जोधपुर में बाड़ेबंदी के बाद पार्षदों को मिले मोबाइल, चेहरे पर आई खुशी
Jageshwar prasad | Sept 26, 2026, 18:09 IST
बाड़ेबंदी में रखे गए पार्षद, बाद में मोबाइल लौटाए
राजस्थान के नगर निगमों में उपमहापौर पद की वोटिंग पूरी हुई। चुनाव के दौरान पार्षदों को बाड़ेबंदी में रखा गया और मोबाइल फोन ले लिए गए थे। मतदान खत्म होने पर मोबाइल लौटा दिए गए। इससे पार्षदों के चेहरे चमक उठे।
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर में उपमहापौर चुनाव की प्रक्रिया पूरी।
- चुनाव के बाद पार्षदों को वापस मिले मोबाइल फोन।
- मोबाइल मिलने पर पार्षदों के चेहरे पर आई ख़ुशी।
- चुनाव से पूर्व बाड़ेबंदी में रखे गए थे पार्षद।
- जोधपुर में महापौर और उपमहापौर भाजपा के।
चुनाव के दौरान अनुशासन और गोपनीयता बनाए रखने के लिए पार्षदों को बाड़ेबंदी में रखा गया था। उनके मोबाइल फोन भी ले लिए गए थे। मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद पार्षदों को उनके मोबाइल वापस लौटा दिए गए। मोबाइल मिलने पर उनके चेहरों पर खुशी साफ देखी गई।
जोधपुर के भाजपा पार्षदों को उपमहापौर चुनाव की वोटिंग के बाद आज वापस मोबाइल मिले हैं। चेहरे पर मोबाइल की खुशी मेयर के चुनाव जीतने से कहीं ज़्यादा दिखाई दे रही है। pic.twitter.com/JZPaoPfOIS
— Babulal Dhayal Journalist (@BabulalDhayal18) September 26, 2026
जोधपुर में क्या रहा नतीजा?
इससे पहले महापौर पद के चुनाव में भी भाजपा को जीत मिली थी। भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता को 53 वोट मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी को 47 वोट मिले थे। दोनों पदों पर भाजपा का कब्जा हो गया है।
बाड़ेबंदी क्यों की जाती है?
मोबाइल फोन लेने का भी यही कारण है। इससे वोट की गोपनीयता बनी रहती है। कोई भी पार्षद बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं कर सकता। इससे चुनाव में स्वयं की पार्टी के वोट कटने से बच जाते हैं।
मतगणना कैसे हुई?
जोधपुर में भाजपा के दोनों प्रत्याशियों को स्पष्ट बहुमत मिला। महापौर पद पर 53 और उपमहापौर पद पर 52 वोट मिले। इससे साफ है कि भाजपा के पार्षदों ने एकजुटता बनाए रखी। कांग्रेस के प्रत्याशी 47 और 48 वोटों पर सिमट गए।
क्यों अहम है यह नतीजा?
इससे जोधपुर नगर निगम की सत्ता पर भाजपा का पूरी तरह कब्जा हो गया है। अब निगम की कमान भाजपा के पास रहेगी। आने वाले समय में विकास कार्यों और योजनाओं पर इसका असर देखा जा सकता है।
आगे क्या होगा?
उनके सामने शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने की चुनौती भी रहेगी। स्थानीय लोगों को नई टीम से उम्मीदें हैं।
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