जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल -2026: कैलाश सत्यार्थी की किताब पर चर्चा, बोले - कुत्तों के प्रति रखें करुणा

नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई किताब 'करुणा' पर चर्चा की। उन्होंने कुत्तों के प्रति रखें करुणा भाव रखने की अपील की। बांग्लादेश संकट पर बाहरी ताकतों के प्रभाव की बात कही।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (The Sootr)

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News In Short 

  • नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई किताब 'करुणा' के विषय पर चर्चा करने पहुंचे।
  • उन्होंने बांग्लादेश संकट को केवल आंतरिक विद्रोह न मानते हुए बाहरी ताकतों के प्रभाव को माना।
  • उन्होंने कहा कि करुणा सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें सभी जीवों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
  • सत्यार्थी ने कहा कि करुणा को डिजिटल मीटर से मापने की बात की, जो भावनाओं को डेटा के जरिए समझेगा।
  • सत्यार्थी ने  राजनीति, मीडिया, और कॉर्पोरेट क्षेत्र में करुणामई नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।

News In Detail

नोबल पीस प्राइज विजेता कैलाश सत्यार्थी शनिवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल-2026 में पहुंचे। उन्होंने अपनी नई किताब 'करुणा' के विषय पर चर्चा की। उन्होंने समाज में करुणा की अत्यधिक आवश्यकता की बात की। उन्होंने कुत्तों के प्रति रखें करुणा भाव रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने बांग्लादेश में चल रहे हालात पर भी चर्चा की और बांग्लादेश में बाहरी ताकतों का  प्रभाव को बताया।

बांग्लादेश में हैं बाहरी ताकत सक्रीय 

सत्यार्थी ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बातें साझा की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो घटनाएं हो रही है। उसे केवल एक आंतरिक विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश के अंदर चल रही घटनाओं में बाहरी ताकतें सक्रिय हैं। यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और इकॉनमी के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें सब कुछ केवल मोहम्मद यूनुस के भरोसे नहीं छोड़ सकते।

आवारा कुत्तों के प्रति रखें करुणा 

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में केस को लेकर हो रही सुनवाई पर बात करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा हम सभी के अंदर है। यह केवल इंसानों के लिए नहीं होनी चाहिए। हमें सभी प्राणियों के प्रति करुणा रखने की जरूरत है। उनका मानना था कि करुणा एक ऐसी भावना है। जिसे सभी के लिए साझा किया जाना चाहिए, चाहे वह इंसान हो या जानवर।

करुणामई लीडरशिप की आवश्यकता

उन्होंने आगे कहा कि आजकल की प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता की भावना के बावजूद हमें एक 'करुणामई न्यायपालिका', राजनीति और मीडिया की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें कॉर्पोरेट सेक्टर में भी करुणामई लीडरशिप की आवश्यकता है। यह न केवल समाज के लिए, बल्कि आर्थिक विकास के लिए भी जरूरी है।

सहानुभूति भी डिजिटल देखी जाएगी

कैलाश सत्यार्थी ने जेएलएफ 2026 में चर्चा के दौरान कहा कि इंसानियत अब डिजिटल दौर की ओर बढ़ रही है। जहां भावनाओं को भी डेटा के माध्यम से मापा जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐप इस बात का मूल्यांकन करेगा कि सामने खड़ा व्यक्ति आपके प्रति कितनी सहानुभूति रखता है। यह तकनीकी प्रगति केवल गिरते मानवीय मूल्यों को देखने का डिजिटल आईना बनेगा।

3डी पर ध्यान देने की सलाह

उन्होंने कहा कि मैं युवाओं को 3डी (ड्रीम, डिस्कवर और डू) पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देता हू। हमेशा बड़े सपने देखो। हर किसी को सपने देखने और विचार करने की आज़ादी है। जितने स्वतंत्र विचार होंगे, उतनी ही अधिक प्रगति होगी। जब सपने बड़े होंगे, तो आप भी आगे बढ़ेंगे। इसके साथ ही, अपने भीतर की संभावनाओं और शक्तियों को पहचानना भी महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

कैलाश सत्यार्थी ने अपनी नई किताब 'करुणा' के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि करुणा केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक आवश्यक नेतृत्व शैली बन गई है। यह सिर्फ इंसानियत के लिए नहीं, बल्कि हर प्राणी के लिए आवश्यक है। उन्होंने हर क्षेत्र में करुणामई लीडरशिप की आवश्यकता को रेखांकित किया और इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।

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