दिए, जिनमें झुंझुनूं के 108, सीकर के 46, और चूरू के 12 जवान शामिल थे। इस युद्ध ने शेखावाटी और खासकर झुंझुनूं जिले को सैन्य गौरव की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

कारगिल युद्ध में शहादत

कारगिल युद्ध के दौरान पूरे देश में 527 जवान शहीद हुए थे, जिनमें झुंझुनूं के 22 सैनिक शहीद हुए थे। यह संख्या देश के किसी भी जिले से सबसे अधिक हैं। अब तक झुंझुनूं जिले से 485 से अधिक सैनिक शहीद हो चुके हैं। इन वीर जवानों की शहादत ने जिले को सैन्य सम्मान प्रदान किया।

हर गांव में मिलते सैनिक 

झुंझुनूं जिले में 65 हजार पूर्व सैनिक और 55 हजार वर्तमान सैनिक हैं। यह संख्या यह दिखाती है कि इस जिले का शायद ही कोई गांव होगा, जहां फौज से नाता न हो। जिले के परमवीर चक्र विजेता हवलदार मेजर पीरू सिंह (मरणोपरांत) इस धरती की सबसे ऊंची पहचान हैं। इसके अलावा, लेफ्टिनेंट कुंदन सिंह, 9 सेनाध्यक्ष एडमिरल विजयसिंह शेखावत, और ब्रिगेडियर आरएस श्योरान जैसे नाम इस जिले की सैन्य परंपरा को नई ऊंचाई देते हैं।

झुंझुनूं को सैनिकों का जिला

झुंझुनूं को सैनिकों का जिला भी कहा जाता है। यह उपाधि केवल शब्द नहीं, बल्कि यहां के हजारों सैनिकों के रक्त और पसीने से अर्जित किया गया गौरव है। शहीदों के बलिदान और वीरता ने जिले को यह प्रतिष्ठा दी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

आज भी तैयार हो रही है फौज

आज भी जिले में 25 हजार युवा तीनों सेनाओं के लिए तैयारी कर रहे हैं। जिले में 24 से अधिक डिफेंस एकेडमियां संचालित हैं, जो युवाओं को सेना में भर्ती के लिए तैयार करती हैं। इसके अलावा सांझी छत हॉस्टल, सैनिक विश्राम गृह, ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक, और कैंटीन जैसी सुविधाएं शहीदों के बच्चों और सैनिकों के परिवारों के लिए संचालित की जा रही हैं।

खबरे ये भी पढ़े:

पहली बार जयपुर में सेना दिवस परेड, जमीन से आसमान तक दिखा शौर्य

हनुमान बेनीवाल का 'जयपुर कूच' रास्ते में रुका, 2000 गाड़ियों के काफिले के साथ आ रहे थे राजधानी

जयपुर में 15 जनवरी से शुरु होगा लिटरेचर फेस्टिवल, 500 से ज्यादा स्पीकर लेंगे भाग

जयपुर में हिट एंड रन मामला : ऑडी चलाने वाले रणवां की संपत्ति सीज, सहयोगी भी गिरफ्तार

कारगिल युद्ध शहीद भारत-पाक युद्ध झुंझुनूं सैनिकों का जिला
Advertisment